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Laghu Katha Lekhan CBSE Board

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   लघु कथा कैसे लिखें, उदाहरण से समझें CBSE board hindi 

प्रस्थान बिंदु के आधार पर लघु कथा (laghu katha)  लिखना। CBSE Board 9th class Laghu Katha lekhan दसवीं बोर्ड की कक्षा 9 के सिलेबस में और कई  बोर्ड की परीक्षा में इस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं।  (new syllabus 2022 Laghu Katha lekhan)

  दिए गए प्रस्थान बिंदु (prasthan Bindu) का मतलब है कि दो या चार लाइन लघुकथा के दिए होते हैं। उसके बाद आपको 80 से 100 शब्दों में लघुकथा को पूरा करना होता है। उसका एक शीर्षक (title) लिखना होता है। 

नई शिक्षा नीति 2020 (New Education Policy) में भाषा में रचनात्मक लेखन (Creative Writing) को बढ़ावा दिया गया है। इसलिए  हिंदी Hindi, अंग्रेजी, मराठी  उर्दू किसी भी भाषा के पेपर में संवाद लेखन, लघुकथा, लेखन अनुच्छेद, (anuchchhed lekhan) लेखन, विज्ञापन लेखन, (Vigyapan lekhan) सूचना लेखन (Hindi mein Suchna lekhan) जैसे टॉपिक में नई शिक्षा नीति के ( new education policy 2021) अंतर्गत सिलेबस में रखे गए हैं। 

लघुकथा लेखन 9 व 10 की परीक्षा में पूछा जाता है Laghu katha lekhan in Hindi in board examination

आप हाईस्कूल और इंटर में किसी भी बोर्ड (CBSE board) में पढ़ाई कर रहे हैं तो   संबंधित सिलेबस को ध्यानपूर्वक पढ़ें। लेखन से संबंधित किसी तरह की समस्या हो तो कमेंट बॉक्स में लिखकर, मुझसे प्रश्न पूछ सकते हैं, सारी समस्याओं का समाधान आपको जल्दी दूँगा। 

 एक लघुकथा लिखने के लिए दे रहे लेकिन उसका उत्तर भी मैंने दिया है ताकि आपको पता चल सके प्रस्थान बिंदु पर किस तरह से सोचकर   लिखा जाता है। लेकिन उससे पहले महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा करेंगे,  एक लघुकथा लिखने से पहले आपकी सोच क्या होनी चाहिए।

 दिए गए प्रस्थान बिंदु से लघुकथा लिखने के लिए प्रस्थान बिंदु को ध्यानपूर्वक पढ़ें और चिंतन मनन (thinking) करें।

 लघु कथा (short-story) एक छोटी कहानी ही होती है लेकिन आपको इसे कम शब्दों में लिखना होता है। और कहानी की तरह इसका अंत भी एक सार्थक (meaningful) तरीके से होना चाहिए यानी सही तरीके से होना चाहिए। New Gyang 

 लघुकथा लिखते (Laghu Katha writing in Hindi) समय किसी करैक्टर के संघर्ष (struggle of character) या कोई प्रशंसा वाले काम  को दिखा सकते हैं। जैसे वह किस तरह से करता है। सबके सामने एक मिसाल यानी उदाहरण रखता है। कुछ न कुछ बदलाव लाता है। या जिंदगी के किसी एक  पहलू में मानवीय (humanity) गुणों को जैसे- भलाई करना, ईमानदारी करना, दया करना, मदद करना  इत्यादि बातों को भी लघु कहानी में लिख सकते हैं। 

इस तरह की सकारात्मक लघुकथा भी आप लिख सकते हैं क्योंकि परीक्षा में इसी तरह की लघुकथा लिखनी चाहिए।

सीबीएससी बोर्ड कक्षा 9 संवाद लेखन उदाहरण सहित


 लघुकथा लेखन कैसे लिखें? Laghu Katha Lekhan what is the laghu Katha Lekahan 


लघु कथा (Laghu Katha lekhan in Hindi) लेखन किसे कहते हैं? लघुकथा लेखन के तत्व कितने हैं? लघुकथा की परिभाषा क्या होती है? लघुकथा कैसे लिखें? NCERT solutions class 9 में लघु कथा (Short Hindi Story Writing) में प्रस्थान बिंदु के आधार पर लघु कथा कैसे लिखा जाता है?  किसी लघुकथा को पूरा कैसे करें?  इन सभी प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए आप इस Laghu Kantha  पर education content पूरा जरूर पढ़ें। 


