लघु-कथा' CBSE BOARD CLASS 9 NEW SYLLABUS LAGHU KATHS LEKHAN सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

लघु-कथा' CBSE BOARD CLASS 9 NEW SYLLABUS LAGHU KATHS LEKHAN

'लघु-कथा' CBSE BOARD CLASS 9 NEW SYLLABUS LAGHU KATHA LEKHAN 

लघु और कथा शब्द से मिलकर बना हुआ है। लघु का अर्थ होता है- छोटा और कथा का अर्थ होता है-कहानी।
इस तरह लघुकथा का अर्थ हुआ कि 'छोटी कहानी'।


छात्रों हिंदी साहित्य को दो भागों में बाँटा गया है, पहला गद्य साहित्य और दूसरा काव्य साहित्य। 
गद्य साहित्य के अंतर्गत कहानी, नाटक, उपन्यास, जीवनी, आत्मकथा विधाएँ आती हैं। इसी में लघु-कथा विधा भी 'गद्य साहित्य' का एक हिस्सा है। कहानी उपन्यास के बाद यह विधा सर्वाधिक प्रचलित भी है।


आधुनिक समय में इंसानों के पास समय का अभाव होने लगा और वे कम समय में साहित्य पढ़ना चाहते थे तो  'लघु-कथा' का जन्म हुआ।
लघु कथा की परंपरा हमारे संस्कृति में 'पंचतंत्र' और 'हितोपदेश' की छोटी कहानियों  से भी  रही है। इन कहानियों को लघु-कथा भी कह सकते हैं। आपने भी छोटी-छोटी लघु कहानियाँ अपने बड़ों से जरूर सुनी होगी।
 'पंचतंत्र' में इस तरह की लघु-कथाओं में जीव-जंतु यानी जानवरों और पक्षियों के माध्यम से मनुष्य को नीति की शिक्षा यानी नैतिक शिक्षा दी जाती है। 
छात्रों! आपने भी कछुआ और खरगोश की दौड़ वाली 'पंचतंत्र' की कथा सुनी होगी, इसी तरीके से 'हितोपदेश' की भी कथाएँ भी हमारे समाज में प्रचलित हैं।
आज हिंदी साहित्य में लघु-कथा का कलेवर और उद्देश दोनों बदल गया है।
छात्रों! हिंदी साहित्य की गद्य विधा में इस समय आधुनिककाल चल रहा है। आधुनिक समय में हर तरह की समस्याएँ हैं। 
इन समस्याओं को काव्य के रूप में तो पिरोया जा सकता है, लेकिन गद्य रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कहानी, नाटक के माध्यम से की गई लेकिन यह विधाएँ अपने बड़े विषय-वस्तु के कारण इतना प्रभावशाली नहीं हो पाती है कि कम शब्दों में किसी क्षण की बातों को पाठक तक कम शब्दों में पहुँचा सके। 
आज इंसानों की संवेदना और उनकी समस्याएँ कई तरह की हैं। इन समस्याओं और जीवन मूल्यों को केवल लघु कथा के माध्यम से कम शब्दों में कह जाने की यह विधा आजकल साहित्य की सबसे प्रचलित विधा बन गई है। 
इसलिए लघु-कथा में इन कथ्यों को कहने की परंपरा को विकसित करने के लिए  आधुनिकाल में लघुकथा का जन्म हुआ है।
लघु-कथा में शब्दों की सीमा को लेकर साहित्यकारों में मतभेद बना है। यह एक शोध का विषय है।


कहानी की तरह लघु-कथा में भी कथ्य यानी कंटेंट होता है लेकिन यह कहानी से अपनी लेखन-प्रक्रिया और लेखन शैली से बिल्कुल अलग होता है।

हिंदी साहित्य में लघु-कथा की अपनी एक समृद्ध  परंपरा रही है। 

छात्रों! कक्षा '9' के पाठ्यक्रम में आपको लघुकथा दिए गए बिंदु के आधार पर लिखना है। 
इसलिए लघुकथा लिखने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। निम्नलिखित बिंदुओं पर आप ध्यान केंद्रित कीजिए-

