CBSE Board Class 10 Education funda Hindi

लघु-कथा’ CBSE BOARD CLASS 9 NEW SYLLABUS LAGHU KATHS LEKHAN

न्यू सिलेबस सीबीएसई बोर्ड लघु कथा लेखन क्लास नाइंथ

‘लघु-कथा’ CBSE BOARD CLASS 9 NEW SYLLABUS LAGHU KATHA LEKHAN 

 
लघु और कथा शब्द से मिलकर बना हुआ है। लघु का अर्थ होता है- छोटा और कथा का अर्थ होता है-कहानी। Laghu Katha ke Udharan class 9th hindi term-2 sylabuss 2022 hindi 
 
न्यू सिलेबस सीबीएसई बोर्ड लघु कथा लेखन क्लास नाइंथ
 
 
 

इस तरह लघुकथा का अर्थ हुआ कि ‘छोटी कहानी’। the shrot story

 
 
छात्रों हिंदी साहित्य को दो भागों में बाँटा गया है, पहला गद्य साहित्य (gadya sahitya) और दूसरा काव्य साहित्य। 
गद्य साहित्य के अंतर्गत कहानी, नाटक, उपन्यास, जीवनी, आत्मकथा विधाएँ आती हैं। इसी में लघु-कथा विधा भी ‘गद्य साहित्य’ का एक हिस्सा है। कहानी उपन्यास के बाद यह विधा सर्वाधिक प्रचलित भी है।
 
लघुकथा की महत्वपूर्ण बातें the important character of laghu katha in Hindi
लघु कथा क्यों लिखी जाती है?
 
1.आधुनिक समय में इंसानों के पास समय का अभाव होने लगा और वे कम समय में साहित्य पढ़ना चाहते थे तो  ‘लघु-कथा’ का जन्म हुआ।
 
लघु कथा का जन्म कैसे हुआ? हमारी संस्कृति में लघु कथा का क्या-क्या रूप है? laghu Katha kya hota hai?
 
2.लघु कथा की परंपरा हमारे संस्कृति में ‘पंचतंत्र’ और ‘हितोपदेश’ की छोटी कहानियों  से भी  रही है। इन कहानियों को लघु-कथा भी कह सकते हैं। आपने भी छोटी-छोटी लघु कहानियाँ अपने बड़ों से जरूर सुनी होगी।
 
 3.’पंचतंत्र’ में इस तरह की लघु-कथाओं में जीव-जंतु यानी जानवरों और पक्षियों के माध्यम से मनुष्य को नीति की शिक्षा यानी नैतिक शिक्षा दी जाती है। 
 
4.छात्रों! आपने भी कछुआ और खरगोश की दौड़ वाली ‘पंचतंत्र’ की कथा सुनी होगी, इसी तरीके से ‘हितोपदेश’ की भी कथाएँ भी हमारे समाज में प्रचलित हैं।
 
5.आज हिंदी साहित्य में लघु-कथा का कलेवर (शैली) और उद्देश दोनों बदल गया है।
 
छात्रों! हिंदी साहित्य की गद्य विधा में इस समय आधुनिककाल चल रहा है। आधुनिक समय में हर तरह की समस्याएँ हैं। 
 
 laghu Katha Kavita ki tarah prabhavshali kyon hai
 
6. इन समस्याओं को काव्य के रूप में तो पिरोया जा सकता है, लेकिन गद्य रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कहानी, नाटक के माध्यम से की गई लेकिन यह विधाएँ अपने बड़े विषय-वस्तु के कारण 
 
7. इतना प्रभावशाली नहीं हो पाती है कि कम शब्दों में किसी क्षण की बातों को पाठक तक कम शब्दों में पहुँचा सके। 
 
8. आज इंसानों की संवेदना और उनकी समस्याएँ कई तरह की हैं। इन समस्याओं और जीवन मूल्यों को केवल लघु कथा के माध्यम से कम शब्दों में कह जाने की यह विधा आजकल साहित्य की सबसे प्रचलित विधा बन गई है। 
 
9. इसलिए लघु-कथा में इन कथ्यों को कहने की परंपरा को विकसित करने के लिए  आधुनिकाल में लघुकथा का जन्म हुआ है।
लघु-कथा में शब्दों की सीमा को लेकर साहित्यकारों में मतभेद बना है। यह एक शोध का विषय है।
 
