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haivaniyat

दिल्ली में हुई घटना के बाद हम आने वाले साल की शुभकामना कैसे दे सकते है देश की बेटी हैवानियात की शिकार हुई और हम आज़ादी के इतने सालो के बाद भी स्त्री की इज़त नहीं करना सीखे   ये हमारी हार है की  हम देश में ऐसे लोगो चुनते है  जो हमारी रक्षा नहीं कर सकते है केवल बयानबाज़ी करते है इस  साल की ये घटना इंसानियत के मुह पर तमाचा है।  कब हम जागेंगे ..........
आजादी का मतलब क्या है जिओ और जीने दो यह लोकतंत्र का मूल मन्त्र है शिक्षा स्वास्थ्य रोज़गार और भोजन सभी को  मिलाना उनका अधिकार है लेकिन आज भारत में गरीबो को उनका ये हुक नहीं मिल रहा है इसके लिए कौन जिम्मेदार है यह प्रश्न सभी के मन में कौंधता है और हम जानते है की कही न कही हम जिमेदार है भ्रष्टाचार के खिलाफ लोक पल बिल की मांग और आन्दोलन के बाद लोकतान्त्रिक तरीके से चुनाव लड़कर एस हक़ को पाने की बात अब चुनाव लड़ना एक मात्र विकल्प है  सही भी है अगर नेता सही चुने जाये तो देश तरक्की कर सकता है लेकिन सही लोगो को चुनाव लाकने के लिए आगे आने की जरूरत है आशा कारते है की आगामी चुनाव में देश के लिए कार्य करने वाले नेता चुने जायेंगे स्वंतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई 

मनरेगा मे केवल तीन दिन रोजगारॽ

अभिषेक कांत पाण्डेय मनरेगा मे केवल तीन दिन रोजगारॽ ग्रामीणों को सम्मान से जीने के लिए मनरेगा कानून के तहत १०० दिन के लिए काम मांगने पर काम देने की जिम्मेदारी संबधित अधिकारियों की है। लेकिन हकीकत इससे अलग है। खासतौर पर महिलाओं को मनेरेगा के तहत काम के समय कूल मजदूरों की संख्या के ३३ प्रतिशत की संख्या महिलाओं की होनी चाहिए     लेकिन इसके उलट यह संख्या केवल कागजों पर दिखाकर पूरी की जाती है। इस स्तर पर प्रधान रोजगार सेवक मिली भगत से उत्तर प्रदेश में मनरेगा में रूपयों का हेर–फेर हो रहा है। इस बाबत जब नारी संघ की महिला सदस्यों ने ग्राम प्रधान से कहा जता है तो प्रधान धमकी देकर मामला दबाने की कोशिश करता है। यह सब खेल वाराणासी के काशी विद्यापीठ ब्लाक के ग्राम पंचायतों में धड़ल्ले से चल रहा है। इस पर जब वहां की संगठित १० ग्राम पंचायत की महानारी संघ की महिलाओं ने इस बाबत ब्लाक में शिकायत की तो काम तो मिला केवल तीन दिन के लिए। इस तरह कई बार नारी संघ की  महिला सदस्यों ने इसके बारे में ब्लाक अधिकारी से शिकायत की तो भी को सार्थक हल नहीं मिला। वहीं महिलाओं ने काम के आवेद के बाद केवल तीन दिन क

और यूपी बोर्ड टापर को नहीं मिल पाएगा दिल्ली के टाप कालेज में प्रवेशॽ

उत्तर प्रदेश माध्यमिक बोर्ड का रिजल्ट आ गया है। अब स्नातक में प्रवेश के लिए छात्रों को विविश्विद्यालय के कट आफ मेरिट में अपना स्थान बनाना होगा। अगर बात करे तो दिल्ली विश्वविद्यालय ओर इसे संबधित मान्यता प्राप्त कालेज में प्रवेश के लिए यूपी बोर्ड का टापर अन्य बोर्ड सीबीसई व आइसीएससी बोर्ड के टापर से पिछड़ जाएगा। यह हम नहीं कह रहे हैं बल्कि हर बोर्ड के टापर की सूची पर नजर डाले तो यहां यूपी बोर्ड के टापर का प्रतिशत ९६ प्रतिशत के लगभग है जबकि अन्य बोर्ड के टापर ९९ प्रतिशत अंक पाकर सबसे आगे हैं। जाहीर है कि दिल्ली के कालेजों में स्नातक में प्रवेश का आधार केवल इंटरमीडिएट के प्रतिशत को देखकर काट आफ बनाया जाएगा तो ऐसे में यूपी बोर्ड का छात्र जो औसत पच्चासी प्रतिशत अंक पाने वाला लाख मेंहनत के बाद सीबीएसई के नब्बे प्रतिशत वालों के आगे उनका एडमिशन नहीं हो पाएगा चाहे वह जितने भी योग्य हो। यूपी बोर्ड लाख स्टेप मार्किंग का दावा कर ले लेकिन यहां से टाप करने वाला छा़त्र भी एकेडमिक मेरिट से प्रवेश व चयन में सीबीएसी आईसीएसइ बोर्ड के नब्बे प्रतिशत अंक पाए से पीछे रह जाएगा। वहीं सीबीएसई बोर्ड व आईसीए

