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NIOS Hindi class 12th साठोत्तरी कविता प्रश्न उत्तर

Written by Abhishek pandey

NIOS Hindi class 12th की परीक्षा की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स के लिए साठोत्तरी कविता से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर यहां पर दिए जा रहे हैं। यह प्रश्न उत्तर आपके पढ़ाई में सहयोगी या मददगार है। new update NIOS Hindi class 12th

साठोत्तरी कविता में एनआईओएस के नोट्स में दो कवियों का उल्लेख किया गया है। 60 के दशक के बाद जो कविता लिखी गई वह आम व्यक्ति के जीवन की समस्या को व्यक्त करती है। सर्वेश्वर दयाल सक्सेना और दुष्यंत कुमार की कविता पाठ में दी गई है उससे संबंधित साठोत्तरी कविता के विशेष लक्षण और कविता के काव्य सौंदर्य के बारे में बताया गया है। एनआईओएस नए पाठ्यक्रम हिंदी क्लास 12th के लेटेस्ट अपडेट में आपका स्वागत है आगे हम NIOS Hindi class 12th पाठ से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर पर चर्चा करेंगे।

NIOS Hindi class 12th question answer

भेड़िए कविता की केंद्रीय भाव क्या है? सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता भेड़िए की व्याख्या?

class 12th Hindi पाठ संख्या 7 कविता सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की दी गई है। जिसका शीर्षक भेड़िए है। सर्वेश्वर दयाल सक्सेना कि यह कविता समाज में भेड़िए के रूप में ऐसे व्यक्ति की ओर संकेत करते हैं जो मानवता के विरुद्ध है। यह लोग शोषण करने वाले अत्याचार करने वाले और इंसानों को सताने वाले हैं।

कविता की व्याख्या

कवि इस कविता में कहते हैं कि भेड़िए के रूप में हमारे बीच दुष्ट प्रकृति के इंसान हैं जो शोषण, बर्बरता और अत्याचार के सहारे आम लोगों को डराते धमकाते हैं, उनका शोषण करते हैं।

दुष्ट प्रकृति के ऐसे इंसान को भेड़िया कहा गया है, इनकी संख्या एक नहीं कई है इसलिए कविता का शीर्षक भेड़िए हैं, जो दमनकारी शोषण वाली नीति अपनाकर आम लोगों जैसे किसान, मजदूर, निम्न वर्ग के लोग, मध्यम वर्ग के लोग का शोषण कर रहा है। शोषण करने वाले इन भेड़िए से संघर्ष करने की सीख आम इंसान को कवि दे रहे हैं।

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कवि कहते हैं कि यह भेड़िए इतिहास से अब तक हर समय हमारे बीच मौजूद रहे हैं। इन भेड़ियों को अगर भगाना है तो इनके खिलाफ एकजुट होकर मशाल जलाना है यानी आम इंसान को एक होकर उनके खिलाफ आवाज उठाना है, मशाल जलाने का यहां अर्थ है कि एकजुट होकर इनको जंगल की ओर भागना है।

कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना कहते हैं कि भेड़िए कभी मशाल नहीं जला सकते हैं। सांकेतिक भाषा में समझा जाए तो कहने का अर्थ है कि भेड़िया एक जानवर है जो आग से डरता है यानी जो भेड़िए जैसे इंसान है वह आग यानी एकता से डरते हैं। इसलिए कवि कहते है कि इतिहास में भी लोगों ने क्रांति के लिए मसाले उठाई है। शोषण और दमनकारी इंसान जो भेड़िए के रूप में हमारे इधर-उधर घूम रहे हैं। क्रांति की मसाले ने दमनकारी शोषणकारी भेड़िए को जंगल के पार भगा दिया है। यह आपस में लड़ कर खत्म हो चुके हैं।

लेकिन कविता में कवि फिर कहता है कि हम में से ही कोई फिर भेड़िया बन जाएगा इस तरह भेड़िया कभी खत्म नहीं होगा उसके लिए मसाले जलाई जाएगी। कवि इतिहास को साक्षी बनाकर कहता है कि भेड़िए के खिलाफ मसाले जलती रहेगी और भेड़िया भी इंसानी रूप में आते रहेंगे इन भेड़ियों के खिलाफ एकजुट होकर हमें आवाज उठाना है। यह बात इतिहास से सीखी है। अगली पीढ़ी को भी सीखना है।

प्रश्नोत्तरी भेड़िए कविता

एनआईओएस हिंदी क्लास 12th की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स के लिए भेड़िए कविता से कुछ important question answer यहां पर आपके लिए प्रस्तुत किया जा रहा है। यह कविता से संबंधित प्रश्न उत्तर आपके एग्जाम के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है –

प्रश्न- भेड़िए कविता में कवि किसे संगठित होने के लिए कहता है? nios Hindi class 12th

उत्तर: भेड़िया कविता में कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना किसानों, मजदूरों और निम्न वर्ग के इंसानों को संगठित होने के लिए कह रहा है। शोषण और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए आम इंसान को संगठित होने के लिए कभी आवाहन कर रहा है।

प्रश्न : भेड़िए कविता में कवि ने भेड़िया किसे कहा है?

