ल्यूकेमिया यानि हड्डी के कैंसर से जूझ रही एक साल की बच्ची का नई तकनीक से किया इलाज

Last Updated on November 16, 2015 by Abhishek pandey

डीएनए कटिंग के जरिए ब्लड कैंसर के इलाज में मिली सफलता

ब्लड कैंसर से पीड़ित मरीजो के लिए वरदान साबित होगी ये नई तकनीक

कहा जाता है कि अगर धरती पर कोई भगवान है तो वह इंसान के रूप में डॉक्टर हैं। एक साल की इस प्यारी बच्ची लेइला को ल्यूकेमिया एक तरह के कैंसर से पीड़ित थी। ये कैंसर सबसे पहले रक्त में और इसी रक्त के संक्रमण के कारण हड्डी के अन्दर यानि बोन मैरो में होता है। जिस कारण से शरीर में सफेद रक्तकणिकाएं इसीलिए अधिक बनना शुरू हो जाती हैं ताकि शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत हो, लेकिन इस कारण से लाल रक्त कणिकाएं जो शरीर के लिए जरूरी होती है उसकी तादाद घटने लगती है इसी वजह से हड्डियों में खून स्पंजी हो जाता है, जिस कारण से धीरे-धीरे शरीर कमजोर होता चला जाता है और इंसान की मौत हो जाती है। पर इस बच्ची को डॉक्टरों ने इस भयानक कैंसर से बचा लिया एक नई तकनीक डीएनए कटिंग के जरिए उसके शरीर में किसी स्वस्थ व्यक्ति के कोशिकाओं को प्रत्यारोपित कर दिया। डॉक्टरों ने बताया कि इस तकनीक से इस बच्ची के प्रतिरक्षातंत्र में खास बदलाव आएगा और कैंसर के लिए जिम्मेदार कोश्किाओं को नए स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली में बदल देगा। इस पूरी तकनीक को जीन्स एडिटिंग तकनीक का नाम दिया गया है। इलाज के इस नए तरीके से इस बच्ची में ल्यूकेमिया के लिए जिम्मेदार डीएनए में बदलाव होगा और नए स्वस्थ ब्लड बनेगा।

लंदन में स्थित बच्चों के अस्पताल ऑरमान्ड स्ट्रीट के डॉक्टरों की टीम ने इस बच्ची का सफल आपरेशन किया। वहीं डॉक्टरों की टीम अपनी इस कामयाबी पर उत्साहित हैं और अगले साल इस बीमारी से पीड़ित 1० से 12 मरीजों का इलाज डीएनए एडिटिंग तकनीक से करेंगे।

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