प्रश्न पत्र में दिए गए बिंदु के आधार पर  100 से 120 शब्दों में कहानी को डेवलप कर उसे  लघुकथा विधा में लिखना है। 
लघु कथा लिखने के लिए आपको निम्नलिखित बिंदुओं तो समझना जरूरी है-

निरंतरता-
लघुकथा की कहानी यानी कि आप क्या कहना चाहते हैं को प्रस्तुत करने से पहले उसके घटनाक्रम की निरंतरता पर ध्यान देना जरूरी है। निरंतरता का मतलब की घटना एक के बाद एक सही क्रम में होनी चाहिए। दूसरी बात की कहानी पढ़ते वक्त किसी भी तरीके की लेखन में बाधा नहीं होनी चाहिए यानी कि कहानी स्पष्ट समझ में आने वाली होनी चाहिए।


कथात्मकता
इसका अर्थ है कि 'कथा कहने का तरीका' यानी कहानी होना चाहिए। बिना कहानी के कोई भी लघुकथा पाठकों को आकर्षित नहीं करती है। यानी कि इसमें कंटेंट होना जरूरी है। 

 *प्रभावी संवाद अथवा पात्र अनुकूल संवाद* 

लघु कथा भले ही छोटी होती है लेकिन सही और प्रभावशाली संवाद के कारण ही कथा को संप्रेषित यानी कम्युनिकेट करती है। जैसे यदि पात्र यानी कैरेक्टर कोई ग्रामीण क्षेत्र का है और कम पढ़ा लिखा है तो उसका संवाद यानी डायलॉग उसी के अनुसार होगा। प्रभावशाली संवाद होना जरूरी है। अनावश्यक बातें लघु कथा में लिखने से कथा का आकार बड़ा हो जाता है और वह प्रभावशाली नहीं होता है, इसीलिए डायलॉग कम शब्दों में और बहुत ही कम होता है। यानी की जरूरत के अनुसार ही संवाद लिखा जाता है।लघुकथा की कहानी वर्णनात्मक दृष्टि से भी कही जा सकती है।

 *रचनात्मकता व कल्पनाशीलता* 

लघुकथा  या किसी भी साहित्य रचना में रचनात्मकता और कल्पनाशीलता बहुत ही जरूरी है। लिखने वाले का अपना नजरिया और सोच होता है। जिसे वह अपनी कल्पना शक्ति आधार पर कहानी को प्रभावशाली बनाता है। रचनात्मकता से किसी भी विधा में वह उत्सुकता और रोचकता को बनाए रखते हैं। 
 इस पाठ्यक्रम में लघुकथा लेखन से संबंधित  प्रश्न में भी यही तकनीक आपको अपनाना है, जो शुरुआत के बिंदु प्रश्न में दिए हैं, उनके आधार पर अपनी कल्पना शक्ति और रचनात्मकता के साथ  लघु-कथा को पूरा करना है। परंतु इसके लिए आपको अभ्यास की आवश्यकता है , इसके लिए आपको व्याकरण और शब्दों पर ध्यान देना चाहिए।  यहाँ ध्यान देने वाली बात है कि हर व्यक्ति की रचनात्मकता और कल्पना शक्ति अलग-अलग हो सकती है लेकिन दिए गए प्रश्न में लघुकथा के शुरुआती बिंदु से लघुकथा के अंत तक में उसमें जिज्ञासा रोचकता के साथ ही कहानी के घटनाक्रम की निरंतरता और कथात्मकता यानी कहानी होना जरूरी है, जैसा कि मैंने अभी बताया कि प्रभावी संवाद यानी पात्रानुकूल संवाद होना भी जरूरी है।

 *जिज्ञासा रोचकता* 
आपकी लघुकथा तब अच्छी मानी जाएगी, जब वह अंतत पाठकों में जिज्ञासा और रोचकता पैदा करती है। यानी कि लघुकथा के अंतिम
  पंक्तियों में उस जिज्ञासा या रोचकता का खुलासा होना चाहिए, किस कारण से पाठक उस लघुकथा को पढ़ने के लिए अंत तक की आपकी पंक्तियों को पढ़ना चाहता हैं यानी जानना चाहता हैं कि इस लघु कथा का अंत क्या होगा। 