कल फैसले का दिनǃ

कल फैसले का दिन ǃ प्राइमरी टीचर भर्ती यह मोड़ कई बार आया की जब जब नियुक्ति की मांग की तो लाठी डण्डे मिले। यही युवा है जिन्होने मुख्यमंत्री बनाया। लेकिन आज अपने हक की लड़ाई भी लोकतांत्रिक ढंग से लड़ने नहीं दिया जा रहा है। इधर सरकार टीईटी मेरिट से जल्द भर्ती का आश्वासन नहीं दे रही है। लेकिन यह बात साफ है कि चयन प्रक्रिया को बदल पाने में कानूनी अड़चने है। इधर फिर भी इन सब बारीकियों पर गौर करने के बाद भी कोई अधिकारिक बयान नहीं आया लेकिन विधानसभा सत्र में टीईटी से चयन की बात की गई है। लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि टीईटी मेरिट से भर्ती की जाएगी। हाईकोर्ट में  सुनवाई में फैसला आ सकता है। जिसमें पूर्व विज्ञापन के आधार पर भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी।

टेट उतीर्ण और भर्ती प्रक्रिया में शामिल बेरोजगारों की सरकार अवेहलना कर रही

 खबरें आ रही हैं कि अगले सत्र में शिक्षा मित्रों की नियुक्‍ति होगी लेकिन ये तो पैराटीचर तो पहले से ही नियक्‍त हैं वो भी इण्‍टर पास  और सरकार इन्‍हें बीएड करा कर स्‍थाई नियुक्‍ति देगी। इधर आरटीई काबिल टीचर की बात करता है। तो हमारा संविधान सबकों एक समान  नजरिये से देखता है कि योग्‍यता के अनुसार नौकरी दी जाए। लेकिन  बीएड टेट उतीर्ण और भर्ती प्रक्रिया में शामिल बेरोजगारों की सरकार अवेहलना कर रही है। ६ लाख बीएड धारक और ३ लाख टीईटी पास  और लाखों लोग टीचर बनने के लिए बीएड करने की तैयारी अभी से कर रहे हैं इन्‍होंने वर्तमान सरकार को वोट दिया कि जल्‍द टीचर की भर्ती लोकतांत्रिक ढंग से शुरू होगी लेकिन वर्तमान सरकार चुनाव से पहले की परिस्‍थ्‍ितियों को भूल गया है। अब केवल एक ही दिशा में शिक्षा मित्रों की बात कर रहा है। इधर कंपटीशन से बीएड करने वाले और टीईटी मेरिट में से नियुक्‍ति का बात न करके इनको केवल टरकाया जा रहा है। संवैधानिक तरीके से हो रही भर्ती की प्रक्रिया को बदलने में ज्‍यादा रूचि दिखा रही है। बेरोजगारी भत्‍ते में भी सरकार का फैसला बिल्‍कुल अजीब है कैसे बेरोजगारी भत्‍ता के लिए सरकार बेर

करने लगी और हमारा वोट मांगने के लिए मल्‍टीनेशनल कंपनी की तरह अपने उत्‍पाद को बढा चढाकर बेचते है

टीईटी मेरिट से चयन को लेकर इस समय सरकार कानूनी हल ढूढ रही है। एकेडमिक मेरिट के लिए केबिनेट में मंजूरी लेनी होगी तभी नियमावली संशोधित होगी। लेकिन क्‍या सरकार को इस तथ्‍य पर मंथन करना अधिक जरूरी है कि वर्तमान में शिक्षा के स्‍तर को बढाने के लिए टीईटी की मेरिट या कंपटीशन के माध्‍यम से चयन लोकतांत्रिक है। अगर पिछली सरकार ने आरटीई के महत्‍व को समझते हुए टीईटी मेरटि से चयन के प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती करने की पहल की तो इस सरकार को क्‍या परेशानी है क्‍या चुनी हुई सरकार इस तरह के फैसले को सही कहा जाएगा जो केवल पिछली सरकार के टीईटी मेरिट वाले विज्ञापन को राजनीतिक द्वेष के चलते विज्ञापन को निरस्‍त करने या चयन प्रक्रिया को बदलकर शैक्षिक मेरटि किया जाना सही है। जब अलग अलग बोर्ड और विश्‍वविद्‍यालय में नंबर देने का मानक अलग है तो साफ जाहिर है कि इसमें वे उम्‍मीद्वार पीछे रह जाएंगे जिन्‍होंने ऐसी संस्‍थाओं से अपनी पढाई की जहां नंबर कम मिलता है। यहां यह स्‍पष्‍ट कर दूं कि बहुमत की सरकार जब भी नियमावली बनाती है या उसमें संशोधन करती है तो उसको न्‍याय के कसौटी पर खरा उतरना है पर