10. कहानी की तरह लघु-कथा में भी कथ्य यानी कंटेंट होता है लेकिन यह कहानी से अपनी लेखन-प्रक्रिया (writing process) और लेखन शैली (writing style) से बिल्कुल अलग होता है।
 
11. हिंदी साहित्य में लघु-कथा की अपनी एक समृद्ध  परंपरा रही है। 
छात्रों! कक्षा ‘9’ के पाठ्यक्रम (laghu Katha syllabus) में आपको लघुकथा दिए गए बिंदु के आधार पर लिखना है। 
 

laghu Katha kaise likhe laghu Katha likhane ke liye kaun si baten Dhyan rakhen

 
इसलिए लघुकथा लिखने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। निम्नलिखित बिंदुओं पर आप ध्यान केंद्रित कीजिए-
 
प्रश्न पत्र में दिए गए बिंदु के आधार पर  100 से 120 शब्दों में कहानी को डेवलप कर उसे  लघुकथा विधा में लिखना है। 

लघु कथा लिखने के लिए आपको निम्नलिखित बिंदुओं तो समझना जरूरी है-

 

निरंतरता- continuity

 
लघुकथा की कहानी यानी कि आप क्या कहना चाहते हैं को प्रस्तुत करने से पहले उसके घटनाक्रम की निरंतरता पर ध्यान देना जरूरी है। निरंतरता (continuity) का मतलब की घटना एक के बाद एक सही क्रम में होनी चाहिए। दूसरी बात की कहानी पढ़ते वक्त किसी भी तरीके की लेखन में बाधा नहीं होनी चाहिए यानी कि कहानी (story) स्पष्ट समझ में आने वाली होनी चाहिए। 
 
 

कथात्मकता (storytelling)

 
इसका अर्थ है कि ‘कथा कहने का तरीका’ यानी कहानी होना चाहिए। बिना कहानी के कोई भी लघुकथा पाठकों को आकर्षित नहीं करती है। यानी कि इसमें कंटेंट होना जरूरी है। 
 

 *प्रभावी संवाद अथवा पात्र अनुकूल संवाद*  (Effective dialogue or character friendly dialogue)

 
लघु कथा भले ही छोटी होती है लेकिन सही और प्रभावशाली संवाद के कारण ही कथा को संप्रेषित  (communicated) करती है। जैसे यदि पात्र यानी कैरेक्टर कोई ग्रामीण क्षेत्र का है और कम पढ़ा लिखा है तो उसका संवाद यानी डायलॉग उसी के अनुसार होगा। प्रभावशाली संवाद होना जरूरी है। अनावश्यक बातें लघु कथा में लिखने से कथा का आकार बड़ा हो जाता है और वह प्रभावशाली नहीं होता है, इसीलिए डायलॉग कम शब्दों में और बहुत ही कम होता है। यानी की जरूरत के अनुसार ही संवाद लिखा जाता है।लघुकथा की कहानी वर्णनात्मक (describe) दृष्टि से भी कही जा सकती है।
 

 *रचनात्मकता व कल्पनाशीलता* (Creativity and Imagination)

लघुकथा  या किसी भी साहित्य रचना में रचनात्मकता और कल्पनाशीलता बहुत ही जरूरी है। लिखने वाले का अपना नजरिया और सोच होता है। जिसे वह अपनी कल्पना शक्ति आधार पर कहानी को प्रभावशाली बनाता है। रचनात्मकता से किसी भी विधा में वह उत्सुकता और रोचकता को बनाए रखते हैं। 
 इस पाठ्यक्रम में लघुकथा लेखन से संबंधित  प्रश्न में भी यही तकनीक आपको अपनाना है, जो शुरुआत के बिंदु प्रश्न में दिए हैं, उनके आधार पर अपनी कल्पना शक्ति और रचनात्मकता के साथ  लघु-कथा को पूरा करना है। परंतु इसके लिए आपको अभ्यास की आवश्यकता है , इसके लिए आपको व्याकरण और शब्दों पर ध्यान देना चाहिए।  यहाँ ध्यान देने वाली बात है कि हर व्यक्ति की रचनात्मकता और कल्पना शक्ति अलग-अलग हो सकती है लेकिन दिए गए प्रश्न में लघुकथा के शुरुआती बिंदु से लघुकथा के अंत तक में उसमें जिज्ञासा रोचकता (intrest) के साथ ही कहानी के घटनाक्रम की निरंतरता (continuity) और कथात्मकता यानी कहानी (story) होना जरूरी है, जैसा कि मैंने अभी बताया कि प्रभावी संवाद यानी पात्रानुकूल संवाद होना भी जरूरी है।
 

