एक्टर के लिए मिमिक्री और रिजोनेटर्स की पहचान क्यों ज़रूरी Tips

एक्टिंग करना भी एक कला है, इसलिए  एक्टर को अपनी आवाज़ को लेकर प्रभावशाली प्रयोग करना पड़ता है।  ऐक्टर के लिए मिमिक्री और रिजोनेटर्स की पहचान होना क्यों जरूरी है, इस लेख में बता रहे हैं, अभिनेता आशीष कांत पांडेय-




            Seen of film Gulabo Sitabo

फिल्म अभिनेता (Actors) और रंगमंच के अभिनेताओं के लिए वॉइस वेरिएशन (variation) बहुत ही जरूरी होता है।

जिस प्रकार एक वर्ष का बच्चा बोलने के लिए होंठ (Lips) और जीभ (Toungu) को तेज़ी से हिलाकर (movement) ब्रूम… ब्रूम… गाड़ी की तरह आवाज़ निकालता है और कुछ समय पश्चात वह छोटे-छोटे शब्दों को बोलना सीख जाता है, उसी प्रकार एक अच्छे अभिनेता (Actor) को अपने रिजोनेटर्स (resonator) का इस्तेमाल करते हुए इसी प्रकार का अभ्यास करना चाहिए। जिससे वह कई तरह की आवाज़ को निकालने की क्षमता रख सके। कुछ लोग इसे मिमिक्री कहकर आपको भ्रमित करेंगे परंतु यह मिमिक्री नहीं अभिनय की एक टूल्स है, जो हर अभिनेता (Actor) को आना चाहिए। 

यदि आपको यह करना नहीं आता तो आपके डायलॉग (dialogue) में कोई भी वेरिएशन नहीं होगा और हर उम्र के अभिनय और आवाज़ को आप  प्रस्तुत नहीं कर पाएंगे।

            

 कुछ अभिनेता ‘इसे’ या ‘जिसे’ की जानकारी नहीं होता है, उसे मिमिक्री समझकर नजरअंदाज़ करते हैं। दरअसल यह अभिनेता के द्वारा किए गए अभिनय के किरदार के संदर्भ में एक वॉइस वेरिएशन होता है। रंगमंच और एक्टिंग के प्रशिक्षण में यह बातें बताई जाती हैं।

वॉइस वेरिएशन ही अच्छे अभिनेता की पहचान

इस वेरिएशन का इस्तेमाल करके आप एक अच्छे अभिनेता बन सकते हैं। अगर बात समझ में न आए तो ‘गुलाबो सिताबो‘ के  ट्रिजर को देखिए या पूरी फिल्म पर देख लीजिए, वहां पर दोनों अभिनेता श्री अमिताभ बच्चन बूढ़े के किरदार में और श्री आयुष्मान खुराना यंग मैन के किरदार में हैं।

See also  बीमारी है बार बार सेल्फी खींचना

श्री आयुष्मान खुराना और श्री अमिताभ बच्चन जी अपनी आवाज़ में विभिन्न वेरिएशन उत्पन्न करते हैं। जबकि अमिताभ बच्चन की आवाज़ एक कड़क आवाज़ मानी जाती है, परंतु यहां पर उन्होंने ऐसी वेरिएशन के द्वारा अपनी आवाज़ को प्रस्तुत किया है, जिससे वह अपने आप को अलग भूमिका में प्रस्तुत कर रहे हैं। या कहें कि उस बुजुर्ग की भूमिका को जस्टिफाई कर रहे हैं।

इसी प्रकार एक अच्छे अभिनेता का कर्तव्य होता है कि अपने रिजोनेटर्स का इस्तेमाल करें, जैसे- कुत्ते की तरह भोंकना हाथी की तरह चिंघाड़ करना इत्यादि अलग अलग तरीके की आवाजें। सूअर, बंदर, चिड़ियाँ की आवाज़ ऐसे विभिन्न प्रकार के जानवरों की आवाज़ो को निकालकर, अभिनय के लिए तैयार करना चाहिए। कहने का मतलब है कि अपने आवाज़ के पैटर्न को विभिन्न वेरिएशन में प्रस्तुत करने के लिए अभ्यास करने का यह एक तरीका है। हो सकता है कि अभ्यास करते समय आपको खुद पर हँसी आए या कोई दूसरा सुनकर आपका मज़ाक उड़ाए, परंतु यह सच में एक ऐसा  अभ्यास है, जिससे कि आप अपनी आवाज़ में विभिन्न प्रकार की वेरिएशन ला सकते हैं।