उत्तर प्रदेश बाल मजदूरी में नंबर वन तब भी नहीं हो रही टीईटी मेरिट से चयन

उत्तर प्रदेश बाल मजदूरी में नंबर वन तब भी नहीं हो रही टीईटी मेरिट से चयन ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक विद्‍यालयों में पढाई नहीं होती है। प्राथमिक विद्‍यालय में मिड डे भोजन में पोषक तत्‍व गायबहैं। सरकारी प्राइमरी स्‍कूल में पढने में उच्‍च प्राथमिक विद्यालय के बच्‍चों को जोड घटाना नहीं आता है। हमारे सरकारी स्‍कूलोंकी स्‍थ्‍िति तब है जब आज छटा वेतन आयोग के अनुसार अच्‍छा वेतन सरकारी शिक्षक पा रहे हैं। अब सवाल उठता है कि अखिर यह स्‍थिति क्‍यों बनी हुई है। जाहिर है पिछले दशकों से शिक्षा के स्‍तर पर शिक्षकों के चयन में कोई अपेछ्‍ति सुधार नहीं हुआ है। आज जब मुफत शिक्षा अधिकार कानून की बात आती है तो भी इस कानून का पालन करने में राज्‍य सरकार सुस्‍त दिख रही है।उत्‍तर प्रदेश में यह स्‍थ्‍िाति और दयनीय है। और बात जब टीईटी यनी टीचर एजिबिलिटी टेस्‍ट के अनिवार्य करने के बाद आज भीमजाक बना हुआ है। जहां एक आज छात्र व शिक्षक अनुपात प्रथमिक स्‍तर पर एक शिक्षक पर ३० छात्र और उच्‍च प्राथमिक में ३५ छत्र होने चाहिए लेकिन आज जहां राज्‍य सरकारें टीचरों की भर्ती प्रक्रिया में उलझें और केवल नकल माफियों को फा
जिस तरह से टेट मेरिट से चयन के प्रति सरकार की हीलाहवाली चर रही है तो  उससे एक बात साफ है कि कोर्ट के हस्‍तक्षेप के बाद सरकार को जल्‍द ही चयन  हो गा। दीगर बात यह कि शिक्षा जैसे गंभीर मुददे में सरकार एक सही निर्णय नहीं  ले पा रही है जबकि आज हम गांवों में प्राथमिक विद्‍यालय की हालत देख सकते है। सर्वशिक्षा अभिया अशातित सफलता नहीं हासिल कर पा रहीं है। शायद इसका कारण हमारे पास सर्वविदित है कि पढाई का स्‍तर आज गिरा है। जिस  तेजी से हमारी दुनिया बदल रही है उस तेजी से प्राथमिक विद्‍यालय में गुणवत्‍तायुक्‍त शिक्षा की बात  नहीं हो रही है। अभी टीचरों की भरती के स्‍पष्‍ट मानक नहीं है। ऐकमेडिक के द्‍वारा चयन  का मानक आज अपनी प्रासंगीकता पर स्‍वयं ही प्रश्‍न पूछ रहा है। नकल एक बडी समस्‍या है और इसी नकल के वातावरण से अगर हम एकेडमिक मेरिट से टीचर चुन रहे हैं तो निश्‍चित  ही हम बच्‍चों के भविष्‍य के साथ खिलवाड कर रहे है। यहा एक बात है कि कंपटीशन या टीईटी मेरिट से चयन सर्वोत्‍तम है लेकिन सरकार यह विकासवादी निर्णय लेने में समय लगा रही है। 

बेसिक शिक्षा मंत्री के बयान ने

बेसिक शिक्षा मंत्री के बयान ने टीईटी उतीर्ण बेरोगारों के साथ धोखा किया जा रहा है। जिस तरह अखबार में टीईटी भर्ती के मामले में भ्रमित करने वाली खबरें आ रही है। अभी भी मीडिया टीईटी मेरिट के औचित्‍य पर कोई सार्थक लेख नहीं प्रकाशित कर रही है बल्‍कि इन सब मामलों में अपने पाठकों को भटका रही है। टीईटी मेरिट के संबंध में सरकार के साथ ही मीडिया भी अपने विचार खुल कर नहीं रख रही है शायद कारण साफ है कि इस  परीक्षा में धांधली के आरोप के चलते इस प्रक्रिया पर कुछ लिखने में असहज है लेकिन इतना बड़ा मुददा जोकि हमारी शिक्षा के बुनियादी ढांचे को फिर से खड़ा करने के लिए है। जहां आज नकल सबसे बड़ा नासूड है ऐसे में अगर अब टीईटी मेरिट या कंपटीशन चयन में अनिवार्य नहीं हुआ तो शिक्षा का स्‍तर नहीं सुधर सकता है।

टीईटी अथ्यर्थियों को नौकरी की जगह मिलता है केवल आश्वासन

आज हाईकोर्ट प्राईमरी शिक्षको को चयन से संबंधित विज्ञापन की सुनवाई १५ मई को कर दी गई है। आज जनता दरबार में टीईटी अभ्‍यर्थियों को मुख्‍यमंत्री को अश्‍वासन दिया कि जल्‍द ही फैसला लिया जाएगा लेकिल प्रश्‍न यह उठता है कि अखिर सरकार इस पर निर्णय लेने पर इतना देर क्‍यों कर रही है। इसके साथ ही जब टीईटी मेरिट से चयन की बातें विज्ञापन में स्‍पष्‍ट थी तो अदालत में मामला केवल अपनू फायदे को भूनाने में किया जा रहा है तरीख बढ़ना और इस सब टिप्‍पणी तो नहीं की जा सकती है परंतु अगर हम थोड़ा पीछे जाते हैं तो बातें स्‍पष्‍ट है कि आरटीई के तहत टीईटी परीक्षा पात्रता है और साथ ही इसके वेटेज का भी महत्‍व है। यानी टीईटी चयन का आधार उचित है। लेकिन सरकार बदलने के बाद अब इसमें राजनीति साफ झलक रही है। इस समय टीईटी पास तीन लाख की जगह आठ नौ लाख लोग  इस प्रक्रिया को कैंसिल करने की इच्‍छा रखते हैं। इसी में एक व्‍यक्‍ति ने विज्ञापन को ही चैलेंज कर डाला और महीनों प्रक्रिया को उलझाये रखा। टीईटी अभ्‍यर्थियों ने हजारों रूपये खर्च कर एक इस परीक्षा में टीईटी मेरिट की प्रक्रिया को जानकर उत्‍साह से आवेदन किय

