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बच्चों को सिखाएं मोरल वैल्यूज.moral values की बातें Tips

बच्चों को  सिखाएं मोरल वैल्यूज.moral values  की बातें Tips

Bacho ko sekhay moral values शिक्षक व अभिभावक होने के नाते अपने छात्रों में नैतिक मूल्यों (Moral Values) सिखाएं।

बच्चों Moral (मोरल वैल्यूज) क्यों सिखाना चाहिए?

आज एजुकेशन (Education) में केवल पढ़ना ही जरूरी नहीं है। बल्कि पढ़ाई के साथ बच्चे को मोरल वैल्यूज सीखाएँ ताकि उनका कैरेक्टर Character अच्छा बन सकें। पढ़ाई के साथ-साथ नैतिक मूल्य और चरित्र निर्माण ( Character) भी बच्चों में होना जरूरी है। अगर बच्चे नैतिक मूल्य को नहीं समझते हैं तो वह सभ्य नागरिक नहीं बन सकते हैं। इस लेख में नैतिक मूल्य moral value और चरित्र निर्माण कैसे किया जाए इससे संबंधित कुछ व्यवहारिक टिप्स (Practical tips) दिए गए हैं जिसे आप अपना सकते हैं।

Moral values bacho ko kaise sikhaye


मोरल वैल्यूज सीख के खुद उदाहरण केसे बने
Describe biographies of great men for moral values

आज के नये ज्ञान (new Gyan) में बच्चे को नैतिक मूल्य सिखाना जरूरी है। अच्छी बातें छात्रों में विकसित करें। दूसरों के प्रति दया की भावना विकसित करने के लिए टीचर या पेरेंट्स को खुद के उदाहरण के साथ ही व्यवहारिक जीवन के उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।

 बच्चों को सिखाएं मोरल वैल्यूज महापुरुषों की जीवनी कैसे बताएं

महापुरुषों की जीवनी  उनके त्याग और समर्पण की भावना के बारे में बताएंगे ही नहीं बल्कि अनुभव भी कराएंगे इसलिए महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) के किसी जीवन (life experience) के एक अनुभव पर छोटी सी लघु नाटिका (short Drama) कक्षा के  कलांश (Period) के दौरान बच्चों से तैयार करने के लिए कहेंगे। 

बच्चे उस महापुरुष के व्यक्तित्व और उस समय उनके द्वारा किए गए कार्यों का अनुभव उस लघु नाटिका के रूप में अवश्य करेंगे और इस तरह से उन्हें प्रैक्टिकल ज्ञान प्राप्त होगा। (Practical knowledge)

डॉक्यूमेंट्री या फिल्म दिखाकर नैतिक मूल्य के लिए बच्चों को केसेप्रेरित करना
(Motivating children to moral value by showing a documentary or film)

 डॉक्यूमेंट्री और फिल्म एक सशक्त माध्यम होता है। देश की किसी ऐसी समस्या पर बनी फिल्म को दिखाकर, उस पर कक्षा चर्चा (class discussion) करना और उस समस्या पर समाधान निकालने के लिए प्रेरित (Motivation) करना।

भविष्य में आप एक वैज्ञानिक, एक डॉक्टर, एक टीचर, एक व्यवसाई बनकर उस समस्या का हल कैसे निकाल सकते हैं? इसके लिए उन्हें प्रेरित करना,  बच्चों में अंदर उत्तरदायित्व Responsibility का भार अभी से डालना था कि छात्र चिंतन- मनन (Contemplation) कर सके यह एक तरह का शिक्षण तरीका है। (Method of teaching.

