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6 Tips for Helping Child Learning from Home Hindi

children Learning at home tips बच्चे को घर से सीखने में मदद के लिए 6 Tips

6 Tips for Helping Child Learning from Home Hindi

Table of Contents

सही टाइम टेबल बनाएं Create the correct time table

6 Tips for Helping Your Child Learn from Home Hindi




कोरोनावायरस  Corona Virus के कारण दुनिया में बच्चों की पढ़ाई इस समय ऑनलाइन (Online study)  हो रही है। बच्चों  को घर से सीखने (Study Learning) में मदद करने के लिए  6 Tips लेकर आए हैं। लॉकडाउन (Lockdown) के समय से ही पढ़ाई व्यवस्था पर प्रभाव पड़ा है।

 बच्चे स्कूल में होते हैं उनकी दिनचर्या (Making Time Table) बनी रहती है। लेकिन घर पर रहने से और ऑनलाइन पढ़ाई की online study वजह से उनकी दिनचर्या routine प्रभावित हुई है। ऐसे आप अपने बच्चे के पढ़ाई के लेकर चिंतित होंगे। 

जैसा आप जानते कि आपका बच्चा जब स्कूल में होता है तो टीचर की निगरानी होता है और सीखता (learning) है। आपको अपने बच्चे पर खास ध्यान देना चाहिए इसके लिए हम आपको 6 Tips दे रहे हैं।  

 इन Tips के जरिए आप अपने बच्चे की पढ़ाई में मदद कर सकते हैं।   बच्चे का डेली रूटन Daily Routine यानी टाइम Time Table बनाकर बच्चे को पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। (to your children for making daily routine)


  1 Tips:  सही टाइम टेबल बनाएं Create the correct time table

कोविड-19  महामारी के कारण बच्चे घर से ही ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं। स्कूल ना जाने के कारण उनकी दिनचर्या इस समय बिगड़ी हुई है। घर पर रहकर बच्चा पढ़ाई कर रहा है इसलिए टाइम टेबल उसके लिए बहुत जरूरी है। 


बच्चों को घर में पढ़ाई करते समय तीन कीवर्ड (Three Keyword) का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। इसके लिए पेरेंट्स (Parents)  मदद कर सकते है। 

1.   Consistency –  

संगति का मतलब पढ़ाई घर पर करते समय  एक पाठ से दूसरे पाठ के बीच  में समझने की जैसी संगति यानी उस पाठ से दूसरे पाठ के बीच में किस तरह का संबंध यानी रिलेशन है, उसे समझना होगा । 

2. Predictability प्रेडिकेबिलटी–  पूर्वानुमान

इसका अर्थ होता है पूर्वानुमान लगाना यानी कि पढ़ते समय बच्चे के दिमाग उससे संबंधित से आने वाले प्रश्नों के बारे में पूर्वानुमान लगाता है । 

 जैसे छोटा बच्चा  ‘क’ अक्षर से कबूतर पढ़ता है तो  अक्षर से शुरुआत होने वाले कई शब्दों को वह जानता है, उन शब्दों को अपने दिमाग में  एनालिसिस (Analysis) करता है और इस तरह वह ‘क’ से कमल, कप जैसे शब्दों का पूर्वानुमान लगा लेता है। 

 प्रिडिकएबिलिटी यानी पूर्वानुमान से बच्चा पढ़ाई में सक्रिय होता है। मान लीजिए बच्चे को टास्क मिला, उसे किसी कहानी  में आगे होने वाली घटना का पूर्वानुमान लगाने के लिए कहे तो वहां एक तरफ से उसी भाषा में नए शब्दों से परिचित होता है।  इसका फायदा यह होता है कि  किसी भाषा में नए वाक्य बनाना सीखना है। भाषा की इस क्रिएटिविटी creativity के वजह से उसकी पढ़ाई जिज्ञासा वाली होती है, वह ऑनलाइन कक्षा में भी इस प्रोजेक्ट में बढ़- चढ़कर हिस्सा लेता है।