टीईटी मेरिट से चयन प्रकिया को वे लोग ही बदलना चाहते है

आज बहस के दौरान जब याची के अधिवक्‍ता आलोक यादव से जज ने पूछा तो इस प्रक्रिया में आपको क्‍या फायदा है तो दोस्‍तों आज केबहस में जज का यह प्रश्‍न करना हमारे लिए पक्ष में है क्‍योकि हमारे आंदोलन ने इस सच्‍चाई को सामने लाय कि टीईटी मेरिट से चयन प्रकिया को वे लोग ही बदलना चाहते है जो टीईटी में कम नंबर पाये हैं या जिनका एकेडमिक में नंबर ज्‍यादा है जैसा कि हम जानते है कि विज्ञापन की छोटी कमियों का फायदाउठाने के लिए कोर्ट गये है और इतने दिनों तक भर्ती प्रक्रिया को लटकायाने का प्रयास किया ताकी अगली सरकार आकर भर्ती में धांधली का आरोपलगाकर चयन प्रक्रिया को बदल दे या विज्ञापन को निरस्‍त करने के लिए सारा दिमाग का खेल खेला जा रहा है। अब याची इसे टीईटी बनाम एकेडमिक मेरिट बनाया जा रहा है। अब प्रश्‍न उठता है कि जब पिछली सरकार ने केबिनट में टीईटी मेरिट चयन का आधार बदल कर दिया तो यह बहुमत की ही सरकारने किया दूसरी बात हाईकोर्ट में यह मामला गया जहां कोर्ट ने टीईटी मेरिट को सही कहा और इसके खिलाफ रिट को खरिज कर दिया। यानी अब बहस उसी ओर जा रही है। आशा है कि हमारी ही अब जीत होगी विज्ञापन यथावत रहेगा और चयन इस

अच्‍छे शिक्षक ही देश के भाग्‍य निर्माता बनाते हैं।

आज हम इस मुकाम पर है जहां संघर्ष हमारे जीवन को बदल देगा। जाहीर है कि प्राइमरी शिक्षा के इतिहास में अनिवार्य निश्‍शुल्‍क शिक्षा के बाद टीईटी और इसके बाद इसकी मेरिट से चयन हम एक नए बदलाव की और बढ़ रहे हैं। निश्‍चित अब योग्‍य और कर्मठ शिक्षकों की चुनाव करना आसान होगा। और हर प्राथमिक स्‍कूल में गूणवत्‍तायुक्‍त शिक्षा मिलेगी। प्राथमिक शिक्षा का नजरिया बदलेगा लोग कहेंगे कि ये है टीईटी मेरिट वाले टीचर काश सरकार ने पहले ही इनकों नियुक्‍त किया हाता तो हम शिक्षा के क्षेत्र में बहुत आगे होते है। हमारे गांव की कायाकल्‍प हो जाती। लेकिन देर आये दुरूस्‍त वाली कहावत सही है। टीईटी मेरिट से चयनित टीचर शिक्षा के स्‍तर में अमूलचूल बदलाव लाने के लिए तैयार है और इस सपथ के साथ कि हमें न्‍याय मिला है तो हम बच्चों को भी गुणवत्‍तायुक्‍त शिक्षा देंगे। देश के विकास में भागीदारी बने और हमारे देश को निर्माण करेंगे। अच्‍छे शिक्षक ही देश के भाग्‍य निर्माता बनाते हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार टीईटी अभ्यथियों से खेल खेल रही है।

Uptet government playing game with TET”s candidate उत्तर प्रदेश सरकार टीईटी अभ्यथियों से खेल खेल रही है। यूपी में टेट को लेकर जिस तरह से सरकार पिछले तीन–चार महीने से लुका छिपी खेल रही है और विज्ञापन के अनुसार भर्ती करने के अपने कर्तव्य से पीछे हट रही है। ऐसे में नौकरी की आस लगाये बैठे टीईटी उतीर्ण बेरोजगारों में जबरदस्त आक्रोश है। इलाहाबाद में उतीर्ण टीईटी बेरोजगार आशीष हताश हैं। उनका कहना है कि पिछली सरकार ने उनके साथ भदृदा मजाक किया है। वे दुखी होकर बताते हैं कि टीईटी मेरिट से चयन प्रक्रिया के लिए हमने मेंहनत से तैयारी की और जब नौकरी देने की बात आई तो विज्ञापन पर रोक लगाया गया जिसके लिए परिक्षार्थी कैसे जिम्मेदार हैं। वहीं वे कहते हैं कि नई सरकार से हमें बहुत उम्मीदें थीं कि जल्द से जल्द टीईटी मेरिट से चयन प्रक्रिया शुरू करेगी लेकिन सरकार भी उनके साथ ऐसा व्यवहार कर रही है जैसे एक जिद्दी छोटा बच्चा खेल जीतने के लिए बीच में नियम बदलने और बईमानी की बात कहता है। वहीं राजपूत मानते है कि देर से सही पर वर्तमान सरकार को यह बात समझ में आएगी कि हमारे साथ धोखा हुआ है वे हमारी पीड़ा समेझेंगे और

