CBSE Board Class 10 Education Hindi MCQ

Project work se bacho ko kaise padhaye प्रोजेक्ट वर्क से बच्चों को कैसे पढ़ाएं?

 

Education Project work keyon jaroori

How Project work study?

बच्चों के लिए प्रोजेक्ट वर्क और क्रिएटिविटी पढ़ाई में क्यों है जरूरी: 


आज सामाजिक विज्ञान, विज्ञान, गणित जैसे विषयों के साथ ही भाषा के विषयों जैसे हिन्दी व अंग्रेजी में प्रोजेक्ट जरूरी है। (project work) कई अभिभावक (parents) प्रोजेक्ट वर्क को पढ़ाई नहीं समझते हैं। प्रोजेक्ट वर्क से ही बच्चा उस टॉपिक (topuc)को बेहतर तरीके सीखता है।

बच्चा किताबी ज्ञान (bookish knowledge)को व्यवहारिक  ज्ञान से जोड़ सकने की काबलियत विकसित कर सकेंगे।

क्यों जरूरी है प्रोजेक्ट वर्क
Why project work is important

 

शुरुआती दौर में बच्चे अपने आसपास से बहुत तेजी से सीखते हैं। वे स्कूल में पहुंचते हैं तो उन्हें किताबी ज्ञान एक तरह से बोझ लगने लगता है। नर्सरी  के बच्चे को लिखने से अधिक पढ़ना अच्छा लगता हैै। 

ऐसे बच्चे अभी पढ़ना सीख रहे होते हैं, ऐसे में चित्रों, पहेली, ड्राइंग के माध्यम से सीखने के लिए उनके अंदर ललक पैदा की जाती है। ‘अ’ से अनार बताने से अच्छा है कि ‘अ’ से अनार की मिट्टी या प्लास्टिक के बने खिलौने के नमूनों से बताया जाए।

अनार  के खिलौने के साथ ही सचमुच का अनार बच्चों को दिखाया जाए।  फिर उस अनार को काटकर  साफ करके एक दूसरे को खिलाया जाए जिससे कि  साझा (sharing) करने की आदतों का विकास होता है। पढ़ाते समय से कुछ फलों एक्टिविटी कर सकते हैं, यह बहुत सस्ता  और पढ़ाई में प्रभावशाली है।

इसके साथ ही अनार की आकृति ड्राइंग पेपर पर बनाना,  छूकर बताना, उसके रंगों और बीज पर बातचीत करना, ये कहना कि ‘अ’ से अनार किसने- किसने खाया है, इसका स्वाद कैसा होता है? ये पढ़ाई एक तरह से एक्टिविटी वर्क है। (project work activities)

इस तरह बच्चों का मन पढ़ाई में लगता है। महान शिक्षा के जानकार किलपैट्रिक ने प्रोजेक्ट से पढ़ाने का तरीका बताया था। आज भी इनके इस तरीके का इस्तेमाल यूरोप समेत अमेरिका में किया जाता है।

प्रोजेक्ट वर्क से पढ़ाई खिलवाड़ नहीं है

भारत में प्रोजेक्ट वर्क को लेकर ये सोच होती है कि ये तरीका पढ़ाई नहीं खिलवाड़ है।

आज अमेरिका जैसे देश भी पढ़ाई में प्रोजक्ट विधि और एक्टिविटी विधि के तरीेके को अपने एजुकेशन सिस्टम में जरूरी कर दिया है।  

मॉडल प्रोजेक्ट वर्क जरूरी क्यों है?

Why model project work is important?


नर्सर कक्षा इस टॉपिक को एक्टिविटी से उनके स्तर के अनुसार पढ़ाया जाना चाहिए। 

नाम वाले शब्द कौन से हैं? 