3. Follow-Through–  ऑनलाइन पढ़ाई करते समय पढ़ाई को फॉलो करना  जरूरी है। अगर  ऑनलाइन टॉपिक online topic छूट जाता है तो उसे समय रहते पूरा जरूर कर ले नहीं तो फिर आगे का टॉपिक समझ understand the topic) में नहीं आता है।  मतलब यह है कि आप अपने बच्चे  के पाठ्यक्रम के किसी भी टॉपिक को छोड़े नहीं बल्कि उसे समय रहते पूरा करवा दें जिससे कि बच्चा  पढ़ाई की गति में रहेगा।

   घर से पढ़ाई करने वाले बच्चे को इस समय  इन 3 Key words का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।  अगर बच्चा छोटा है तो उसे आप इन तीनों बातों को समझाएं और फॉलो करने की आदत उस में विकसित करें।  यह बातें ऑनलाइन कक्षा के अलावा ऑफलाइन क्लासेस में भी लागू होती है।  ऑनलाइन पढ़ाई के समय यह तीनों बातें  उसे पढ़ाई के लिए प्रेरित भी करता है और उसका मन पढ़ाई में लगता है।

 

3 की कीवर्ड्स का फायदा Keyword advantage 

 बच्चा पढ़ते समय पूर्वानुमान यानी आने वाले विषयों से संबंधित प्रश्नों  को समझना सीख जाता है और फिर वह ध्यान भी केंद्रित करता है।  क्योंकि उसका दिमाग पढ़ते समय सक्रिय (Active) रहता है।


 

2 Tips: टाइम टेबल schedule जरूरी है 

  हर सफल व्यक्ति में एक बार एक जैसी नहीं है कि वह कोई भी काम करते थे अपने ही टाइम टेबल (TimeTable) के अनुसार ही करते थे। 

आप भी अपनी बच्चे को घर में सीखने के लिए उनका एक टाइम टेबल भी बनाए। रिसर्च भी बताते हैं कि सीखने के लिए सबसे अच्छा क्या है?  पहले से Time Table  बना लें। कब और किस समय कौन सा सब्जेक्ट पढ़ना है? या क्या सीखना है? 

 इस तरह बच्चा टाइम टेबल के अनुसार अपना डेली रूटीन बनाता है।

 जब भी टाइम टेबल बनाए तो उसका सभी विवरण लिखें। छोटे बच्चों के विवरण में चित्र बना दें, जिससे पता चले कि उन्हें पढ़ना है,  या आराम करना है।  छोटे बच्चे चित्रों के अनुसार अपनी टाइम टेबल को समझ सकते हैं और वे उसका पालन करेंगे।


 3 Tips खेल खेल में सीखना


खेलना सीखने की एक अच्छी प्रक्रिया है। एजुकेशनल रिसर्च में इस बात को खास महत्व दिया जाता है इसीलिए सीखने की प्रक्रिया में खेल को शामिल किया जाता है। गिनती टेबल या अक्षर के ज्ञान वाले टॉपिक को खेल – विधियों से समझाया जाता है।

  खेल विधि से बच्चे को सिखाने में तीन तरह का फायदा होता है पहला कि वह बात करने का तरीका सीखता है, जिसे संचार यानी कम्युनिकेशन (Communication) कहते हैं।

जिसके साथ खेलता है, उससे उसका संबंध विकास, आदान प्रदान की भावना व सामाजिकता का विकास उससे होता है। Study tips

 घर पर ही खेल खेल में सीखने की प्रक्रिया का विकास आप बच्चों में  करा सकते हैं।  कहानी सुनाना, कविता याद करना कहानी को पूरा करना कार्ड विधि से अक्षर पहचानना  असाइनमेंट बनाना यह सब तरीके खेल खेल में सीखने के ही है जो आप अपने बच्चे के साथ कर सकते हैं।  तरीका आपके बच्चे को बहुत ही फायदा पहुंचाएगा और वह जल्द ही अपने सारे टॉपिक्स को धीरे धीरे सीख लेगा।  एक्टिविटीज को आप अपने टाइम टेबल में शामिल कीजिए।  

