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बदल देंगे भारत की तश्वीर।

href="http://www.indianphotoagency.com/admin/results/w_..productsingle_INPA2805123.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"> हमारी आपकी और सबकी आजादी का पर्व गणतंत्र दिवस हम भारतियों को एक लोकतान्त्रिक देश के निवासी  होने का गर्व देता  है। आज हम आज़ादी से जी रहे हैं  और देश फलफूल रहा है।और इसी के साथ गरीबी, असमानता और कुछ मुट्ठी  भर लोगों के हाथ में ही आजादी है। दो वक्त की रोटी जिन्हें नसीब नहीं वो भी अपने देश की माटी से अपार  प्रेम   रखते हैं । भारत तरक्की   कर रहा  है। स्कूल में बच्चे पढ़ने के लिए जा रहे हैं  पर अफ़सोस उन्हें गुणवक्ता वाली शिक्षा नहीं मिल रही है। बेरोजगारों के लिए कोई मास्टर प्लान  नहीं है इन्हें  किस्मत के भरोसे छोड़ दिया जा रहा  है। रोजी-रोटी का संकट युवाओं  से उनकी  काबलियत को छीन  रहा है। देश बढ़ रहा  है। आधी से ज्यादा आबादी केवल  50 साल से वोट बैंक है, गरीबी हटाओं, बेरोजगारी मिटाओ ये नारा बेईमानी साबित हो रहा  है।  काले धन पर आन्दोलन को ठंडा कर दिया जाता है। उस पर कोई बहस नह

चलो मन गंगा जमुना तीरे

संगम शब्द के  उचारण मात्र से हमारे मस्तिष्क में महाकुम्भ की तश्वीर तैर उठती है। इस समय संगम क्षेत्र अपने पूरे रोवाब में है। हर जगह यहाँ संत, महत्मा, आमजन, स्त्री, पुरुष, भजन-कीर्तन -आरती, प्रवचन के साथ पूरी धरा की संस्कृति के साथ भारतीय संस्कृति  का संगम हो रहा है -    संगम स्नान में ऐसा सुख है आज  चलो भाई तीर्थ राज प्रयाग।         गंगा, यमुना, सरस्वती का ऐसा संगम,       धुनों पर बज रही हो जैसे सरगम। संगम तट पर नगर बस चुका  है- अस्पताल, पुलिस स्टेशन, नाव पर पोस्ट बॉक्स भी तैर रही है। चारों ओर का नज़ारा अद्भुत है। शब्दों से बयाँ करना बेईमानी होगी, इस धरा का नज़ारा यहाँ  आकर  ही लिया जा सकता है-                माघ के बारह वर्षो के बाद कुम्भ में चमक रहा है प्रयागराज। भारतीय डाक  संगम तट पर  संत  अक्षय वट  प्रवेश द्वार  महाकुम्भ में  सन्यासी  संगम का दृश  संगम का दृश  संगम का  नजारा देख इस धरती में स्वर्ग की काल्पन साकार होती है अस्था का यह मेला ब्रम्हांड में गौरवशाली प्रतीत होता है - मन कह उठता है चलो मन गंगा जमुन

टेट की छन्नी से मिलेंगे क्वालिटी टीचर

राईट टू एजुकेशन एक्ट के बाद टेट अनिवार्य अहर्ता परीक्षा है।  टेट कराने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। टेट के बाद शिक्षा मे  कैरियर का अवसर युवाओ के पास है। मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तरप्रदेश, राजस्थान में टीचर की भरती प्रक्रिया  विवादित रही। सही शिक्षा नीति नही होने के कारण  मामला न्यायालय में गया। अखबारों में शिक्षक भरती की ख़बरें अखबार में अपना स्थान बना रही है, यहाँ लाखों बेरोजगार इस लाइन में है। टेट परीक्षा और भरती  की प्रक्रिया के विवादित होते ही हर अख़बार  में खबर बन रही है। पात्रता परीक्षा के लिए अर्हता क्या है? टीचर की भर्ती में चयन का अधार शैक्षिक हो की टेट मेरिट या कोई प्रतियोगी परीक्षा इस पर बहस कम होती  है। बढ़ी रटने व होमवर्क की  प्रवृति  इस प्रतियोगिता  के युग में जहाँ पर अलग अलग बोर्ड और यूनिवर्सिटी है जिनके अंक देने की अलग अलग परिपाटी है। अगर शैक्षिक रिकॉर्ड को देखकर ही केवल टीचर बना दिया जाये तो रचनात्मकता का क्या होगा। आज जहाँ वैश्विकरण  के वजह से विज्ञान में भी क्रिएटिव सोच को महत्त्व दिया जाने लागा है वहीं  अमेरिका जैसे विकसित देश अब अपने पाठ्यक्रम  चाहे व