हरियाणा में टीचर बनने का सपना हकीकत बनते नजर नहीं आ रही है

Hariyana me teacher banne ka spna hkikut bnate najar nahee a rhaee hai srkar tender par teacher rakhkar RTE ke uddeshya ko bhool rahee hai. Iska verodha karna jaroori hai. हरियाणा में टीचर बनने का सपना हकीकत बनते नजर नहीं आ रही है । यहां सरकार अब अनुंबध के आधार पर प्राथमिक टीचर की भर्ती करने का मन बना लिया है। वहीं हरियाणा राजकीय विद्यालय संघ ने इस व्यवस्था का पुरजोर विरोध किया है। शिक्षा की गुणवत्ता की बात की जाती है तो वहीं राज्य सरकार ऐसे निर्णय ले रहीं है जिससे निश्शुल्क अनिवार्य शिक्षा कानून के तहत अच्छी शिक्षा देने के उदृदेश्य से इतर कार्य कर रहीं है। अनुबंध आधार पर शिक्षकों की नियुक्‍ति कर सरकार शिक्षा की गुणवत्ता के साथ खिलावाड़ कर रही है। जब शिक्षक की नौकरी ही अस्थाई और कम वेतन पर रखे जाएंगे तो कैसे उम्मीद की जा सकती है कि प्रतिभावान शिक्षक मिलेंगे। जबकि अन्य सूचना प्रंबधन आदि में उच्च प्रतिभा पलायन करती है कारण साफ वहां पर अच्छा वेतन और सेवा शर्तें हैं। अगर राज्य सरकारे शिक्षा अधिकार कानून के महत्व नहीं समझेंगी और ऐसे निर्णय लेगी तो निश्चित यह कानून अपने लक्ष्य को प्राप्त नह

क्या मीडिया टीईटी मेरिट के मुद्दे पर विमर्श से बच रही है ॽ

क्या मीडिया टीईटी मेरिट के मुद्दे पर विमर्श से बच रही है ॽ        पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। सवाल उठता है कि मीडिया समाजिक मुददों पर आज क्यों इतना मौन है। शिक्षा एक ऐसा मुद्दा है जिस पर मीडिया की भूमिका स्पष्ट   होनी चाहिए।        शिक्षा अधिकार कानून आने के बाद राज्य सरकारें टीईटी और नियुक्‍ति जैसे मामले में कोई सार्थक फैसला नहीं ले रही है और ना ही एनसीटीई की गाईड लाइन को ठीक ढंग से लागू कर पा रही है। प्राथमिक टीचर भर्ती पर विवाद बना है लेकिन मीडिय तनिक भी रूचि नहीं ले रही है। क्या टीईटी मेरिट सही हैॽ एकेडमिक मेरिट से अंतिम चयन कहां तक जायज हैॽ इसके प्रभाव क्या हैॽ क्यों नियमों में परिवर्तन किया जा रहा हैॽ इसके पीछे क्या मंशा है। जैसे मुद्दों पर मीडिया भी सही पत्रकरिता नहीं कर रही हैॽ कहीं कहीं तो अपनी रिपोर्ट में आरटीई एक्ट और एनसीटीई आदि के गाईड लाइन को बिना समझें खबरें बनाई जा रही है। मीडिया एक तरफ स्कूलों में नकल की खबरें छापती है तो दूसरी तरफ एकेडमिक मेरिट की आलोचना से दूर रहती है। मीडिया में विमर्श नहीं हो रहा हैॽ नकल माफियों के मन मुताबिका सब हो रहा है। अनिवा

शिक्षा अधिकार कानून के दो साल बाद भी नहीं चेती राज्य सरकारें

शिक्षा अधिकार कानून के दो साल बाद भी नहीं चेती राज्य सरकारें      हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था हाशिए पर है। शिक्षा अधिकार कानून के लागू होने के दो साल बाद भी हमारी सरकारें सो रही हैं। शिक्षा की गुणवत्ता के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन करने का प्रावधान है। लेकिन अभी तक शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी के बाद शिक्षकों का चयन नहीं हो पाया है। इससे पता चलता है कि राज्य सरकारें शिक्षा जैसे जरूरी मुद्दे पर सरकार मौन है। उत्तर प्रदेश में टीईटी परीक्षा और प्राईमरी शिक्षक भर्ती के विज्ञापन पर पेच उलझा हआ है। वहीं राजस्थान टीईटी और शिक्षक चयन में भी वहां की सरकार कोई ठोस पहल नहीं कर रही है। हरियाणा टीईटी और चयन प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार और छात्रों के बीच मतभेद है। राज्यों का हाल ये तब है जब एनसीटीई के गाइड लाइन के तहत प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षकों की योग्यता स्पष्ट है। लेकिन राज्य सरकार की इच्छा शक्‍ति की कमी के चलते भर्ती प्रक्रिया बाधित है। भर्ती प्रक्रिया और चयन के मामलों का निपटारा अब कोर्ट के हाथों में है। शिक्षकों के चयन संबधित सरकार के उचित फैसला न लेने से मामला कोर्ट

Sarkari Naukri Recruitment Result - UPTET, BETET Merit/Counselling/Appointment: RTE : कितना मुफ्त कितना अनिवार्य

Sarkari Naukri Recruitment Result - UPTET, BETET Merit/Counselling/Appointment: RTE : कितना मुफ्त कितना अनिवार्य