लघु कथा क्या है? what is the meaning of Laghu katha


Laghu katha कोई छोटी कहानी नहीं होती है, यह किसी कहानी का संक्षिप्त (short form) रूप नहीं होता है। लघुकथा कहानी का सार भी नहीं होता है। यह हिंदी साहित्य की एक स्वतंत्र विधा (free style of writing in Hindi literature) है। आज भागदौड़ की जिंदगी में इंसान के पास समय कम है, वह कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक की सोचना, समझना और जानना चाहता है इसलिए आधुनिक युग में लघुकथा का विकास कथा ( story) से ही हुआ है।

जीवन के एक छोटे (The part of life story) से हिस्से का अनुभव लघुकथा हो सकती है।


लघु कथा किसे कहते हैं?


जैसे लेखक अपने अनुभव के साथ पाठकों को जोड़ता है  और कम शब्दों में अपनी बात कहता है तो एक नई विधा का जन्म होता है, जो अपनी पात्र (character) और कथ्य (story plot) के साथ प्रस्तुत होता है यानी कि एक कथा जो छोटी होती लेकिन प्रभावशाली होती है, उसे लघुकथा कहते हैं।



लघुकथा कैसे लिखें? (how to write short story in Hindi)


अब आपको अपने आपसे प्रश्न करना है कि मुझे लघुकथा लिखने के लिए क्या-क्या जानकारी हासिल करनी है तो आपको यह लेख पूरा पढ़ना चाहिए। यहां पर हर एक एक पॉइंट लघु कथा (short story of writing) के बारे में बताया जा रहा है।


लघु कथा में कैरेक्टर character of Laghu Katha


लघु कथा में पात्र (character of Laghu Katha) भी होते है, कथानक भी होते हैं, द्वंद (contraduction ) भी होता है और समाधान (the story solution) भी होता है , तो आपको मैं बताता हूं कि लघु कथा में जो पात्र होते हैं (करैक्टर Laghu katha ) वह कितने हो सकते हैं, (how many character in any Laghu Katha) तो यहां पर जितने कम से कम करैक्टर होंगे लघुकथा उतने ही प्रभावशाली होगी। 


कथा कैसे लिखे उदाहरण से समझे


Laghu Katha Lekhan: लघुकथा कथा जिंदगी का कोई हिस्सा या कोई सूचना जिसे हम कथा के आधार पर विकसित (develop) कर सकते हैं। जैसे एक उदाहरण से समझिए –

लघु कथा लिखने का तरीका


एक किसान है, उसके चार बेटे आलसी हैं, किसान के पास समस्या है। अपने आलसी बेटे को खेत में काम कराने के लिए वह जान परेशान है उन्हें मेहनत कर सबक सिखाना चाहता है, तब अपने बेटों से कहता है कि  मैंने अपने जीवन की जमा-पूंजी इस खेत में गाड़ दिया है, तुम लोग जाकर खेत खोदकर गड़ा हुआ धन निकाल लो।  किसान के निठल्ले बेटे खेत को  खोदते हैं लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिलता है।  चारों बेटे पिताजी के पास आते हैं तो पिताजी उनसे कहते हैं कि तुमने इतना मेहनत कर ही दिया है तो इसमें बीज  बो दो और फसल के उगने के बाद तुम्हें मेहनत का फल धन के रूप में मिलेगा। इस तरह  से जीवन के उघेड़बुन, समस्या का समाधान नैतिक शिक्षा भी लघुकथा होती है। 


the experience of the life लघु कथा लेखन में जिंदगी अनुभव

Laghu Katha Lekhan: लघुकथा कथा जिंदगी का कोई हिस्सा या कोई सूचना जिसे हम कथा के आधार पर डेवलप कर सकते हैं. जैसे एक उदाहरण से समझिए कि  एक किसान है, उसके चार बेटे आलसी हैं, किसान के पास समस्या है। अपने आलसी बेटे को खेत में काम कराने के लिए वह जान परेशान है उन्हें मेहनत कर सबक सिखाना चाहता है, तब अपने बेटों से कहता है कि  मैंने अपने जीवन की जमा-पूंजी इस खेत में गाड़ दिया है, तुम लोग जाकर खेत खोदकर गड़ा हुआ धन निकाल लो।  किसान के निठल्ले बेटे खेत को  खोदते हैं लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिलता है।  चारों बेटे पिताजी के पास आते हैं तो पिताजी उनसे कहते हैं कि तुमने इतना मेहनत कर ही दिया है तो इसमें बीज  बो दो और फसल के उगने के बाद तुम्हें मेहनत का फल धन के रूप में मिलेगा। इस तरह  से जीवन के उघेड़बुन, समस्या का समाधान नैतिक शिक्षा भी लघुकथा होती है। 