 *जिज्ञासा -रोचकता* 

 
आपकी लघुकथा तब अच्छी मानी जाएगी, जब वह अंतत पाठकों में जिज्ञासा (curiosity) और रोचकता intresting  पैदा करती है। यानी कि लघुकथा की अंतिम पंक्तियों में उस जिज्ञासा या रोचकता का खुलासा होना चाहिए, किस कारण से पाठक उस लघुकथा को पढ़ने के लिए अंत तक की आपकी पंक्तियों को पढ़ना चाहता हैं यानी जानना चाहता है कि इस लघु कथा का अंत क्या होगा। 
 
लघु कथा में, लघु कथा के अंत में कुछ ऐसी सवाल वाली बात होनी चाहिए  जोकि पाठक को सोचने पर मजबूर कर दे।
 वह फिर एक नई कहानी के उधेड़ बुन में और जिज्ञासा में डूब जाए, यह एक अच्छे लघु-कथा की पहचान है। 
यह लघु-कथा के लेखन में पाठकों को आकर्षित करने वाली सबसे बड़ी कड़ी मानी जाती है।
 

Laghu Katha ke udharan hindi

 
उदाहरण
 
एक लघु कथा पढ़िए और लिखने का प्रयास कीजिये 
 
संघर्ष का सौंदर्य
 
मिट्टी ने मटके से पूछा, “मैं भी मिट्टी, तू भी मिट्टी, परंतु पानी मुझे बहा ले जाता है और तुम पानी को अपने में समा लेते हो। वह तुम्हें गला भी नहीं पाता, ऐसा क्यों?”
मटका हँसकर बोला, “यह सच है कि तू भी मिट्टी है और मैं भी मिट्टी हूँ. पर मेरा संघर्ष अलग है। पहले मैं पानी में भीगा, पैरों से गूँथा गया, फिर चाक पर चला कुम्हार के। थापी की चोट, आग की तपन को झेला। संघर्ष झेलकर पानी को अपने में रखने की ताकत मैंने पाई।”
 
 
मंदिर की सीढ़ियों पर जड़े पत्थर ने मूर्ति के पत्थर से पूछा, “भाई! तू भी पत्थर मैं भी पत्थर, पर लोग तुम्हारी पूजा करते हैं और मुझे पैरों से रौंदकर, बिना ध्यान दिए चलते हैं। ऐसा क्यों?
 
मूर्ति के पत्थर ने उत्तर दिया,  “क्या! तू मेरे संघर्ष को जानता है? मैंने इस शरीर पर कितनी छैनियों के प्रहार सहे हैं, मुझे कई बार घिसा गया है, मार और संघर्ष की पीड़ा को सहकर ही मैं इस रूप में आया हूँ। संघर्षों की भट्टी में तपकर ही ‘जीवन’ स्वर्ण बनता है।
 
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‘संघर्ष का सौंदर्य’ लघु कथा के माध्यम से
 निम्नलिखित बातें आप लघु कथा लेखन के लिए सीख सकते हैं-
 
1. इस लघु कथा में मिट्टी के मटका बनने 
और पत्थर के मूर्ति के संघर्ष को बताया है।
संघर्ष के महत्व को बतलाया गया है।
 
2. यह एक शिक्षाप्रद लघु कथा है।
इस लघुकथा में तुलना करके बात को रोचकता से कही गई है।
 
3. पात्र के अनुकूल संवाद है।
 
4. अंत में जिज्ञासा यानी कौतूहल शांत होती है
 जो पाठकों में शुरू से बनी रहती है।
 
 
5.यह लघुकथा के श्रेणी में आती है और नैतिक शिक्षा 
देने वाली यह लघुकथा है।
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आधार बिंदु के आधार पर लघु कथा लिखिए निम्नलिखित आधार बिंदु के आधार पर लघु कथा लिखिए
 