अखिर कब होगा टीईटी मेरिट से चयनǃ

अखिर कब होगा टीईटी मेरिट से चयनǃ धोखाǃ धोखाǃ टीईटी पास करने वालों बेरोजगारों से। टीईटी से मेरिट को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी जहां हाईकोर्ट ने टीईटी मेरिट को अच्‍छी प्रक्रिया माना। टीईटी मेरिट से चयन के लिए धरना प्रदर्शन आंदोलन डण्‍डे बेरोजगारों को खाना पड़ा। मुख्‍यमंत्री का आश्‍वासन पाकर छात्र रूक गये लेकिन थके नहीं। आज जब यह रिपोर्ट आ रही है कि टीईटी को रद् कर दिया जाये और चयन का आधार हाईस्‍कूल इण्‍टरमीडिएट बीए के अंक से चयन होगा इसके लिए नियमों में परिवर्तन होगा। क्‍या टीईटी उतीर्ण करने वाले छात्र के साथ अन्‍याय नहीं हो रहा हैॽ आखिर ऐसी व्‍यवस्‍था पर मुहर क्‍यों लगाई जाएगी। जिससे केवल नकल माफियों को और नकल की प्रवृत्‍ति को बढ़ावा ही मिलेगा।  क्‍या सभी पहलुओं पर गौर हुआ हैॽ इस रिपोर्ट को तैयार करने में सभी पहलुओं पर ध्‍यान दिया गया हैॽ यह सवाल हर एक के मन में गूंज रहा है। क्‍या यह नहीं दिखता कि किस तरह से यूपी बोर्ड में धुंआधार नकल होती है। बीएड डिग्री कालेज भी चाहते है कि उनके कालेज में नंबर पाने के लिए हजारों रूपये देने वाले छात्र मिले। क्‍या सभी बोर्ड और यूनिवर्सिटी में एक ह
शिक्षकों की भर्ती में टीईटी मेरिट है तर्कसंगतǃ शिक्षा के अधिकार कानून के तहत 14 साल तक के बच्‍चों को निश्‍शुल्‍क शिक्षा देना अब राज्‍य की जिम्‍मेदारी है। इस कानून को बने 2 साल हो गये लेकिन अभी उत्‍तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षकों भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। जबकि पिछली सरकार की भर्ती प्रक्रिया में पेच उलझ गया है। चयन प्रक्रिया टीईटी के मेरिट से होना तय था। लाखों अभ्‍यर्थियों ने इस परीक्षा को उतीर्ण किया और सहायक प्रशिक्षु शिक्षकों के पद के लए अलग अलग 75 जिलों में आवेदन किया। लेकिन वर्तमान में उत्‍तर प्रदेश सरकार इस संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। वहीं टीईटी उतीर्ण सरकार की इस बेरूखी से विधान सभा के पास अनशन पर बैठ गए हैं। 30 मार्च से चल रहे इस अनशन का आज 2 अप्रैल को चौथा दिन है लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से कोई लिखित आश्‍वासन नहीं मिला। वहीं दूसरे दिन से कई छात्रों की अनशन के दौरान तबीयत बिगड़ गई। अनशनकारियों की मांगे साफ है कि हमने आवेदन किया और उसके मुताबिक परीक्षा उतीर्ण की इसलिए चयन के अधिकार से हमें वंचित नहीं किया जा सकता है। अगर कहीं कुछ लोगों ने गड़बड़ी की है तो

टीईटी मेरिट से ही मिलेंगे अच्‍छे शिक्षक

टीईटी मेरिट से ही मिलेंगे अच्‍छे शिक्षक उत्‍तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी को रदृ करने की खबरों से टीईटी उतीर्ण छात्रों में रोष है। पिछली सरकार ने प्राथमिक शिक्षक के लिए 72825 पद के विज्ञापन निकाला था। लेकिन सरकार बदलते ही निर्णय बदलने की संभावना के चलते टीईटी उतीर्ण अभ्‍यर्थियों का भविष्‍य दांव पर लग गया है।     विज्ञापन में टीईटी मेरिट के आधार पर चयन की बात की गई है। जबकि इसके पूर्व प्राथमिक विद्‍यालयों में चयन का आधार एकेडमिक मेरिट था। जबकि नई सरकार टीईटी मेरिट से होने वाली चयन प्रक्रिया को बदलने की तैयारी में है। बता दें की इससे पहले भी एकेडमिक मेरिट के चयन के आधार पर प्राथमिक टीचरों की भर्ती हो चुकी है। जिसमें यूपी बोर्ड से हाईस्‍कूल इण्‍टर करने वाले छात्र सीबीएससी  बोर्ड की तुलना में एकेडमिक मेरिट मे काफी पीछे रह गये। ऐसे बीएड उतीर्ण उम्‍मीद्‍वार जिनका किसी कारण से एकेडमिक मेरिट कम है। उन्‍होंने अपनी एकेडमिक मेरिट से नौकरी मिलने की संभावना छोड़ चुके थे। लेकिन शिक्षा अनिवार्य कानून के तहत शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य होने से और टीईटी के मेरिट या फिर किसी प्रतिय

लाखों टीईटी अभ्यर्थियों के साथ धोखा ǃ

लाखों टीईटी अभ्यर्थियों के साथ धोखा ǃ टीईटी निरस्त करने और अध्यापक चयन नियमावली बदलने की तैयारी चल रही है। पिछली सरकार के समय में प्राथमिक विद्यालय में 72825 शिक्षाकों की भर्ती विज्ञापन को निरस्त कर अभ्यर्थीयों का 500 रूपये वापस कर दिया जायेगा। यानि यह सरकार अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेगी। लेकिन लाखों बेरोजगारों का क्या दोष जिन्होंने मेंहनत और ईंमानदारी से टीईटी परीक्षा उतीर्ण की और हजारों रूपये खर्च किया। और यह आशा रखी की भारत का लोकतांत्रिक ढांचा के तहत नौकरी मिल जाएगी। लेकिन सरकार के बदलते ही निर्णय भी बदल दिया गया। पिछली सरकार के समय में निकली विज्ञप्‍ति को निरस्त करने की मंशा के चलते लाखों लोगों का भविष्य दांव में लग गया है।  क्या टीईटी को निरस्त करना उचित हैॽ  क्या यह सही है कि जिस टीईटी परीक्षा में इतने सवाल उठ रहे हैं तो ऐसे में सरकार को निश्पक्ष जांच कराकर दोषियों को सजा दिया जाना चाहिए। ऐसे लोगों को बाहर कर टीईटी से चयन करना चहिए जबकि किसी परीक्षा को निरस्त करना कहां की समझदारी है। वहीं टीईटी की मेरिट की हाईकोर्ट इलाहाबाद ने भी तारीफ की कहा जिस तरह से एकेडमिक प्रक्रि