new update लघुकथा Laghu Katha दूसरे उदाहरण से समझे

जैसे मान लीजिए कि स्वच्छता अभियान को लेकर कोई प्रस्थान बिंदु (Prasthan Bindu) है और उसमें एक करैक्टर राजीव है, जो अपने घर के सामने ढेर सारी गंदगी से परेशान हैं। लोग ने पार्क को कूड़े के ढेर में बदल दिया है। वह अपने मोहल्ले के सभी  व्यक्तियों को समझाता है कि इस तरह से गंदगी नही फैलानी चाहिए लेकिन कोई उसकी बात नहीं सुनता है।

दिन  राजीव खुद ही सफाई करने के लिए  पार्क में चला जाता है। मोहल्ले के बच्चे जब राजीव को पार्क में सफाई करते हुए देखते हैं तो वह लोग भी वहां सफाई करने के लिए इकट्ठा हो जाते हैं। उन बच्चों को भी अपना कर्तव्य और दायित्व समझ में आता है। (the live example of Laghu Katha)

इस तरह देखी-देखा बड़े लोग भी पार्क में राजीव के साथ सफाई करने लगते हैं।  सभी लोगों का इस तरह का प्रयास पूरे मोहल्ले को साफ सुथरा बना देता है और इस प्रयास की खबर अखबारों में छपती है और राजू को एक अच्छा इंसान और सिटीजन होने के कारण उसे उस शहर के मेयर पुरस्कार भी देते हैं। ( how to think about Laghu Katha when you writing)


लघु कथा में कहानी का प्लॉट कैसे डेवलप करें Laghu Katha content writing plot


 इस तरह से ये कहानी का प्लॉट हो गया। आप इस पर लघु कथा आसानी से लिख सकते हैं। सबसे कम शब्दों में लिखने का प्रयास करिए।

जब आप लिखते हैं तो शब्द बहुत बड़े और आनावश्यक (फालतू) शब्द आ जाते हैं। जो भाषा के संप्रेषण (communication) में दिक्कतें करती हैं तो इसलिए आप इनको सुधार सकते हैं। 


बार-बार लिखने का प्रयास लघु कथा में जरूरी


 बार-बार लिखने के प्रयास से ही आप लघुकथा लिखना सीख जाते हैं। आपके अंदर के जो विचार हैं व सटीक लघुकथा में आप लिख पाते हैं। साथ में करैक्टर को भी आप उसी के अनुरूप ढाल लेते हैं। आपके मन में जो संदेश है, जिसे आप लघुकथा के माध्यम से देना चाहते हैं, वह भी आप लघु कथा में दे पाते हैं इसलिए लघुकथा काफी बेहतरीन आपक लिख सकते है।

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लघुकथा Laghu Katha में इन बातों को भी कहानी की तरह लिख सकते हैं।


बस सोचने का तरीका आपका होना चाहिए। इसमें डायलॉग भी आएंगे यानी इस तरह से डायलॉग करैक्टर बोल रहा है। उसे भी आपको लिखना होगा और मेन करेक्टर लघु कथा में ही होता है बाकी करैक्टर कम होते हैं। ज्यादा डायलॉग की जरूरत नहीं होती है। 

 यह कुछ तरीका जो है, आपको मैंने बताया है। आप जरूर ध्यान रखिएगा।

   

. निम्नलिखित प्रस्थान बिंदु के आधार 80 से 100 शब्दों  में एक लघुकथा लिखिए और उसका शीर्षक भी लिखिए।


लघु कथा लेखन पर वीडियो क्लास देखने के लिए क्लिक करें

   

 अब आपको  इस लघुकथा को पूरा करना है। इसके लिए आप प्रस्थान बिंदु यानी (जो दिया हुआ है) उसके आधार पर एक लघुकथा लिखेंगे।  prasthan Bindu


 लघु कथा लिखने के और उदाहरण Laghu Katha likhane ke udaharan the example of Laghu Katha 

