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international women’s Day 2023 अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस क्यों मनाया जाता है? जानिए महत्व, उद्देश्य इतिहास

Written by Abhishek pandey

today is the women day 8 march 2023 latest update new Gyan international women’s Day 2023 क्यों मनाया जाता है और इसका एक उद्देश्य और इतिहास क्या है? इन सब के बारे में जानिए इससे लेटेस्ट अपडेट अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के विशेष अवसर पर न्यू नॉलेज new knowledge क्या आप जानते हैं अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस क्यों मनाया जाता है? हाय जाने पूरी जानकारी।

महिला दिवस क्यों मनाया जाता है?

8 मार्च का दिन खास है क्योंकि इस दिन महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन किया जाता है। इंटरनेशनल वूमेन डे 2023 क्यों मनाया जाता है इसके पीछे का इतिहास और उद्देश्य महत्व क्या है आइए जाने-

Women’s Day 2023: महिला दिवस 8 मार्च को क्यों बनाया जाता है? इसके पीछे का इतिहास बड़ा दिलचस्प है और ज्ञानवर्धक भी है। महिलाओं को हमेशा पुरुषों से कमतर ही आंका गया है। हर सभ्यता में पुरुष का ही वर्चस्व रहा है और ऐसे में जब आधुनिक युग में हम प्रवेश करते हैं तो महिलाओं को भी बराबरी का हक देने की पहल शुरुआत की गई।

सामाज के नियम कानून केवल पुरुषों के वर्चस्व को ही बढ़ावा देता रहा है। इसलिए महिलाओं को भी उनके हक की बात करने के लिए और उन्हें एक मंच पर इकट्ठा करने के लिए एक दिवस की जरूरत है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय वुमंस डे मनाने का फैसला लिया गया। 8 मार्च को ही महिला दिवस क्यों मनाया जाता है इसके पीछे महिलाओं की जागरूकता और उनका आंदोलन रहा है । इसलिए संयुक्त राष्ट्र संघ ने धरती की हर महिलाओं को जागरूक बनाने और उन्हें सशक्त बनाने के लिए महिला दिवस मनाने का फैसला किया गया।

इस खास दिन को सेलिब्रेट किया जाता है इसके साथ इस दिन एक खास थीम होता है जो महिलाओं के लिए समर्पित होता है। महिलाओं को बराबरी का दर्जा देना और उन्हें सशक्त बनाना महिला दिवस सबसे बड़ा उद्देश है।

महिला दिवस मनाने का इतिहास

the history of international women’s Day अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को ही मनाया जाता है ऐसा क्यों? इसके पीछे का इतिहास क्या है इन सब बातों को जानने के लिए आगे लेख को पढ़ते जाएं।

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महिला दिवस मनाने के पीछे कारण यह है कि सन 1908 में न्यूयॉर्क में बहुत बड़ी रैली हुई थी। लगभग 15000 महिलाओं ने इस रैली में भाग लिया था। उनकी मांग उनके काम के घंटों को लेकर थी। दरअसल उस समय नौकरी के लिए काम करने वाली महिलाएं और पुरुषों को 12 घंटे से अधिक समय काम करना पड़ता था। इसके साथ उन्हें काम के मुताबिक वेतन नहीं दिया जाता था।
अपने काम के घंटे को कम करने और पुरुषों के बराबर वेतन पाने के अधिकार के लिए 15000 महिलाएं New Yark में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।

उन दिनों महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं था इसलिए वे अपने वोट की मांग के अधिकार के लिए भी इस धरना प्रदर्शन में शामिल हुई। उनकी मांग थी कि महिलाओं को भी सम्मानित जीवन का अधिकार मिले और काम के घंटे कम हो इसके साथ ही पुरुषों के बराबर वेतन मिले और पुरुषों के बराबर वोट का अधिकार हो।
यह आंदोलन इतना सफल हुआ तब जाकर अमेरिका के सोशलिस्ट पार्टी ने इस आंदोलन के एक साल बाद इस दिन को यानी 8 मार्च को वूमेंस डे घोषित कर दिया।

इंटरनेशनल वूमंस डे क्यों मनाया जाता है?

अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में महिलाओं द्वारा एक आंदोलन हुआ जिसने इतिहास बदल दिया। ‌ इस आंदोलन के दौरान 15000 से अधिक महिलाएं इकट्ठा हुई थी। उनकी मांग थी कि नौकरी में काम के घंटे को कम किया जाए। पुरुषों के बराबर वेतन दिया जाए। उन्हें वोट का अधिकार दिया जाए इन सभी मांगों के साथ उनका आंदोलन सफल रहा और तभी से महिला सशक्तिकरण की नींव पड़ी।

सन 1911 से पहला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया

international women’s Day सन 1911 में पहली बार मनाया गया। डेनमार्क, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रिया, जर्मनी में प्रथम अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस सेलिब्रेट (first (international women Day celebrated)
किया गया था।

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8 मार्च 1975 को संयुक्त राष्ट्र ने इसी दिन को महिला दिवस के रूप में आधिकारिक रूप से मान्यता दी। इसी दिन के बाद से हर साल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाने लगा और इसमें एक विशेष them भी होता है जो महिलाओं के लिए समर्पित होता है।

भारत की पहली शिक्षिका सावित्री ज्योतिराव फूले का योगदान महिला दिवस?