टीईटी और विज्ञापन को निरस्त करने की तैयारी में बेसिक शिक्षा विभाग ǃ टीईटी में अच्छा अंक पाने वाले लाखों छात्रों के साथ होगा धोखा ǃ फसेगा कानूनी पेच ǃ नियमावली में संशोधन कर एकेडमिक होगा अन्‍तिम चयन का आधार ॽ टीईटी के महत्व को कम करने की कोशिश ǃ

टीईटी और विज्ञापन को निरस्त करने की तैयारी में बेसिक शिक्षा विभाग ǃ टीईटी में अच्छा अंक पाने वाले लाखों छात्रों के साथ होगा धोखा ǃ फसेगा कानूनी पेच ǃ नियमावली में संशोधन कर एकेडमिक होगा अन्‍तिम चयन का आधार ॽ टीईटी के महत्व को कम करने की कोशिश ǃ गलती को सुधारने के बजाये परीक्षा निरस्त करने की तैयारी ǃ आखिकार उत्‍तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को निरस्‍त करने के लिए तैयारी कर रहा है। इसके साथ ही अध्‍यापक भर्ती नियमावली के नियम को भी नई प्रक्रिया के लिए बदला जायेगा। वर्तमान में टीईटी के मेरिट से प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती का प्रावधान है जिसे मायावती सरकार ने संशोधित किया था। तब एनसीटीई के आरटीई एक्ट के मुताबिक शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य हो गया जिससे मायावती सरकार ने ही चयन का आधार बना दिया था और इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई लेकिन याचिका खारिज कर दी गई वहीं चयन का आधार टीईटी मेरिट को सही कहा गया। वहीं 72 हजार प्राईमरी टीचर का विज्ञापन निकाला गया लेकिन हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दिया जिसकी सुनवाई चल रही है। जिसमें हर जिले के डायट की जगह संयुक्त रूप से निय

आखिर टीचर की नियुक्‍ति ही क्‍यों टीईटी मेरिट से

प्राथमिक टीचर की भर्ती टीईटी मेरिट से ही सही सरकारी स्‍कूलों की हालत क्‍यो खराबॽ इस समय उत्‍तर प्रदेश में प्राथमिक विद्‍यालय की हालत खस्‍ता है। कारण साफ है यहां बुनियादी सुविधा का अभाव है। भवन बेंच टायलेट आदि नहीं है। वहीं 50 छात्रों पर एक शिक्षक तैनात है। ऐसे में बताये कोई शिक्षक अपना बेस्‍ट परफारमेंस कैसे दे पायेगा। पढ़ाई का स्‍तर जाहिर है गिरेगा ऐसे में अंग्रेजी मीडियम तमगा लिये ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे प्राइवेट स्‍कूल की बाढ़ आ गई है। प्राइवेट कान्‍वेंट स्‍कूल के दावे पर गौर करें तो यहां पर अच्‍छी फैकल्‍टी ट्रेंड टीचिंग स्‍टाफ और आधुनिक तकनीक से शिक्षा देने की बातें कहकर लोगों को आकर्षित किया जाता है जबकि इनके दावे कहां तक सच है। यह तो अपने बच्‍चों दाखिला दिलाने के बाद उनके अभिभावक अच्‍छी तरह से जानते है। टीईटी ने दिखाया सच मजेदार बात यह है कि इस समय देश में अनिवार्य शिक्षा कानून चौदह साल तक के बालकों के लिये मुफ्त में शिक्षा और गूणवत्‍तायुक्‍त शिक्षा की बात कहता है। जिसके तहत प्राइमरी और उच्‍च प्राइमरी में टीचरों की योग्‍यता के लिए एक पैमाना बनाया है। यहां प्रशिक्षित शिक्षक

प्राथमिक शिक्षक बनने का सपना संजोय लाखों लोग

प्राथमिक शिक्षक बनने का सपना संजोय लाखों लोग में बस यही बहस चल रहा है कि प्राथमिक टीचर की भर्ती की चयन प्रक्रिया क्‍या होनी चाहिए। इस पर कई लोगों के अपने अपने विचार हो सकते हैं लेकिन हम आज मौजूदा सरकारी स्‍कूलों की स्‍थिति पर ध्‍यान दें तो यह बात साफ हो कि इन स्‍कूलों में भौतिक सुविधाओं के अलावा गुणवत्‍ता युक्‍त शिक्षा भी एक बड़ी चुनौती है। अब फिर वह प्रश्‍न पूछता हूं कि प्राथमिक टीचर के चयन की प्रक्रिया क्‍या होनी चाहिएॽ जाहिर सी बात है किसी विद्‍यालय में एक अच्‍छा शिक्षक होना सबसे पहली शर्त है। अब प्रश्‍न उठता है कि अच्‍छा टीचर आएगा कैसे जब आज हमारी शिक्षा प्रणाली इतना जर्जर हो चुकी है कि आज बीएड कालेजों में नंबर की होड़ लगी है। कारण साफ है कि प्राथमिक विद्‍यालय में अभी तक अन्‍तिम चयन का आधार एकेडमिक मेरिट है। यह सुनने में अच्‍छा जरूर लगता है लेकिन ध्‍यान दें इस समय यूपी बोर्ड परीक्षा चल रही है और अखबारों में खबर रिकार्ड तोड़ हो रहा नकल। वहीं कई ऐसे बोर्ड है जहां ऐसे औसत छात्रों को भी 70 से 80 प्रतिशत नंबर आसानी से मिल जाता है जबकि यूपी बोर्ड में मेधावी छात्र भी इतना नंबर बड़ी मेंहन