लघु कथा में, लघु कथा के अंत में कुछ ऐसी सवाल वाली बात होनी चाहिए  जोकि पाठक को सोचने पर मजबूर कर दे।
 वह फिर एक नई कहानी के उधेड़ बुन में और जिज्ञासा में डूब जाए, यह एक अच्छे लघु-कथा की पहचान है। 
यह लघु-कथा के लेखन में पाठकों को आकर्षित करने वाली सबसे बड़ी कड़ी मानी जाती है।


उदाहरण

एक लघु कथा पढ़िए

संघर्ष का सौंदर्य

मिट्टी ने मटके से पूछा, "मैं भी मिट्टी, तू भी मिट्टी, परंतु पानी मुझे बहा ले जाता है और तुम पानी को अपने में समा लेते हो। वह तुम्हें गला भी नहीं पाता, ऐसा क्यों?"
मटका हँसकर बोला, "यह सच है कि तू भी मिट्टी है और मैं भी मिट्टी हूँ. पर मेरा संघर्ष अलग है। पहले मैं पानी में भीगा, पैरों से गूँथा गया, फिर चाक पर चला कुम्हार के। थापी की चोट, आग की तपन को झेला। संघर्ष झेलकर पानी को अपने में रखने की ताकत मैंने पाई।"



मंदिर की सीढ़ियों पर जड़े पत्थर ने मूर्ति के पत्थर से पूछा, "भाई! तू भी पत्थर मैं भी पत्थर, पर लोग तुम्हारी पूजा करते हैं और मुझे पैरों से रौंदकर, बिना ध्यान दिए चलते हैं। ऐसा क्यों?

मूर्ति के पत्थर ने उत्तर दिया,  "क्या! तू मेरे संघर्ष को जानता है? मैंने इस शरीर पर कितनी छैनियों के प्रहार सहे हैं, मुझे कई बार घिसा गया है, मार और संघर्ष की पीड़ा को सहकर ही मैं इस रूप में आया हूँ। संघर्षों की भट्टी में तपकर ही ‘जीवन’ स्वर्ण बनता है।

'संघर्ष का सौंदर्य' लघु कथा के माध्यम से
 निम्नलिखित बातें आप लघु कथा लेखन के लिए सीख सकते हैं-

1. इस लघु कथा में मिट्टी के मटका बनने 
और पत्थर के मूर्ति के संघर्ष को बताया है।
संघर्ष के महत्व को बतलाया गया है।

2. यह एक शिक्षाप्रद लघु कथा है।
इस लघुकथा में तुलना करके बात को रोचकता से कही गई है।

3. पात्र के अनुकूल संवाद है।

4. अंत में जिज्ञासा यानी कौतूहल शांत होती है
 जो पाठकों में शुरू से बनी रहती है।


5.यह लघुकथा के श्रेणी में आती है और नैतिक शिक्षा 
देने वाली यह लघुकथा है।


लघु-कथा लेखन
अभ्यास
कक्षा -'9' के पाठ्यक्रम में लघुकथा लेखन के अंतर्गत 5 अंकों का लघुकथा लिखने का प्रश्न पूछा जाएगा।
लघुकथा लेखन के लिए प्रश्न की प्रकृति इस तरह से हो सकती है-

निम्नलिखित प्रस्थान बिंदु के आधार पर 100 से 120 शब्दों में शीर्षक सहित एक लघु कथा लिखिए-


एक बूढ़ा किसान था। उसके चारों पुत्र आपस में झगड़ा करते थे। किसान बहुत दुखी था। उसने एक दिन अपने चारों पुत्रों को बुलाया, दुखी मन से कहा, " आपस में झगड़ा करना नहीं करना चाहिए और तुम लोगों को मिल जुल कर रहना चाहिए।" पिताजी की बातें सुनकर चारों पुत्र वहाँ से चले गएँ। पर लड़ाई-झगड़े का सिलसिला जारी रहा, फिर एक दिन उस बूढ़े किसान ने एक उपाय सोचा...