 उदाहरण के लिए, अपने बच्चे को वर्णमाला सीखने में मदद करने के लिए आप यूट्यूब चैनल  की मदद ले सकते हैं, बच्चों को एक्टिविटीज के जरिए बता सकते हैं,  चार्ट पेपर के माध्यम से उसे समझा सकते हैं।  इस तरह वह जब अक्षरों को पहचानने लगे तो उन अक्षर के छोटे-छोटे कार्ड को एक जगह इकट्ठा करने के लिए भी कह सकते हैं।  बच्चे इन कार्ड से मिलते जुलते अक्षरों को  एक शब्द के रूप में रखकर शब्द रचना भी कर सकते हैं।  इन सब एक्टिविटी इससे आप बच्चे को खेल-खेल में भी पढ़ा सकते हैं यह बिल्कुल आसान है इस तरह के कई आईडिया आपको यूट्यूब चैनल में मिल जाएंगे।

   इस तरह बच्चों के फाइव सेंस ऑर्गन है, इस एक्टिविटी से सीखने पर एक्टिव होते हैं जिसके कारण  बच्चे इंटरेस्ट लेते हैं और जल्दी सीखते हैं।


4 Tips डेली या वीकली Goal बनाएं

Set daily or weekly goals.

 दैनिक या साप्ताहिक लक्ष्य 

बनाए।

 इस समय ऑनलाइन पढ़ाई  हो रही है, बच्चा स्कूल नहीं जा रहा है इसलिए उसकी सीखने की गति कम ना हो,  इसके लिए रोजाना या सप्ताहिक लक्ष्य निर्धारित करना जरूरी है।

 It is necessary to set daily or weekly goals.

  मान लीजिए  बच्चे को  टेबल सिखाना है तो हर दिन का एक लक्ष्य बनाएं। इस दिन यह टेबल याद करना है। इसके अलावा अलावा  गैर-शैक्षणिक लक्ष्यों को शामिल करें। जैसे योग सीखना, घर के काम में मदद करना यह सब जीवन की वास्तविक अनुभव है जो बच्चा इस समय आसानी से सीख सकता है।

  सीबीएसई बोर्ड की गाइड लाइन में भी बच्चे को इस समय ऑनलाइन शिक्षा के साथ व्यवहारिक शिक्षा भी देने की बात कही गई है। घर पर बच्चे को वास्तविक जीवन से जुड़े काम को भी सिखाना चाहिए इसके लिए उनके माता-पिता उन्हें सिखा सकते हैं। इसके लिए घर परिवार के सदस्य बच्ची को खाना बनाना,  नाचना, गाना, बोलना, कहानी सुनाना, बात करने का ढंग आदि बातें सीखा सकते हैं। नई शिक्षा नीति में इस बात का जिक्र है कि बच्चा किताबों से अलग वास्तविक जीवन में उपयोग होने वाले कुशलता को भी सीखेगा।  उदाहरण के लिए सिलाई करना खाना बनाना सजावट करना पैकिंग करना साफ सफाई इन सब  कुशलता को भी पढ़ाई के साथ सीखेगा।

जब स्कूल बंद है और ऑनलाइन कक्षाएं है। ऐसे में परिवार ही बच्चे को कई कुशलता यानी इसके सिखा skill learning सकता है। यह बच्चे के विकास में बहुत  मददगार होता है।  कक्षा 6  तक पहुंचते-पहुंचते बच्चा अपनी रुचि को विकसित कर लेता है। और उसे उस काम में मजा आने लगता है। उसे बेहतर तरीके से सीखता है जो आगे चलकर उसके करियर को एक नई दिशा दे सकता है।


   Tips 5 : सीखने के लिए ब्रेक का फायदा कैसे उठाएं


सीखने की दिनचर्या learning routine में 3 तरह के ब्रेक (break time) जरूरी होता है।‌ बाहर जाने का समय आराम करने का समय

और भोजन या नाश्ता करने का समय शामिल होता है।  टाइम टेबल में ब्रेक जरूर  शामिल करें क्योंकि  समय निर्धारित होता है इससे कार्य क्षमता सीखने की बढ़ जाती है।

 इसका कारण साफ है कि अगर बच्चा लगातार पढ़ता रहेगा तो उसकी पढ़ने की रुचि खत्म हो जाएगी इसलिए समय-समय पर ग्रुप का होना जरूरी है या बाहर टाल सकता है।  नाश्ता कर सकता है थोड़ा आराम कर सकता है। इससे बच्चे के ऊपर ऑनलाइन क्लास और सीखने का बोझ भी नहीं पड़ता है क्योंकि वह समय-समय पर ब्रेक ( रेस्ट) ले रहा है। इसलिए वाह सीखने और पढ़ाई में रुचि लेता है।