भ्रष्‍टाचार के खिलाफ अन्‍ना की मुहिम जारी

भ्रष्‍टाचार के खिलाफ अन्‍ना की मुहिम जारी अभिषेक कांत पाण्डेय भ्रष्‍टाचार की मुहिम जारी है। अन्‍ना का आन्‍दोलन इस बार सख्त तेवर में सामने आ रहा है। 25 तारीख को जंतर मंतर दिल्ली में भ्रष्टाचार के खिलाफ शहीद हुए परिजन के साथ यहां एक दिन का सांकेतिक अनशन किया गया। जिसका मकसद साफ था कि मजबूत जनलोकपाल को संसद में पारित करवाना। भ्रष्‍टाचार के खिलाफ लड़ाई हर हिन्‍दुस्‍तानी की है। आज हम जिस तरह से भ्रष्‍टाचार से दो–चार अपनी रोजाना कि जिंदगी में होते हैं लेकिन अन्‍ना के भ्रष्‍टाचार के खिलाफ मुहिम ने हमारी सोच को बदल दिया है। और हम भ्रष्‍टाचार के खिलाफ आज एक साथ खड़े हैं। मीडिया ने निभाई जिम्‍मेदारी एक आम भारतीय को दो वक्त की रोजी रोटी के लिए ही पूरी जिंदगी मेंहनत करने में लगा देता है। लेकिन सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्ट ब्‍यूरोकेट्स और नेता आसानी से लाखों करोड़ों बना लेते है। हमें तो अब अश्‍चर्य करने की जरूरत भी नहीं कि देश में इतने घोटाले होते है। आश्चर्य तो यह है कि वास्तव में यह सिलसिला कब से चल आ रहा है। आखिर अब तक पता कैसे नहीं चला जाहिर हमारी मीडिया और जनता ने इस तरह के घोटालों क

टेट ऐसी छन्‍नी है जो नकलचियों को छानेगा और इसकी मेरिट मेधावियों का चयन करेगा।

टेट ऐसी छन्‍नी है जो नकलचियों को छानेगा और इसकी मेरिट मेधावियों का चयन करेगा। टीईटी की मेरिट ही केवल हो चयन का आधार। बाकी एकेडमी प्‍लस टेट आदि फार्मूला न्‍यायोचित नहीं। इसे हम अच्‍छी तरह से जानते है कि बीएड में किस तरह से खुले आम नकल होती है। और यहां पर एकडमिक मेरिट मजबूत करने का खेल हर साल चल रहा है। इसके साथ ऐसे विश्‍वविद्‍धालय जहां नकल नहीं होती और मार्किंग टाइट होती है वे नकलचियों के बीच छट जाएंगे और फिर हमारे आरटीई एक्‍ट कानून का कोई मतलब नहीं रहेगा। अतः नकलचियों और नकल माफियों पर बैन लगा सकता है टीईटी मेरिट यह सबके समझ में आनी चाहिए। दूसरी बात टीईटी के मेरिट होने से छात्र अपनी एकडमिक मेरिट में अंको के जुगाड में कोई गलत कदम नहीं उठायेंगे और उन्‍हे मालूम होगा कि टेट पास करने के लिए अभी से पढाई करों और पढार्इ से वास्‍तविक ज्ञान मिलेगा जो बच्‍चों को पढाने में काम आयेगा। इसलिए टेट आखिरी छन्‍नी है जो छानकर नकलचियों और नकल माफियों को सही रास्‍ते पर लाएगा ओर इनका धंधा बन्‍द हो जएगा।

आखिर टीचर की नियुक्‍ति ही क्‍यों टीईटी मेरिट से

आखिर टीचर की नियुक्‍ति ही क्‍यों टीईटी मेरिट से सरकारी स्‍कुलों की हालत क्‍यो खराबॽ सरकारी प्राइमरी स्‍कूलों का गिरता स्‍तर प्राइवेट इंग्‍लिस मीडियम स्‍कूलों को कुकुरमुत्‍तों की तरह उगने का मौका दे रही हैं। इस समय उत्‍तर प्रदेश में प्राथमिक विद्‍यालय की हालत खस्‍ता है। कारण साफ है यहां बुनियादी सुविधा का अभाव है। भवन बेंच टायलेट आदि नहीं है। वहीं 50 छात्रों पर एक शिक्षक तैनात है। ऐसे में बताये कोई शिक्षक अपना बेस्‍ट परफारमेंस कैसे दे पायेगा। पढ़ाई का स्‍तर जाहिर है गिरेगा ऐसे में अंग्रेजी मीडियम तमगा लिये ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे प्राइवेट स्‍कूल की बाढ़ आ गई है। प्राइवेट कान्‍वेंट स्‍कूल के दावे पर गौर करें तो यहां पर अच्‍छी फैकल्‍टी ट्रेंड टीचिंग स्‍टाफ और आधुनिक तकनीक से शिक्षा देने की बातें कहकर लोगों को आकर्षित किया जाता है जबकि इनके दावे कहां तक सच है। यह तो अपने बच्‍चों दाखिला दिलाने के बाद उनके अभिभावक अच्‍छी तरह से जानते है। टीईटी ने दिखाया सच मजेदार बात यह है कि इस समय देश में अनिवार्य शिक्षा कानून चौदह साल तक के बालकों के लिये मुफ्त में शिक्षा और गूणवत्‍तायुक्‍त शिक्षा

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