लघु कथा लिखने का उदाहरण यहां पर दिया जा रहा है। इन उदाहरण को पढ़कर आप भी लघुकथा लिखना सीख सकते हैं।   यह लघुकथा आपकी परीक्षा के लिए उपयोगी भी हैं। यहां 4 लघु कथा Laghu Katha दिए गए हैं। 
 
 

लघु कथा  ‘मकान और घर’  Laghu Katha Makan aur ghar

 
10 साल के बाद आज एक करोड़ का मकान उनकी सारी उपलब्धियाँ बता रही थीं। जैसे कल की ही बात हो शहर में संघर्ष और रोजी – रोटी के संकट से खेलते हुए आखिरकार खुद को राकेश बाबू ने प्रतिष्ठित बना लिया था। कानून  की  पेचीदगी हर कोई नहीं जान पाता और न सीख पाता लेकिन इधर उन्होंने यह भी सीख लिया था। अपने वकालत के प्रोफेशन में वे अव्वल हो चुके थे। वह समझदार हो चुके थे, अब उससे खेलना जान चुके थे। दर्जनों मकान के मालिक होने के बावजूद आज भी वे घर की तलाश में थे। 
 
(अभिषेक कांत पांडेय)
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‘बूढ़ा बाप’ लघु कथा  Laghu Katha

 
  अपने जीवन की सारी पूँजी लगाकर अपने बेटे को पढ़ा-लिखाकर इस काबिल बना दिया कि वह विदेश में एक अच्छी-सी नौकरी कर रहा है।   यह बात बताते-बताते गिरधारी के आँखों में पानी भर आया। तभी कांताबाई ने दो कप चाय  नए पड़ोसी अभिषेक के सामने रखी। गिरधारी अकेले ही उस मकान में रहते थे और कांताबाई उनके लिए खाना बनाती थी। नए पड़ोसी अभिषेक पिछले महीने ही उस कॉलोनी में रहने आए थे, आज वे अपने पड़ोसी गिरधारी के घर शिष्टाचार मुलाकात कर रहे थे। गिरधारी की आँखों में आए हुए पानी का मतलब समझ चुके थे, बेटा विदेश में कमा रहा है और पिता की खबर अभी तक नहीं ली। गिरधारी से यह पूछने की हिम्मत नहीं थी। लेकिन गिरधारी की बनावटी मुस्कान  के पीछे एक बूढ़े लाचार बाप का चेहरा अभिषेक को दिखाई दे रहा था। Laghu Katha by Abhishek kant pandey
 
 
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नया करियर  लघु कथा (अभिषेक कांत पांडेय)

 
विक्रम पढ़ाई के साथ  फेसबुक पर भी सक्रिय था। कमेंट, लाइक और शेयर करने में उसे बहुत ही मजा आता था। हर दिन नये कपड़ों में फोटो लगाना, कहीं जाना तो  वहाँ की फोटो खींचकर तुरंत फेसबुक में चस्पा कर देना उसकी आदत में शुमार था। अपने दोस्तों में सबसे एक्टिव पर्सन था। दुनियाभर की नए तरीके की जानकारियाँं उसके पास होती थीं। किताब- मोबाइल-फेसबुक, टि्वटर, इंस्टाग्राम, यूट्यूब सभी की अपने कॉलेज लाइफ के दौरान सोशल मीडिया के हर प्लेटफार्म की हर बारीकियों को समझ चुका था, एक डॉक्टर इंजीनियर जैसे प्रोफेशनल की तरह।
 