Class 9 Hindi A CBSE BOARD PATTERN


एक अपठित गद्यांश 10 अंक 

व्याकरण 16 अंक 
पाठ्य पुस्तक क्षितिज भाग 1 
पाठ्यपुस्तक कृतिका भाग 1 34 अंक
कुल 60 अंक
लेखन 20 अंक
अनुच्छेद लेखन 5 अंक
पत्र लेखन 5 अंक
संवाद लेखन 5 अंक
लघुकथा लेखन 5 अंक

इस तरह कुल 80 अंक का लिखित प्रश्न पत्र और 20 अंक आंतरिक मूल्यांकन

वीडियो के द्वारा सीबीएसई बोर्ड कक्षा 9 की हिंदी  के पाठ्यक्रम में पूछे जाने वाले लघुकथा लेखन के  बारे में जानना चाहते हैं तो यहां पर क्लिक करें

कॉपीराइट

 सूचना लेखन पर वीडियो क्लास

टिप्पणियां

टिप्पणी पोस्ट करें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Laghu Katha Lekhan CBSE Board

    लघु कथा कैसे लिखें, उदाहरण से समझें CBSE board hindi  प्रस्थान बिंदु के आधार पर लघु कथा (laghu katha)  लिखना। CBSE Board 9th class Laghu Katha lekhan दसवीं बोर्ड की कक्षा 9 के सिलेबस में और कई  बोर्ड की परीक्षा में इस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं।  (new syllabus 2020 Laghu Katha lekhan)    दिए गए प्रस्थान बिंदु (prasthan Bindu) का मतलब है कि दो या चार लाइन लघुकथा के दिए होते हैं। उसके बाद आपको 80 से 100 शब्दों में लघुकथा को पूरा करना होता है। उसका एक शीर्षक (title) लिखना होता है।  नई शिक्षा नीति 2020 (New Education Policy) में भाषा में रचनात्मक लेखन (Creative Writing) को बढ़ावा दिया गया है। इसलिए  हिंदी Hindi, अंग्रेजी, मराठी  उर्दू किसी भी भाषा के पेपर में संवाद लेखन, लघुकथा, लेखन अनुच्छेद, (anuchchhed lekhan) लेखन विज्ञापन लेखन, (Vigyapan lekhan) सूचना लेखन (Hindi mein Suchna lekhan) जैसे टॉपिक में नई शिक्षा नीति के ( new education policy 2020) अंतर्गत सिलेबस में रखे गए हैं।  लघुकथा लेखन 9 व 10 की परीक्षा में पूछा जाता है Laghu katha lekhan in Hindi in board examination आप ह

Laghu katha prasthan bindu ke adhar per kaise likhe/ लघु कथा प्रस्थान बिंदु के आधार पर कैसे लिखें?

    लघु कथा प्रस्थान बिंदु के आधार पर कैसे लिखें? Laghu katha prasthan bindu ke adhar per kaise likhe लघुकथा लेखन उदाहरण सहित    कई बोर्ड की परीक्षाओं (board examination CBSE board) में लघुकथा (laghu Katha) लिखने को दिया जाता है। स्टेट बोर्ड (State board) की परीक्षा में भी लघुकथा पर प्रश्न (question of laghu katha) पूछता है। लघु कथा कैसे लिखा (How To write short story in hindi) जाए? आज हम laghu katha टॉपिक पर चर्चा करने जा रहे हैं। छात्रों सीबीएसई बोर्ड की कक्षा 9 के नए (CBSE board syllabus class 9 session 2020-21) सिलेबस 2020 के अनुसार हिंदी यह पाठ्यक्रम में प्रस्थान बिंदु के आधार पर लघु कथा लिखने का प्रश्न इस बार आएगा। CBSE class 10 B hindi syllabus. लघु कथा लेखन पूछा जाता है। According to the new syllabus 2020 of class 9 of CBSE board students, this question of writing short story based on the point of departure in Hindi syllabus will come this time.  निम्नलिखित   प्रस्थान बिंदु के आधार पर 100 से 150 शब्दों में एक लघुकथा लिखिए। (Write a short story in 100 to 150 words based on t