    

 Tips 6: जरूरत के हिसाब से ही स्क्रीन समय  बिताए

 इन दोनों स्कूल में पढ़ाई नहीं हो पा रही है क्योंकि कोरोनावायरस का समय है और बच्चे को ऑनलाइन घर से ही पढ़ना पढ़ रहा है। ऑनलाइन पढ़ाई मोबाइल या लैपटॉप  से हो रही है। ऐसे में बच्चे को अधिक समय मोबाइल या लैपटॉप स्क्रीन पर देना पड़ता है जिससे उनकी आंखों और मस्तिष्क पर भी एक तरह से अलग प्रभाव पड़ता है लेकिन लगातार अधिक समय स्क्रीन पर बिताने से बचाने के लिए कुछ ट्रिक्स अपनाया जा सकता है। जैसे ऑनलाइन कक्षा के स्कूल में पढ़ाई स्क्रीन पर करें देखिए होमवर्क और एक्टिविटीज किताबों  और  उपयोगिता मटेरियल से करना चाहिए। जैसे कि स्लाइड बनाकर प्रेजेंटेशन करने से स्क्रीन पर अधिक समय लगता है इसके लिए सबसे अच्छा प्रोजेक्ट कार्य है कि उसी चीज को थर्माकोल चार्ट पेपर के मदद से भौतिक संसाधनों के रूप में प्रोजेक्ट बनाना ज्यादा सही है। स्कूलों के प्रोजेक्ट में भी इस बात का ध्यान इस समय रखा जा रहा है।

Screen time ऑनलाइन पढ़ाई 

ऑनलाइन पढ़ाई के समय इस स्क्रीन पर समय बच्चा दे रहा है। इसको कम करने के लिए टीवी या किसी और एक्टिविटी में मोबाइल इस्तेमाल न करने को कहा जाए।  बच्चे की डेली रूटीन में इस बात का ख्याल रखा जाना चाहिए कि उसे किताबों से अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया जाए। कुल मिलाकर  स्क्रीन समय सिड्यूल कम होना चाहिए।

स्क्रीन समय एकेडमी नॉलेज हासिल करने के लिए उपयोग करना चाहिए क्योंकि स्क्रीन समय यानी मोबाइल से ऑनलाइन क्लास या  एकेडमिक टॉपिक पर वीडियो चैट करना स्क्रीन समय का उपयोग है। लेकिन टीवी पर  सिनेमा या क्रिकेट देखना मोबाइल पर गेम खेलना स्क्रीन टाइम फायदेमंद नहीं है बल्कि इसकी जगह नान स्क्रीन टाइम बिहारी चीजों को सीखने में लगाना चाहिए जैसे- पेड़ पौधों की देखभाल, गीत संगीत सीखना डांस सीखना  आदि लोन स्क्रीन एक्टिव वर्क है। 

कहने का मतलब है कि बच्चा स्क्रीन टाइम का उपयोग पढ़ने लिखने में करें और उसके बाद बचे समय का उपयोग ना स्क्रीन जाने वाली चीजों को सीखने में लगाए। इसलिए बच्चों के टाइम टेबल में यानी दिनचर्या में इस बात का ध्यान रखना जरूरी है इस समय क्योंकि बच्चा अधिक से अधिक समय स्क्रीन टाइम में लगा रहा है जिससे वह दूसरे व्यवहारिक चीजों को हासिल नहीं कर पाएगा।

 स्क्रीन टाइम और नान स्क्रीन टाइम में बैलेंस होना जरूरी है। Its  necessary to balance between screen time and non screen time.