 फेसबुक मैनेजर, सोशल मीडिया मैनेजर  जैसी बड़ी कंपनियों में नौकरी उसको बहुत ही आकर्षित करती। उसने अपने कैरियर की  शुरुआत बहुत पहले से कर दी थी,  बस अपना ग्रेजुएशन उसे पूरा करना था। कोडिंग,  कंप्यूटर,  कम्युनिकेशन स्किल तो उसने नई शिक्षा नीति के अंतर्गत मिडिल क्लास में ही सीख लिया था। विदेशी और स्वदेशी भाषा का ज्ञान उसे बखूबी था,  वह हमेशा अपने सोशल मीडिया अकाउंट से इन भाषाओं से ही लोग से बातचीत करता था। नए डिजिटल जमाने में विक्रम की सोच भी नयी थी, उसका करियर यही सब कुछ था लेकिन कोई समझ नहीं सकता था। विदेशी कंपनी में सोशल मीडिया मैनेजर की एक बड़ा पैकेज उसके लिए ऑफर हुआ केवल फेसबुक के उसके पोस्ट को देखकर। 18 साल की उम्र में यह कामयाबी किसी अखबारों के पेज का हिस्सा नहीं बन सकती थी क्योंकि अभी भी करियर को लेकर लोग की सोच  पारंपरिक थी। laghu katha
 
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लघु कथा ‘यदि मैं समाचार पत्र होता’ 

 
new updated: शिक्षक ने बताया कि मीडिया बहुत प्रभावशाली होता है, देश और समाज को तरक्की के रास्ते पर ले जाने की भूमिका समाचार पत्र  निभाता रहा है।  12वीं  की हिंदी की कक्षा में समाचार पत्र और उसकी भूमिका पाठ पढ़ाया जा रहा था। पढ़ते-पढ़ते अंश सोच में पड़ गया। सन 2022  के इस युग में  समाचार पत्रों  के महत्व को वह भी बहुत जानता था। तभी शिक्षक अभिषेक ने पूछ लिया कि बताओ अंश अगर तुम समाचार पत्र होते तो क्या करते? अंश ने कहा कि यदि  मैं समाचार पत्र होता तो खबरें सच्चाई वाला छापता। लोग को जागरूक करता। लोग के जीवन को सुधारने वाली खबरों को महत्व देता। देश की आम जनता के सरोकार वाली खबरें मैं  बताता और किसी से नहीं डरता।  अंश की बात  सुनकर शिक्षक ने कहा कि तुम्हारी बात बहुत सही है अगर मीडिया और समाज दोनों अपने उत्तरदायित्व को अच्छे से निभाए तो देश में गरीबी, भ्रष्टाचार और अशिक्षा का नामो निशान नहीं रहेगा। laghu katha (अभिषेक कांत पांडेय)
 
 
 

लघु-कथा लेखन Laghu Katha example in Hindi 

अभ्यास
कक्षा -‘9’ के पाठ्यक्रम में लघुकथा लेखन के अंतर्गत 5 अंकों का लघुकथा लिखने का प्रश्न पूछा जाएगा।
लघुकथा लेखन के लिए प्रश्न की प्रकृति इस तरह से हो सकती है-
 
निम्नलिखित प्रस्थान बिंदु के आधार पर 100 से 120 शब्दों में शीर्षक सहित एक लघु कथा लिखिए-
 
 
एक बूढ़ा किसान था। उसके चारों पुत्र आपस में झगड़ा करते थे। किसान बहुत दुखी था। उसने एक दिन अपने चारों पुत्रों को बुलाया, दुखी मन से कहा, ” आपस में झगड़ा करना नहीं करना चाहिए और तुम लोगों को मिल जुल कर रहना चाहिए।” पिताजी की बातें सुनकर चारों पुत्र वहाँ से चले गएँ। पर लड़ाई-झगड़े का सिलसिला जारी रहा, फिर एक दिन उस बूढ़े किसान ने एक उपाय सोचा…
 
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मेहनत का फल लघु कथा सीबीएसई बोर्ड क्लास नाइंथ पैटर्न
 