खबरों में टेट

सबके लिए निःशुल्क शिक्षा कानून यानि आर0 टी 0 एक्ट के लागू क्यों किया गया ताकि सभी को शिक्षा गुणवक्तयुक्त मिले। जिसके लिए टीचर एजीबिलीटी टेस्ट यानि टेट लागू किया गया ताकी दक्ष  शिक्षको का  चयन हो। और वर्तमान में बीएड उपाधी के लिय न्यूनतम योग्यता ही स्नातक या परास्नातक में 50 फीसदी अंको से पास अभ्यर्थी ही बीएड की उपधि प्राप्त कर सकता है। अब हम उड़ती हुई खबरों में चलते है- पहली खबर- बिना टीईटी वाले बनेंगे बेसिक शिक्षक - कैसे जब टीईटी 60 फीसदी अंको से पास अनिवार्य है तो और इस परीक्षा से बीएड उपाधी धारक की गुणवता का पता चलता है जोकि आर0 टी 0 एक्ट में अनिवार्य अहर्ता है। उत्तर प्रदेश में प्रथम टीईटी परीक्षा में 50 प्रतिशत बीएड उपाधी धारक इस पात्रता परीक्षा को 60 फीसदी अंको से पास नहीं हुए तो ऐसी खबर कहाँ तक तर्कसंगत हो सकती है।  दूसरी बात की प्राइमरी में बीएड उपाधि धारक टीचर के नियक्ति के लिए पात्र है और जो योग्यता बीएड के लिए है वही प्राइमरी टीचर के लिए है आर 0 टी 0 एक्ट के अनुसार और इसमे टेट पास होना  अनिवार्य है। यानि  बीएड उपाधी के लिय न्यूनतम योग्यता ही स्नातक या परास्नातक में 50

अभी आधी जीत है होगी अब पूरी ...

सोशल मीडिया यानि समाजिक माडिया में उत्तर प्रदेश में टीचर भरती  टेट मेरिट से चयन का मुद्दा हावी रहा जहाँ तर्क के द्वारा अपनी बात रखा जा रहा है लेकिन जिस तरह से गवर्नमेंट बदलने के बाद प्रक्रिया में आ गई विज्ञापन में चयन के अधार को बदल दिया गया। लेकिन सोशल मीडिया में टेट मेरिट और पूर्ण विज्ञापन के अनुसार निउक्ति के लिए फेस बुक में लाखो पोस्ट लिखे गए और आज इस प्रक्रिया में एक नए चरण में  प्रवेश किया है की अब टेट मेरिट और पुराने विज्ञापन की बहाली के लिए  डबल बेंच में अपील करने का रास्ता मिल गया है। ज़ाहिर टेट समर्थक फिर संगठित होकर इस मुहिम में ज़मकर  साथ देंगे क्योंकि  अब हमे न्याय पाने से कोई नहीं रोक सकाता  है। हमारे पास पर्याप्त कारण  है और सोशल मीडिया का सपोर्ट भी  है और हमारे समर्थन में वक्तिगत रूप से ऐसे  लोग भी जो टेट मेरिट से चयन के पक्षधर  उनका कहना है की  चयन प्रक्रिया एकेडेमिक मेरिट से नहीं बल्कि टेट मेरिट से किया जाये।  जिससे योग्य टीचर का चयन हो सके लेकिन यहाँ पर वोट की राजनीती हावी हो रही है और हम फेस बुक के माध्यम से अपनी बात रख एक साथ फिर दूसरी लड़ाई के लिए तैयार  हो। अभी