 Time Table क्यों जरूरी है?

time table the most important 

 आपको बताना चाहता हूं कि टाइम टेबल बनाना कितना जरूरी है, इस समय जब आपका बच्चा घर से ही पढ़ाई कर रहा है। टाइम टेबल बनाकर पढ़ने से क्या-क्या फायदे हैं। इसके बारे में कुछ पॉइंट दिए गए हैं उसे आप जरुर पढ़े और इसके बाद 6 टिप्स अपने बच्चे को पढ़ाई में किस तरह से मदद करके उन्हें इस lock-down और करोना के संक्रमण (corona sankraman ke samay) के समय उनका जीवन बदल सकते हैं।


 बच्चे को टाइम टेबल बनाने से क्या फायदा 


कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के समय बच्चा सामाजिक जीवन से अलग-थलग पड़ गया है। स्कूल ना जाने के कारण उसकी दिनचर्या अव्यवस्थित हो गई है।  बच्चा सबको अपनी आजादी न समझ ले और पढ़ाई से कहीं दूर ना भागने लगे इसलिए घर पर बच्चे के पढ़ने के लिए टाइम टेबल जरूर बनाएं। 

संक्रमण के इस समय बच्चे को घर पर ही रह कर सुरक्षित पढ़ने के लिए ऑनलाइन कक्षाएं चलती है लेकिन उसका लाभ तभी उठाया जा सकता है जब पैरंट्स अपने बच्चों के टाइम टेबल के अनुसार घर पर self-study को भी बढ़ावा दें।  इसलिए इस कोरोनावायरस काल के दौरान टाइम टेबल का महत्व बढ़ जाता है।


सुरक्षा और अपनेपन को बढ़ावा मिलता है


 जब आप अपने बच्चे की पढ़ाई में मदद करते हैं तो बच्चा भी अपनापन और सुरक्षा का एहसास करता है।

 


 जिम्मेदारी और आत्म-नियंत्रण सिखाएं

 समय का पालन करना किसी बच्चे तो अपने बचपन में ही यह चीज दिखाया जाए तो वह आगे चलकर समय के अंदर ही सब कुछ हासिल कर सकता है। 

सेल्फ कॉन्फिडेंस के साथ ही सेल्फ कंट्रोल भी बच्चों को सीखना चाहिए और इसके लिए टाइम टेबल यानी डेली रूटीन बच्चे को बताता है कि उसे इससे घंटे क्या करना चाहिए इसलिए आत्मनियंत्रण के लिए बच्चों का एक टाइम टेबल बनाएं।  टाइम टेबल बच्चे को लापरवाह होने से रोकता है उसे जिम्मेदार बनाता है।


 सकारात्मक व्यवहार का मार्गदर्शन करें

 टाइम टेबल का समय से पालन करने वाले बच्चे सकारात्मक होते हैं क्योंकि वे अपने हर काम तो समय पर कर लेते चाहे वह  पढाई  हो या घर का कोई काम। इस कारण से जो बच्चे अब समय पर अपना काम कर लेते हो हर समय किसी की परीक्षा के लिए तैयार रहते हैं ऐसे में उन्हें कॉन्फिडेंस होता है और यह कॉन्फिडेंस उन्हें सकारात्मक व्यवहार वाला बनाता है।

कोविड-19 महामारी के कारण बच्चे घर पर ही रह रहे हैं ऐसे में बच्चों को ऑनलाइन मोबाइल  से पढ़ाया जा रहा है इस इंटरनेट से पढ़ाई में बच्चे कई बातों को समझ नहीं पाते ऐसे में सही टाइम टेबल रहने के कारण आप बच्चों के थोड़ा मदद कर सकते हैं जिससे सूबे किसी भी टॉपिक पर आप से समझ सके और उनकी पढ़ने में ललक बढ़ सके।

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 दोस्तों आपको यह टिप्स पसंद आया होगा।  अब आपके मन में सवाल है तो कमेंट बॉक्स में कामेंट  करके पूछ सकते हैं। 


 लेखक 

अभिषेक कान्त पांडेय

शिक्षा- कार्य से  जुड़े हुए हैं।  सम्मानित पत्र पत्रिकाओं में लेखन।

About the author

admin

A. K Pandey,
Teacher, Writer, Journalist, Blog Writer, Hindi Subject - Expert with more than 15 years of experience. Articles on various topics have been published in various magazines and on the Internet.
Educational Qualification- MA (Hindi)
Professional Qualification-
Diploma in Journalism from Allahabad University, Master of Journalism and Mass Communication, B.Ed., CTET

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