 
मोहन का पढ़ाई में मन नहीं लगता था।   वह दिन भर यहाँ-वहाँ घूमता रहता था। घर के सभी लोग उसकी पढ़ाई न करने की आदत से परेशान थे। पिताजी उसे समझा- समझा कर थक गए थे। माता जी भी उसे समझाती लेकर उसके पल्ले कुछ नहीं पड़ता। विद्यालय के शिक्षक भी उसे समझा-समझा कर हार चुके थे। वह स्कूल का कोई काम नहीं करता था और शाम को खेलने के बहाने देर शाम तक इधर-उधर घूमता रहता था। हाई स्कूल टर्म 1 की परीक्षा का रिजल्ट जब स्कूल में पता चला तो उसके होश उड़ गए। सभी विषयों में बहुत ही खराब नंबर था। शिक्षकों ने उसे बहुत समझाया कि अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है, पढ़ाई मन लगाकर करोगे तो टर्म 2 की परीक्षा में अच्छे अंक पाकर हाईस्कूल की परीक्षा पास हो जाओगे।  मोहन इन सब बातों को सुनकर बहुत उदास हो गया। उसके दोस्त सक्षम के अंक भी बहुत कम आए थे।  High School CBSE board term 2 2022 की परीक्षा  अप्रैल में होने वाली थी और कुछ ही दिन बचे थे तैयारी के लिए। मोहन और सक्षम ने एक दूसरे से वादा किया कि वह इस बार Term 2  की परीक्षा में बेहतर नंबर लाकर इस परीक्षा को पास करेंगे।  अगले दिन से दोनों दिल लगाकर पढ़ने लगे। उनकी मेहनत देखकर टीचर और घर के लोग भी आश्चर्यचकित थे। बोर्ड एग्जाम होने के बाद जब सीबीएसई (cbse)  बोर्ड (term 2) का रिजल्ट आया तो किसी को यकीन नहीं था, सक्षम और मोहन प्रथम श्रेणी में परीक्षा पास कर लिया था। सक्षम और मोहन के पास होने की खबर पूरे स्कूल और उनके मोहल्ले में पहुंच गई थी और सभी उनकी तारीफ कर रहे थे। 
नए बैच के हाई स्कूल  के छात्रों को हिंदी के टीचर ने ‘सक्षम और मोहन’ की लघु कहानी (Laghu Katha) सुनाई तो उनके अंदर भी पढ़ने की ललक जाग उठी। कक्षा के दौरान इस कहानी को सुनने के बाद ललित ने कहा मास्टर साहब मोहन और सक्षम को मेहनत का फल मिला गया।
 
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लघुकथा new Laghu Katha copy right
 अभिषेक कांत पांडेय
झूठ बोलने वाला लड़का

 
एक लड़का था। वह 10 साल का था। वह हर रोज अपने टीचर से झूठ बोलता था। मैम आज मैं कॉपी भूल गया….सर मैं किताब नहीं लाया। वह झूठ बोलता और होमवर्क न करने का बहाना बनाता था।
उसके झूठ बोलने की आदत से उसके मम्मी-पापा और टीचर परेशान थे। उसे बहुत समझाया गया कि झूठ मत बोलो, अपना काम सही समय पर करो, लेकिन वह किसी की बात नहीं मानता था। वह झूठ बोलता और पढ़ाई में पिछड़ता चला गया। 
एक दिन वह बीमार पड़ गया। उसके पेट में जोर जोर से दर्द होने लगा। वह इलाज कराने अपने मम्मी-पापा के साथ अस्पताल गया। डॉक्टर ने उससे पूछा कल तुमने क्या खाया था। 
 उसको तो झूठ बोलने की आदत थी। उसने डॉक्टर से बोल दिया कि केवल सादा खाना खाया था। जबकि उसने ढेर सारा चाऊमीन, बर्गर, पिज्जा चोरी चुपके खाया था। ‌ जैसे वह टीचर से झूठ बोलता था, वैसे ही डॉक्टर से भी झूठ बोल दिया। इस वजह से एक हफ्ते तक  डॉक्टर सही से इलाज नहीं कर पाया और महीनों वह बीमार रहा।
इसलिए कहते हैं कि झूठ किसी से नहीं बोलना चाहिए। 
 
New update for 2022-23 
Class 9 Hindi A CBSE BOARD PATTERN
 
Hindi class 9th cbse boarad laghu katha
 
लेखन 20 अंक
 
अनुच्छेद लेखन 5 अंक
 
पत्र लेखन 5 अंक
 
संवाद लेखन 5 अंक
 
लघुकथा लेखन 5 अंक
 

वीडियो के द्वारा सीबीएसई बोर्ड कक्षा 9 की हिंदी  के पाठ्यक्रम में पूछे जाने वाले लघुकथा लेखन के  बारे में जानना चाहते हैं तो यहां पर क्लिक करें

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सीबीएसई बोर्ड कक्षा 10 बहुविकल्पी प्रश्न हिंदी निराला जी की कविता पर आधारित

 
 

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