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लघु-कथा' CBSE BOARD CLASS 9 NEW SYLLABUS LAGHU KATHS LEKHAN

'लघु-कथा' CBSE BOARD CLASS 9 NEW SYLLABUS LAGHU KATHA LEKHAN  लघु और कथा शब्द से मिलकर बना हुआ है। लघु का अर्थ होता है- छोटा और कथा का अर्थ होता है-कहानी। इस तरह लघुकथा का अर्थ हुआ कि 'छोटी कहानी'। छात्रों हिंदी साहित्य को दो भागों में बाँटा गया है, पहला गद्य साहित्य और दूसरा काव्य साहित्य।  गद्य साहित्य के अंतर्गत कहानी, नाटक, उपन्यास, जीवनी, आत्मकथा विधाएँ आती हैं। इसी में लघु-कथा विधा भी 'गद्य साहित्य' का एक हिस्सा है। कहानी उपन्यास के बाद यह विधा सर्वाधिक प्रचलित भी है। आधुनिक समय में इंसानों के पास समय का अभाव होने लगा और वे कम समय में साहित्य पढ़ना चाहते थे तो  'लघु-कथा' का जन्म हुआ। लघु कथा की परंपरा हमारे संस्कृति में 'पंचतंत्र' और 'हितोपदेश' की छोटी कहानियों  से भी  रही है। इन कहानियों को लघु-कथा भी कह सकते हैं। आपने भी छोटी-छोटी लघु कहानियाँ अपने बड़ों से जरूर सुनी होगी।  'पंचतंत्र' में इस तरह की लघु-कथाओं में जीव-जंतु यानी जानवरों और पक्षियों के माध्यम से मनुष्य को नीति की शिक्षा यान

कुआं और मैं कविता

कुआं और मैं     कविता कुआं आज भी सही सलामत है,  बस उसके कुछ कदम की दूरी पर ऊँची ऊँची इमारतें तन गईं,/  खत्म हो गया मोहल्लानुमा गाँव,  बन गईं घोसलानुमा कालोनियाँ।  खत्म हो गई, बिराहा कठपुतली, रामलीला लोक संस्कृति/ न वैसे  लोग,  ना ऐसे लोग,  जाने कैसे-कैसे लोग, होम हो गया वह मोहल्लानुमा गांव  या गांवनुमा मोहल्ला,  शहर ने अपने रंग में रंग लिया हटा दिए गए लोग उजाड़ दी गई बस्ती, उजाड़ दिया गया मोहल्ला क्योंकि बसाना था अमीरों के लिए घोसला। बाप से दादाओं ने बताया था,  कई बार अपने इतिहास में उजड़ा और बसा है  पर कारण तब और थे  पर अब कारण-  शहर में घटती जमीन का सैलाब  इस मुहल्लेनुमा गाँव में आया था पीढ़ियों से रह रहे लोगों को उजाड़ दिया लोगों ने अपने टूटते घरों में लोगों ने अपने टूटते जीवन को देखा लोगों ने अपने बांधे छप्पर को गिरते देखा लोगों ने अपने हाथों से उठाएं दीवार को ढहते देखा/ आंगन में लगा अनार का पेड़ फिर उसके बाद कभी नहीं फरा वहां कुआं  अभी भी है उसके जगत पर मेरे पैरों के निशान अभी भी है उसके पत्थरों पर उस रस्सी के निशान अभी भी है खामोश ऊँची बिल्डिंगों को देख कुआँ अभी भी खोजता है हमा