भारत की प्रथम टीचर सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले का शुक्रगुजार होना चाहिए क्योंकि उन्होंने महिलाओं के शिक्षा के अधिकार के लिए बड़ी लड़ाइयां लड़ी। महिला दिवस के इस अवसर पर उनके इस सशक्त आंदोलन को हम सभी लोगों को प्रणाम करना चाहिए। महिलाओं को वह हमेशा दोयम दर्जे का नागरिक समझा गया है उन्हें पढ़ने लिखने का हक नहीं दिया गया है। स्त्री अधिकारों और शिक्षा के लिए भारत में उनका बड़ा योगदान रहा है।


महिला दिवस मनाने का उद्देश्य क्या है?

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का सबसे बड़ा उद्देश्य है कि महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिलाना। इसके साथ इसका उद्देश्य है कि महिलाओं को समाज और कार्यस्थल में भेदभाव किया जाता है, इस भेदभाव को मिटाना है। महिलाओं को कई अधिकार दिए उनके प्रति जागरूक उन्हें बनाना और उन्हें शिक्षा के अधिकार और समानता के अधिकार से जोड़ना भी इसका सबसे प्रमुख उद्देश्य और पहल है। असल में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस जैसे आयोजनों से महिलाओं में सशक्तिकरण होता है और वह अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होते हैं और एक मंच पर एकजुट होकर अपने हक की आवाज उठाते हैं।

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महिला दिवस 2023 की थीम

theme of international women’s Day 2023: United nation अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस यानी 8 मार्च को बनाने की शुरुआत की थी। इस दिवस को मनाने के लिए हर साल एक नई टीम होती है। आपको बता दें कि सबसे पहले यूनाइटेड नेशन ने महिला दिवस मनाया था तो उस समय थीम celebrating the past, planning for the future रखी गई थी।

The theme of today international women’s Day 2023 “डिजिटऑल: लैंगिक समानता के लिए नवाचार और प्रौद्योगिकी” (DigitALL: Innovation and technology for gender equality) रखी गई है।

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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस international women’s Day क्यों मनाया जाता है?

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस इसलिए मनाया जाता है क्योंकि महिलाओं को आधुनिक युग में और उससे पहले अधिकार और आजादी सीमित दी जाती थी इसलिए महिलाएं जब एकजुट हो तो अपनी आजादी और अधिकार के लिए उन्होंने एक लंबी लड़ाई लड़ी जिसके मद्देनजर संयुक्त राष्ट्र संघ ने महिला दिवस 8 मार्च को मनाने का फैसला लिया। 1975 में पहली बार 8 मार्च को महिला दिवस मनाया गया क्योंकि न्यूयॉर्क में सन 1908 में महिलाओं ने अपने काम के घंटे को कम करने और पुरुषों के बराबर वेतन (salary) पाने के अधिकार के लिए सड़कों पर निकली थी।
यह इतना बड़ा आंदोलन था उस समय पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया। महिलाओं का यह सबसे बड़ा आधुनिक समय का आंदोलन कहा जा सकता है। इसी समय को ध्यान में रखते हुए 1975 में संयुक्त राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को मनाने का फैसला लिया। तो सबसे पहले महिला दिवस 8 मार्च को मनाया गया। और यह महिला दिवस आज तक 8 मार्च को मनाया जाता है। आज भी महिलाएं इस समाज के दकियानूसी ख्यालों और अंधविश्वासों में मोहरा बनी हुई है। किसी भी समाज में अगर महिलाओं को उचित सम्मान मिलता है तो वह समाज तेजी से तरक्की करता है कई पुरानी सभ्यता है इसका प्रतीक रही है।

सन 1908 में महिला का आंदोलन एक नए युग की शुरुआत?

बिल्कुल उस समय महिलाओं ने अपने अधिकार के के लिए आंदोलन किया। इसलिए महिलाओं का आंदोलन एक नए युग की शुरुआत माना जाता है।

conclusion

international women’s Day 2023 के बारे में पूरी जानकारी यहां उपलब्ध कराई गई है किस तरह से महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए 8 मार्च 1911 को पहला वूमेंस डे मनाया गया। इसके बाद 1975 को दुनिया में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की परंपरा शुरू हुई। यूनाइटेड स्टेट अंतररष्ट्रीय महिला दिवस 2023 की अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट का लिंक


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Abhishek pandey

Author Abhishek Pandey, (Journalist and educator) 15 year experience in writing field.
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