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शिक्षिका रंजना अवस्थी ने शिक्षा में पढ़ाने के तरीके में नये प्रयोग कर, सँवार दिया बच्चों का भविष्य

संपादन अभिषेक कांत पांडेय नई पहल  नए भारत की तस्वीर, बदल रहा है-सरकारी स्कूल। आइए सुनाते हैं एक ऐसे सरकारी स्कूल की  शिक्षिका की कहानी जिसने पढ़ाने के तरीके में बदलाव करके बच्चों में पढ़ने की ललक पैदा की।  फतेहपुर के प्राइमरी स्कूल की शिक्षिका रंजना अवस्थी ने पढ़ाने के लिए नवाचार का प्रयोग कर बच्चों की बहुमुखी प्रतिभा को निखारा है।  उनका नया प्रयोग आसपास के क्षेत्रों में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।  अभिभावकों ने अपने बच्चों का प्रवेश सरकारी स्कूल में करवाने का फैसला लिया।  उनके नए प्रयोग शिक्षकों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना।  आइए मिलते हैं सहायक अध्यापिका  श्रीमती रंजना अवस्थी जी से। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के पूर्व माध्यमिक विद्यालय बेंती के सादात विकास खण्ड-भिटौरा  में पढ़ाती हैं। आइए जानते हैं उन्हीं की जुबानी उनकी कहानी-   "मेरी नियुक्ति नियुक्ति 23 मार्च, 1999 को प्राथमिक विद्यालय चक काजीपुर, विकास खण्ड- असोथर, जिला-फतेहपुर के अति पिछड़े इलाके में हुई। जो मेरी इच्छा के विरुद्ध थी, पर मम्मी पापा के कहने पर जब तक कहीं औऱ नियुक्ति नहीं होती तब तक कर लो फिर

संज्ञा और उसके भेद

​हिंदी व्याकारण नवाचार कक्षा 4 व 5 संज्ञा और उसके                              सामग्री- 6 कार्ड उसमें संज्ञा के तीनों भेद के उदाहरण लिखा हुआ होगा। यह कार्ड ताश के पत्ते के आकार का होगा। प्रथम चरण सर्वप्रथम शिक्षक द्वारा कक्षा में बच्चों का नाम  पूछेगा। आपक नाम क्या है? इस तरह वह छह बच्चों से नाम पूछकर उन्हें एक एक कार्ड क्रम से दे देगा और बैठने के लिए कहेंगे। कुछ बच्चों से शिक्षक पूछेगा कि वे कहाँ-कहाँ घूमने के लिए गए थे? इस तरह से कुछ स्थानों का नाम वह श्यामपट्ट पर लिख देगा। दूसरा चरण प्रस्तावना प्रश्न के बाद, ब्लैक बोर्ड पर संज्ञा लिखना, फिर किसी बच्चे का नाम ब्लैकबोर्ड पर लिखना। वह किस शहर में रहता है। वह भी लिखना। फिर एक पंक्ति में यह बताना कि मैं प्रयागराज में रहता हूं। तो यहाँ पर संज्ञा कौन-कौन सी है। उसे इंगित करेंगे यानी जो नाम है, वह संज्ञा है। `राजू` यहां पर किसी भी बच्चे का नाम लिख सकते हैं। संज्ञा एक नाम है क्योंकि यह एक लड़के का नाम है। जबकि `प्रयागराज` किसी स्थान का नाम है, इसलिए यह भी संज्ञा है।  श्यामपट् पर व्यक्तिवाचक संज्ञा लिखकर, पहले वाले बच्चे