सवाल पूछना जरूरी है

-अभिषेक कांत पांडेय
(स्वतंत्र टिप्पणीकार)

अनौपचारिक शिक्षा हमें समाज से मिलती है लेकिन मीडिया समाज को प्रभावित कर रही क्योंकि इनके पीछे ऐसे लोग हैं जो अपना एजेंडा लागू करना चाहते हैं लेकिन यह भी सच है कि ऐसे लोगों का सच सामने आ रहा है।
 यदि हम ध्यान से देखें और समझें तो पता चलता है कि इस चुनाव में कहीं न कहीं मीडिया  व कॉर्पोरेट सत्ता पक्ष की तरफ  खड़ी है।
चुनाव के समय सत्ता पक्ष द्वारा जनता से किए गए वादों को मीडिया और कारपोरेट जगत अपने कैंपेन से आपके मस्तिष्कपटल  से 2014  के मेनिफेस्टो को मिटा रही है।
लेकिन यह भी सच है कि यदि हम सच देखना चाहे तो सच दिखेगा। राष्ट्रवाद, हिंदुत्- कैंपेन यह सब मुद्दे 2014 में किए गए मेनिफेस्टो के वादे को भुलाने के लिए ताकि सवाल न किया जा सके।

वोट किसी को भी दो लेकिन राजनीतिक दलों से सवाल पूछने की आदत होनी चाहिए क्योंकि कक्षा में भी यही कहा गया कि जो बच्चा सवाल पूछता है, वही आगे बढ़ता है।
 मतदाता को ‘रोबोटिक्स वोटर’ नहीं होना चाहिए बल्कि अपने सवाल के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

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