महाकुम्भ से

महाकुम्भ से

इलाहबाद । कुम्भ नगरी प्रयाग में मकर संक्रांति के दिन लाखो लोगो ने संगम में डुबकी लगाई। श्रदया , अस्था और विश्वास का अदभुत संगम देखने को मिला। शब्द नहीं तश्वीर बोल उठते हैं --

महाकुम्भ मेले में संत .......

कुम्भ मेले से ... मकर संक्रांति का पर्व शुरू और इसी के साथ इलाहाबाद में लगभग दो महीने चलने वाला प्रयाग महाकुम्भ प्रारंभ हो गया है। 13 जनवरी को हमने बात की संत श्री प्रथम मंत्रचार्य परम तपजी महाराज े जो पिछले 5 साल से कुम्भ क्षेत्र में   में अपनी  जप तप में लींन  है। यज्ञ आहूति के माध्यम से लोग का कष्ट दूर कर रहे है। स्वामी परमतप जी को आँखों से  दीखाई नहीं देता है लेकिन भक्तो के हर कष्ट को देख उन्हें दूर कर देते है। इनके यहाँ पहुचे कई भक्त ने हमे बतया की स्वामी जी की कृपा से हमारे दुःख दूर हुवे और हमें आत्मबल और ज्ञान की प्राप्ति हुई। परमतप जी यज्ञ के  हवन कर सभी का दुःख दूर करते है। परम तपजी से बात करने के लिए निम्न नंबर पर सुबह 10 बजे से 1 बजे तक बात  कर सकते है। संत श्री प्रथम मंत्रचार्य परम तपजी महाराज  मोबाइल नम्बर है- 8127642307,  8127345686,  8127345755 पता है- कली सड़क त्रिवेणी बांध , इलाहाबाद . 

महाकुम्भ प्रयाग आपको बुला रहा है ...

कुम्भ मेले की तैयारिया लगभग पूरी हो चुकी है। संगम तट पर सुंदर नगर बस चूका है बस आपके आने का इंतज़ार है। देखा जाये तो कुम्भ मेल आस्था व संस्कृति का प्रतीक है। प्राचीन समय से लोग अपनी सांस्कृतिक  आदान प्रदान के लिए इस मेले में विद्वान जन आते रहे है और आम जन को अपनी ज्ञान रुपी सरस्वती से तरते रहे है। संगम नदियों के साथ ज्ञान, आस्था के साथ धर्म एवं संस्कृति का भी है। पवन गंगा, यमुना के साथ अदृश रुपी सरस्वती हमारी जीवन की आस्था, विश्वाश है। हम अपनी भारती संस्कृति पर इसलिए गर्व करते है। हमारी हर चेतना में गंगा और प्रयाग है। इस महत्मय  नगरी में जैसे देवता विचरण करने लगते है। कुम्भ कलश की कुछ बूंदें हमें जीवन रुपी उर्जा प्रदान कर रही है। हिंदुस्तानी संस्कृति यानि भारतीय और इंडिया का मेल है कुम्भ मेला हमारी उर्जा की पहचान है। देश विदेश से सैलानी व श्रद्धालु अपनी जिज्ञाषा को  शांत करने के लिए इस मेले में आते है। यह परम्परा आज आधुनिकता और तकनीकी के युग में लोगो को सोचने में मजबूर कर देती है।  अल्लाहाबाद से इलाहबाद और अपने प्राचीन गौरव प्रयाग सभी धर्म और  आस्था के साथ सांस्कृतिक रूप से समृद्धशाल