लघुकथा को पूरा करके मेरे दिए गए लघुकथा से मिलाइए और देखिए क्या अंतर आता है। तो उसमें कौन सा सुधार हो सकता है? आपके पास कोई प्रश्न हो  तो वेबसाइट के कमेंट बॉक्स में जरूर पूछिए। 

अगर इस आर्टिकल को आप पढ़ रहे हैं और छात्र हैं। आपकी परीक्षा के लिए लघुकथा लिखना भी जरूरी है तो आपको अभ्यास करना चाहिए। (practice of Laghu Katha asking CBSE examination class 9th and 10th also)

 जो लोग लघुकथा लिखना चाहते हैं। हिंदी भाषा में या किसी और भाषा में। उनके लिए यह आर्टिकल काम का है इसलिए आप भी मेरे बताए गए तरीके का अनुसरण कीजिए यानी फॉलो कीजिए।

  प्रस्थान बिंदु के आधार पर  पूरी लघुकथा यहां पर लिखी है, अपनी लिखी गई लघुकथा से मिलाए- write the short story

 राजू स्कूल से आ रहा था तो रास्ते में उसे एक बटुआ पड़ा मिला। उस बटुए को खोला तो उसमें ₹4000 और एक दवा का पर्चा था। ….


 रचना के आधार पर वाक्य trick

 राजीव को सोचते देर नहीं लगी।  अगले चौराहे पर कई  दवाओं की दुकानें थीं।  राजू भागकर वहाँ गया और दुकानदारों से पूछा कि  क्या कोई यहाँ पर दवा खरीदने आया था जिसके  पैसे  गिर गए हो और दवा नहीं खरीद  पाया हो। कई दुकानदारों से पूछने पर एक दुकानदार ने कहा, “एक लड़का आया था, उसने दवा के पैसे देने लिए जेब में हाथ डाला तो उसका बटुआ नहीं था।” 

 इतना सुनते ही राजीव ने कहा कि वह लड़का कौन है?  दुकानदार ने कहा कि मुझे नहीं मालूम। लेकिन पैसा लेने वह गया है,  दवा लेने के लिए जरूर वापस आएगा। राजू ने दुकानदार को सारी बात बता दी। कुछ देर बाद वह लड़का उस दुकान पर आया और एक नया पर्चा थमाते हुए कहा कि यह दवाई मुझे चाहिए।  दुकानदार ने बताया कि तुम्हारा बटुआ खोया था, वह मिल गया है। तो उस लड़के ने कहा, कैसे? तब राजू ने उसे बटुआ दे दिया। उसमें रखे पैसे उसने देखें तो वह खुश हो गया।  उसने राजू को बहुत-बहुत धन्यवाद दिया। दुकानदार ने भी राजू की ईमानदारी की तारीफ की। 

उस लड़के ने बताया कि उसके पिताजी बीमार हैं। उसने  ₹4000 इकट्ठा किया था। उसी पैसे से दवा लेने जा रहा था लेकिन रास्ते में पैसा गिर गया। इसके बाद वह  दवा लेने के लिए पैसे अपने मित्र से उधार  लेकर आया था।  उसने राजू की ईमानदारी की तारीफ की और कहा कि तुम एक अच्छे  बच्चे हो।  राजू बहुत खुश हुआ और फिर  खुशी से झूमता हुआ अपने घर की ओर चला गया।

इस लघुकथा का शीर्षक-  ईमानदारी।    Laghu Katha lekhan

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Laghu Katha

अब अभ्यास के लिए कुछ प्रश्न

 the question for the practice in Laghu Katha Hindi the syllabus for 9th and 10th class of all board


निम्नलिखित प्रस्थान बिंदु के आधार सौ से डेढ़ सौ शब्दों  में एक लघुकथा लिखिए और उसका शीर्षक भी लिखिए।



सूरज जैसे ही ढला वह अपने सामान बटोरने लगा। थैले में वापस छोटे-छोटे खिलौने उसके छोटे छोटे हाथों ने रखा। कुछ रेजगारी और नोट को गिनने के बाद आज वह बहुत खुश था।…. complete Laghu katha in Hindi