महान रंगमंच के विद्वान ग्रोटोवस्की जी भी यही कहते हैं कि अपनी आवाज़ को अभिनेता विभिन्न प्रकार के वेरिएशन के लिए उन रिजोनेटर्स का इस्तेमाल करना चाहिए। जैसे जानवर की आवाज़, किसी गाड़ी की आवाज़, किसी  मशीन की आवाज़, कहने का तात्पर्य यह है कि संस्कारी बातों में हम जिस प्रकार बोलते हैं चलते हैं या लोगों के सामने अपने आप को प्रस्तुत करते हैं, वह सब ठीक है। आप वह सब कर रहे हैं, अपने संस्कारी आवाज़ को ही प्रस्तुत करते हैं।

See also  पूर्वजों के बालों से सजती है चीन की लड़कियां china agjab gajab

एक समय आप अपनी आवाज़ को असंस्कारी आवाज़ों में भी परिवर्तित करने का प्रयत्न करें, जिससे सुनकर लोग या तो आप को पागल समझें या तो आपको मूर्ख समझें पर जरा-सा भी अगर आप इस तरह का अभ्यास करेंगे तो आप पाएंगे कि आपके गले में वह सारे टूल्स आ रहे हैं।

वह सारी वेरिएशन आ रहे हैं, जो आपकी अभिनय में चाहिए। यह सच बात है कि एक मिमिक्री करने वाला अभिनेता इन सब चीज़ो को बहुत ही आसानी से प्रस्तुत कर सकता है क्योंकि मैं खुद एक मिमिक्री अभिनेता भी हूं, मेरे लिए आसान रहा है। परंतु अभिनय में भी यह सब एक अभिनेता को प्रयोग करना चाहिए, इसे केवल मिमिक्री समझ कर नज़रअंदाज़ कर देना, इसका मतलब यही होगा कि फिर आप हर तरह का अभिनय नहीं कर पाएंगे।

या तो आपको फिर वॉइस एक्टर का इस्तेमाल अपने अभिनय के लिए करना पड़ेगा, जोकि एक अलग तरह से आपके अभिनय को प्रस्तुत करेगा।

इसलिए मैं यही कहना चाहूंगा कि हर अभिनेता को संस्कारी आवाज़ों के अतिरिक्त ऐसे आवाज़ों को भी प्रस्तुत करना चाहिए, जो उनके वाइस वेरिएशन्स (Variation) का इस्तेमाल के प्रयोग के द्वारा होना चाहिए। जैसे आपके पैरों में चोट है, या घुटने में चोट है, तो आप किस तरह से बोलते हुए उठेंगे।

खाना खाते हुए आप कैसे बोलेंगे, आप लेटकर कैसे बोलेंगे या आप खड़े हैं, तो कैसे बोलेंगे, हर समय आपके वॉइस में वेरिएशन होनी चाहिए, नहीं तो आप एक ही टोन में आवाज़ बोलेंगे तो लगेगा कि आप केवल एक ही तरह के अभिनय करने के लिए बने हैं।

See also  Kapoori Thakur कौन थे, जनरल नॉलेज क्वेश्चन आंसर

अगर आपको कई प्रकार के अभिनय करना है, एक बेहतरीन अभिनेता बनना है तो अपने गले में थोड़ा-सा परिवर्तन करें, जैसे ही आप गले में परिवर्तन करेंगे, जैसे ही आप अपनी गले को परिवर्तित करेंगे वैसे ही आपके चेहरे का भाव भी परिवर्तित होने लगेगा और निश्चित तौर पर आपका अभिनय सफल हो जाएगा।

लेखक-आशीष कांत पांडेय (अभिनेता) महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा(महाराष्ट्र)

Rajas daimond book hindi summary

बच्चों को कक्षा में बेहतर बनाने के Tips पढ़ने के लिए क्लिक करें

असुर आदिवासी’ पुस्तक असुर, आदिवासी जनजाति जनजीवन और सामाजिक पहलुओं पर पड़ताल करती पुस्तक

0 thoughts on “एक्टर के लिए मिमिक्री और रिजोनेटर्स की पहचान क्यों ज़रूरी Tips”

Leave a Comment