ठण्ड के आगोश में

ठण्ड के आगोश में सारे काम धीमी रफ़्तार हो गई जिन्दंगी। नल का पानी भी दुश्मन लगने लगा। सुबह 6 बजे उठना किसी सजा से कम नहीं है। और पेन पकड़ना और उसे पन्ने पर घिसना खेत में हल जोतने से भी अधिक मेहनत का कार्य लगता है। रजाई की याद ठण्ड में बहूत आती है कम से  कम सोचकर ही गर्माहट ली  जा सकती है। सड़क में जलती  अलाव अपने ग्रह के सूरज  से कम नहीं नज़र आता है। सुबह सुबह सूरज को बादलो  में देख मन में ये तसल्ली करता है कि सूरज को ठंडी लग रही है इसलिये बदलो की रजाई ओढ़े हुए है। अब उंगलिया भी ठण्ड के कारन टाइप करने से स्ट्राइक  करने की चेतावनी दे रही  है वही दिमाग का पारा  ठण्ड के कारण  गिर रहा है। शेष अगली ठंडी में ....... 

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लघु-कथा' CBSE BOARD CLASS 9 NEW SYLLABUS LAGHU KATHS LEKHAN

'लघु-कथा' CBSE BOARD CLASS 9 NEW SYLLABUS LAGHU KATHA LEKHAN  लघु और कथा शब्द से मिलकर बना हुआ है। लघु का अर्थ होता है- छोटा और कथा का अर्थ होता है-कहानी। Laghu Katha ke Udharan class 9th hindi term-2 sylabuss 2022 hindi  न्यू सिलेबस सीबीएसई बोर्ड लघु कथा लेखन क्लास नाइंथ इस तरह लघुकथा का अर्थ हुआ कि 'छोटी कहानी'। the shrot story छात्रों हिंदी साहित्य को दो भागों में बाँटा गया है, पहला गद्य साहित्य (gadya sahitya)  और दूसरा काव्य साहित्य ।  गद्य साहित्य के अंतर्गत कहानी, नाटक, उपन्यास, जीवनी, आत्मकथा विधाएँ आती हैं। इसी में लघु-कथा विधा भी 'गद्य साहित्य' का एक हिस्सा है। कहानी उपन्यास के बाद यह विधा सर्वाधिक प्रचलित भी है। लघुकथा की महत्वपूर्ण बातें the important character of laghu katha in Hindi लघु कथा क्यों लिखी जाती है? 1.आधुनिक समय में इंसानों के पास समय का अभाव होने लगा और वे कम समय में साहित्य पढ़ना चाहते थे तो  'लघु-कथा' का जन्म हुआ। लघु कथा का जन्म कैसे हुआ? हमारी संस्कृति में लघु कथा का क्या-क्या रूप है? laghu Katha kya hota hai? 2.लघु कथा

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भारतीय आजादी के गुमनाम नायक bhaarateey aajaadee ke gumanaam naayak 2022 आज हम अपनी मर्जी से कहीं भी आ जा सकते हैं, पढ़ लिख सकते हैं अपने मनपसंद का करियर चुन सकते हैं, क्योंकि हम आजाद हैं और इस आजादी के लिए वीरों ने अपनी आहुति दी है, पर जब स्वतंत्रता सेनानियों के नाम बताने की बारी आती है तो हम सिर्फ गिने-चुने नाम ही बता पाते हैं, जबकि हकीकत यह है कि आजादी सिर्फ कुछ लोगों के बलिदान से नहीं मिली बल्कि इसके लिए बहुतों ने अपनी जान गंवाई। इनमें से कई तो गुमनामी की अंधेरों में खो चुके हैं। हम आपको ऐसे ही स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने आज़ादी की लड़ाई में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी-  आजादी के गुमनाम नायक हम बताने जा रहे हैं आजादी के महानायक जिनको हम भूल गए हैं-- कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी भारत छोड़ो आंदोलन से जुड़ने वाले कन्हैयालाल कई बार अंग्रेजी शासन के खिलाफ आवाज उठाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए और अंग्रेजों के जुल्म का शिकार हुए पर उन्होंने कभी हार नहीं मानी हर बार दुगनी ताकत के साथ अंग्रेजों से मुकाबला किया। भगत सिंह, चंद्रशेखर आजा