बच्चों को मोरल वैल्यू कैसे सिखाएं घर पर दिखावे की संस्कृति से उन्हें दूर कैसे रखा जाए (Keep away to Consumerist culture)

 उपभोक्तावादी संस्कृति (counsumer calture) में बिना उपयोग किए चीजों को बेकार समझ लेना, फैशन के चक्कर में उपयोगी कपड़े को बेकार समझ लेना आज की युवा पीढ़ी को बाजारवाद बिगाड़ रही है। लेकिन स्कूली शिक्षा उन्हें सही दिशा दिखा सकती है। ऐसी कहानियां सम्मिलित की जाएगी, जो हमारे समाज के सच का आइना हो, अपने संसाधनों  का सही उपयोग करना। बेवजह  के झूठे दिखावे से दूर रहना।

बच्चों को सिखाएं दूसरे की मदद करना Help to another

 बच्चों को सिखाएं कि दूसरे की मदद करना मदद इसलिए भी जरूरी है क्योंकि हमारी मदद भी बहुत लोग करते हैं इसलिए जरूरत पड़े तो दूसरे की हेल्प बिना स्वार्थ के करना यह बात भी बताई जाए।

बच्चों को मोरल वैल्यू सिखाएं इसके लिए कुछ उदाहरण हैं-

 बच्चों को मोरल वैल्यू सिखाएं इसके लिए कुछ उदाहरण दिया गया एक कहानी पेड़ के माध्यम से बताया गया है। वृक्ष के माध्यम से कि वह कुछ लेता नहीं लेकिन हमारी बहुत मदद करता है। 

 दूसरों की मदद करने में जो सुख और आनंद होता है उसकी अनुभूति बच्चों को व्यवहारिक तौर पर कराना। इसके लिए उन्हें प्रेरित करना अपने  आसपास जरूरतमंद लोगों की मदद कैसे कर सकते हो।

सभी मानव जाति और सभी धर्म का सम्मान करना बच्चों को सिखाना कर्मों जरूरी?
To teach respect to all mankind and all religions

सर्वधर्म समभाव की अवधारणा बताना।  सभी धर्म का एकमात्र उद्देश्य मानव कल्याण इसलिए धार्मिक भेदभाव जैसी चीजों का कोई स्थान नहीं होना चाहिए।  सभी वर्ग, जाति और धर्म के लोगों का सम्मान करना सिखाना चाहिए।

बच्चों को सिखाएं की पढ़ाई के समय कौन सी बातें बताना जरूरी है

 सार्वजनिक भवन, (Preservation of national heritage like public buildings, historical buildings, park railways etc. is necessary.) ऐतिहासिक इमारतें, पार्क रेलवे इत्यादि राष्ट्रीय धरोहर का संरक्षण करना जरूरी है।  बच्चों को यह बात बताना कि यह संसाधन (Resources) सभी के उपयोग की है।


इन्हें हम नुकसान पहुंचा कर या  इसे गंदा कर के हम अपनी ही चीजों का नुकसान कर रहे हैं क्योंकि अगर  ये राष्ट्रीय धरोहर National heritage नष्ट हो गईं तो फिर दोबारा उस तरह से नहीं बन पाएंगी।

फिर आने वाली आपकी पढ़ी यानी कि आपके बच्चे इस ऐतिहासिक  धरोहर के माध्यम से कैसे इतिहास के गुजरे समय को समझ पाएंगे।


सार्वजनिक संसाधनों को गंदा या उसे नुकसान पहुंचाना अनैतिक होने के साथ-साथ  अपराध भी है।  हमें इन सब का संरक्षण करना चाहिए साफ सफाई का ध्यान रखना चाहिए। 


बच्चों को सिखाएं राष्ट्रीय एकता की बात बताना, कैसे हम एक होकर रह सकते हैं
How can we unite to talk about national unity.