गुण यानी  रंग,  लंबाई, ऊंचाई, मोटा, पतला  शब्द कहाँ पर प्रयोग करते हैं, जैसे- अनार लाल है। लाल अनार है।  इस तरह से बिना किताब के हम बच्चों में अक्षर ज्ञान के समय ही व्याकरण के छोटे-छोटे नियमों को भी बता रहे, जो आगे चलकर उनकी समझ को विकसित करेगा।

 

नॉलेज इंटरलिंकिंग यानी ज्ञान से सहसंबद्धता क्या है?

What is knowledge interlinking?

 एक ज्ञान की बातें दूसरे ज्ञान की बातों से जोड़ना अगली कक्षा के लिए उस बच्चे के दिमाग में एक प्लॉट तैयार करता है, बच्चे में आगे पढ़ने की क्षमता का विकास करता है, उसे ज्ञान का इंटरलिंकिंग (सहसंबद्धता) कहा जाता है।  जैसे अक्षर ज्ञान के साथ उन बातों को जो अगली कक्षा के सिलेबस में है, उन्हें इंटरलिंक कराना चाहिए। भले ही उससे कोई प्रश्न वर्तमान कक्षा में बच्चे की योग्यता  जाँचने के लिए न पूछा जाए। लेकिन यह इंटरलिंकिंग (सहसंबद्धता) आगे की कक्षा में बच्चों को बेहतर  बनाता है।  

 इस बात को मैं इस उदाहरण से समझाना चाहूंगा

 आपने देखा होगा कि घर पर बच्चे अपनी माँ से घर के वातावरण मैं सीखता है, माँ  उसे  एक चरण से दूसरे चरण के आने वाले ज्ञान से इंटरलिंक करती है। इंटरलिंकिंग ज्ञान का मतलब  एक जानकारी से दूसरे जानकारी की सहसंबद्धता।

उदाहरण के लिए समझिए कि पानी  के गरम होने की प्रक्रिया को बच्चा जानता और समझता है लेकिन  माँ उसे जब बताती है कि इसी गरम पानी में अगर दाल डालकर इसे उबाले  तो यह  गरम पानी  दाल  को पकाता है और इस तरह लिक्विड यानी तरल दाल बनती है। 

 फिर आप तेल और  कच्चे आटे की  पूड़ी पर उसके विचार को जानेंगे तो बच्चा अपने पूर्व ज्ञान को इंटरलिंक करके कहेगा कि तेल पूरी को पकाता है।

 पहले पानी में आलू, अंडा डालकर  आलू और अंडे को  पानी उबालकर पका देता है।  इस प्रोसेस इंटरलिंकिंग कर  बच्चा सीखता  है, अगर शिक्षक उसे इस पद्धति में सिखाए,  जैसा मैंने बताया है।  केवल ‘अ’  से अनार तक में ही बात खत्म न हो जाए। यही बात  नर्सरी से पहले और नर्सरी में बच्चे को  को पढ़ाने पर लागू होता है यानी बच्चे की क्षमता के अनुसार उसके ज्ञान को इंटरलिंक करके बच्चे के ज्ञान को उसके सीखने की क्षमता को व्यावहारिक  बनाना। (To make the child’s knowledge of his learning ability practical by interlinking his knowledge.)

  यह तथ्य आगे की कक्षाओं में भी अपनाया जाता लेकिन  वहाँ पर  पढ़ाने का लेवल अलग तरीके का  होता है।

 इस बात को इस उदाहरण से और गहराई से समझ सकते हैं-

 इनमें से छांटियें या अपने आसपास, जो नाम वाले शब्द है, उनकी सूची बनाइए और उनमें से किन्हीं पांच के चित्र बनाइए, इस तरह के प्रोजेक्ट या एक्टिविटी कार्य बच्चों में इस नीरस पढ़ाई के प्रति  रुचि बढ़ाता  है। 

व्याकरण को मजेदार तरीके से पढ़ाने से वह उसे समझ में आने लगता है। भाषा व  गणित को इस तरह से पढ़ाने का तरीका होना चाहिए। 

Teaching grammar in a fun way makes him understand it. There should be a way to teach language and mathematics in this way.

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Diploma in Journalism from Allahabad University, Master of Journalism and Mass Communication, B.Ed.

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