comment box का उत्तर लिखकर बताइए आपको यह आलेख कैसा लगा।


बिरजू बहुत ही गरीब बालक था। उसकी बूढ़ी मां के साथ रहती थी। बिरजू के पिता को गुजरे बरसों हो चुके थे। आसपास के मेले की दुकान में वह खिलौने बेचा करता था। आसपास के घरों में बर्तन पूछा करती थी और इसी से उसका गुजारा चलता था। बिरजू मेले में खिलौने बेचकर बड़ा खुश था। आज उसे बहुत ज्यादा पैसे मिले थे अब वह अपनी मनपसंद दुकान में कचौड़ी जलेबी खा सकता था। उसका सपना था कि वह अपने मां के लिए एक बढ़िया साड़ी खरीदे तो वह आज दुकान पर गया और साड़ी खरीदी। ‌ खुशी खुशी जब वह घर लौट रहा था। उसकी मां कब से आस लगाई थी।‌‌बिरजू ने चिल्लाते हुए कहा मां, मां मैं आ गया हूं जल्दी से खाना लगा दो, बहुत तेजभूख लगी है।‌‌मां ने उसके लिए खाना लगा दिया और वह खाना खाया फिर अपनी मां के पास गया और उसने वहां साड़ी दी उसकी मां बहुत खुश हुई आज अपनी मजबूरी पर भले ही उसकी मां दुखी हो रही थी लेकिन उसके बच्चे ने अपनी मां का ख्याल रखा इस बात से उसकी आंखों में आंसू आ गए।

एक लोभी इंसान था उस पर एक नैतिक शिक्षा वाली कहानी लिखिए

लघु कथा Laghu Katha update new Lodhi Insan chalak Insan
लोभी इंसान का हृदय परिवर्तन chalak Insan ka hriday Parivartan lobhi Insan ka hriday Parivartan
लोभी इंसान। लोभ के कारण उसने अपनी तकदीर बदल ली थी। ‌ हर जगह उसकी चालाकी ने उसे इंसान से शैतान बना दिया था।  रोज दूध में पानी मिला था और ढेरों पैसा कमाता था। इस लोभ के कारण उसका स्वभाव भी बदल गया था। उसके पूरे शरीर और चेहरे से लोभ प्रकट होता था। जैसा वह दूसरों के साथ करता था वैसा ही लोग उसके साथ लोग करते थे। ‌ धीरे-धीरे वह खराब खाने और प्रदूषण के कारण बीमार पड़ गया। ‌ एक अस्पताल में भर्ती हुआ तो वहां भी एक लोभी डॉक्टर मिला। डॉक्टर ने उसका इलाज किया और ढेर सारे पैसे उससे कमाए। लोभी इंसान को समझ में आ गया कि जैसा करते हैं वैसा भरते हैं। ‌ लोभी इंसान ठीक तो हो गया था लेकिन उसके ढेर सारे पैसे, समय और उसका शरीर लगभग खत्म हो चुका था। ‌ क्योंकि जिस तरह से वह दूध में पानी मिला था।  उसी तरह उसके साथ लोगों ने भी बेईमानी किया था। लोभी इंसान के साथ स्कूल वाले ने, बैंक वाले ने, राशन की दुकान वाले ने, अस्पताल वाले ने, शिक्षा वाले ने, वकील वाले ने, सब ने उसके साथ लोभ किया।
लोभी इंसान टूट चुका था। अब वह सुधरना चाहता था। तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उसके नस-नस में चलाकी, बेईमानी, धूर्तता सब कुछ घुस गया था। लोभी इंसान अकेला था। ‌ 
लोभी इंसान के पास ढेर सारे पैसे थे इसलिए जो भी उसके साथ था, वे सब उसके पैसे के लोभ में उसकी जी हजूरी करते थे।  लोभी इंसान यह सब जानता था और मन ही मन रोता था। एक दिन उस लोभी इंसान ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया, अपना सारा धन-दौलत अनाथालय को दान दे दिया और उसके बाद वह सुख चैन से जीने लगा। क्योंकि चलाकर धूर्तता बेईमानी से उसके कमाए गए पैसे अब सही जगह पर लग गया था। ‌ अब धीरे-धीरे उस लोभी इंसान को मोक्ष मिलने लगा था।
कहानी से मिलने वाली शिक्षा-
इंसान को कभी भी चला कि बेईमानी दुर्दशा और लोग का सहारा लेकर जीवन नहीं जीना चाहिए। नहीं तो आने वाले समय में उसी के साथ वैसा ही व्यवहार दूसरे लोग करते हैं। लोभ करने वाला इंसान अपने अपने परिवार और समाज तीनों को मुसीबत में डाल देता है।



सीबीएससी बोर्ड विज्ञापन लेखन क्लास 10th

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Above laghu katha copy right new gyan

Academic article by Abhishek Kant Pandey


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