बच्चों को सिखाएं की नेशनल इंटीग्रेशन यानी राष्ट्रीय एकता और बंधुता की भावना स्थापित करने के लिए शिक्षक को स्वयं भी इन भावनाओं का कद्र करना चाहिए। उनके व्यवहार में यह चीज सामने आना चाहिए।

संस्कृति के आधार पर भेदभाव नहीं करना चाहिए। खान-पान, रहन- सहन पहनावा के आधार पर अगर हम भेदभाव करने लगे तो इसका मतलब हम मानव होकर मानव का सम्मान नहीं करते हैं। बच्चों के मोरल वैल्यूज और अच्छे संस्कार के लिए आपको इन बातों को बताते रहना है। खुद में भी प्रैक्टिकल के तौर पर उनके लिए आदर्श भी बनना होगा।

जब हम किसी दूसरे संस्कृति के बनाए हुए अविष्कार को अपना सकते हैं तो उसकी संस्कृति का सम्मान क्यों नहीं कर  सकते हैं। कुछ तर्क है जो आप बच्चों को बता सकते हैं। मानव सेवा का भाव होगा तो मोरल वैल्यू जल्दी सीखेंगे। जरूरतमंदों की मदद का भाव या किसी दुखी व्यक्ति के प्रति करुणा की संवेदना बच्चों में आती ही है। इन सब बातों की मदद से उनके अंदर नैतिकता यानी मोरल वैल्यू की बातें बच्चे को सिखा सकती हैं।

इस तरह के विश्लेषणात्मक प्रश्नों के माध्यम से हम बच्चों में चिंतन- मनन की प्रवृत्ति को जाग्रत करते हैं (Through analytical questions, we awaken the tendency of thinking among children) और वह जब धीरे-धीरे बड़ा होता है तो सही और गलत के फैसले स्वयं ही लेने लगता है।


जैसे जैसे आप इन बातों को सिखाते हैं तो बच्चा सच के मार्ग पर अग्रसर होने लगता है, जैसे बड़े होने पर महात्मा  गांधी ने सत्य के मार्ग को अपनाया (Mahatma Gandhi adopted the path of truth)  हमारी शिक्षा की दिशा सही हो तो हर बालक  बड़ा होकर महान व्यक्तित्व बन सकता है। अरविंदो घोष के शिक्षा दर्शन में इन्हीं बातों का उल्लेख हुआ है।

(These things have been mentioned in the education philosophy of Arvindo Ghosh.)

आपसे एक टीचर हैं और पेरेंट्स हैं आप अपने बच्चे के भविष्य को उज्ज्वल बना सकते हैं। आपका बच्चा नैतिक मूल्य ऊंचा उठेगा अखाड़ा बचपन से ही मोरल वैल्यू को समझेगा निश्चित ही उसका कैरेक्टर अच्छा होगा और फिर आपका बच्चा आपके जीवन का सहारा बनेगा।

वह कामयाब भी होगा तो भी आपके साथ होगा। यही मोरल वैल्यू एजुकेशन जरूरी है। इसके लिए स्कूल के साथ-साथ घर में भी आपको बेहतर माहौल अपने बच्चे को देना है।

सबसे बड़ी बात कि आप खुद ही उनके आदर्श बने निश्चित ही आपका बच्चा आप के नक्शे कदम पर चलेगा आपके बुढ़ापे का सहारा भी बनेगा।



  अच्छी आदतें बच्चे को चरित्रवान और मूल्यवान बनाता है। बच्चों में यह ज्ञान व्यवहारिकता के उदाहरणों (प्रैक्टिकल एग्जांपल) के से ही दिया जा सकता है।

  आज का इंसान अज्ञानता के दलदल में फंसते जा रहे हैं,  भले वह पढ़ा- लिखा हो लेकिन सच्चा ज्ञान अपनी आत्मबल से ही प्राप्त होता है और इसका मार्गदर्शक  गुरु यानी मेंटर होता है। लेकिन अगर सत्यता के आसमान को देखें तो पता चलता है कि सत्य हासिल करना आसान है। उसके लिए हमें विचारों को परिमार्जित करते रहना चाहिए। अपने बच्चे में बचपन से ही मोरल वैल्यू का बीज बोना है ताकि बड़ा होकर वह एक ऐसा पेड़ बने जो इस देश और समाज को के साथ आपके परिवार के मान सम्मान को बढ़ाता जाए।


अभिषेक कांत 

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