उत्तर : इस कविता में सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने भेड़िए की सांकेतिक भाषा से उन लोगों के बारे में कहा है जो आम इंसान और गरीबों को सताते हैं। ऐसे लोग जो शोषण और अत्याचार करके लोगों को डराते हैं। उन लोगों के बारे में कहा गया है, जो सत्ता और ऊंचे पदों पर बैठकर आम लोगों का शोषण करते हैं। इस तरह से देखा जाए तो इस कविता में भेड़िए शब्द ऐसे भ्रष्ट, अत्याचारी और दुराचारी लोगों की तरफ इशारा करता है।

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प्रश्न साठोत्तरी कविता के प्रमुख लक्षण बताइए?

उत्तर एनआईओएस क्लास हिंदी 12th

सन 1960 के बाद जो कविता लिखी गई है उसे साठोत्तरी कविता के नाम से जाना जाता है। इस दौर की कविता में विषय वस्तु या कहे विशेषता या लक्षण हैं –

असंतोष, अस्वीकृति और विद्रोह स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। साठोत्तरी कविता के प्रमुख दो महत्वपूर्ण कवि दुष्यंत कुमार और सर्वेश्वर दयाल सक्सेना है। इस समय की कविता में कई व्यक्तिगत पीड़ा को और विद्रोह और आक्रोश को व्यक्त करते थे। साठोत्तरी कविता में नवगीत भी खूब लिखे गए हैं। उर्दू साहित्य विधा की गजल भी हिंदी में लिखे जाने लगे।

भेड़िए कविता का भाव सौंदर्य 30 से 40 शब्दों में लिखिए।

कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की लिखी कविता भेड़िए शब्द शीर्षक प्रतीकात्मक है। भेड़िए सबसे प्रतीक के रूप में शोषक वर्ग है। इस कविता में भेड़िए उसे शोषक वर्ग का प्रतीक है जो शोषण, दमन, अन्याय, अत्याचार जैसे इंसानी विरोधी कार्यो में अपना वर्चस्व कायम रखना चाहते हैं।

यह कविता पाठक से सीधे बातचीत करती हुई नजर आती है। इसके साथ कवि कविता के माध्यम से संगठित किसानों, मजदूरों और संघर्ष लोगों के प्रति अपनी गहरी आस्था भी दिखता है। कविता में शोषण और दमन से मुक्ति के लिए उपेक्षित वर्ग को आवाज उठाने की प्रेरणा दी गई है।

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता भेड़िए का सिर्फ सौंदर्य निम्नलिखित है-

कविता की भाषा सरल और सहज है। बोलचाल के शब्दों का प्रयोग कविता में किया गया है और कविता पाठक से बात करती हुई नजर आती है। ‌

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शोषक वर्ग के प्रतीक के रूप में भेड़िया शब्द का प्रयोग किया गया है। ‌ मजदूर, किसान, निम्न आय वर्ग के लोगों को एकजुट करती हुई कविता मशाल उठाने के लिए जागृत करती है जो प्रतीक है एकता का। यह कविता जीवन के यथार्थ को बताती है और स्वाभाविक तरीके से कविता पाठक के अंतर मन तक उतर जाती है।

कविता में लय, प्रतीक और प्रभाव उत्पादक के गुण है जिस कारण से कविता लोक जीवन के यथार्थ से सीधे जूझने की एक प्रभावशाली कसौटी बन जाती है। Hindi class 12th

एनआईओएस क्लास 12th हिंदी पाठ्यक्रम में दुष्यंत कुमार के कुछ गजल दिए उन पर आधारित प्रश्न उत्तर।

हो गई है पीर पर्वत-सी की पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए

उपरोक्त पंक्तियों की सप्रसंग सहित व्याख्या कीजिए।

प्रसंग: यह पंक्तियां दुष्यंत कुमार की मशहूर गजल है। समाज में परिवर्तन लाने के लिए समस्या के समाधान खोजने पर आधारित यह गजल सकारात्मक की सोच को पैदा करती है।

व्याख्या: कवि पंक्तियों के माध्यम से कहता है कि देश में समस्याएं बढ़ गई है इसका कोई समाधान नहीं है ऐसे में इन परिस्थितियों में कभी एक दर्द का अनुभव करता है इन समस्याओं के बारे में संकेत करते हुए कहता है कि समस्या इतना विकट रूप ले लिया है कि वह पर्वत जैसा ऊंचा हो गया है। इस कारण से इंसान को कई तरह की पीड़ाओं का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए लोगों को स्वयं हल निकालना है अपना जीवन सुखमय बनाना है। जिस तरह से हिमालय से गंगा निकलती है वैसे ही हमें भी अपनी समस्याओं का समाधान निकालना है। कबीर पंक्तियों के माध्यम से कुरीतियों और शोषण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करता है और व्यक्ति को जागरूक बनाने के लिए कहता है कि समस्या कितनी भी बड़ी हो उसका समाधान भी होता है इसलिए समाधान निकालने की संभावना प्रबल है।

काव्य का भाव और सौंदर्य पक्ष-

इस ग़ज़ल में पीड़ा कई संदर्भ में प्रयोग किया गया है जो अन्याय, शोषण, भूख, गरीबी असमानता, भेदभाव, बीमारी अशिक्षा के रूप में आया है। पीर पर्वत सी का मतलब है पहाड़ जैसा दुख में उपमा अलंकार दिखाई पड़ता है। गंगा प्रतीकात्मक है और रूपक अलंकार की तरह प्रस्तुत हुआ है। दुख के समाधान के रूप में गंगा प्रतीक की तरह है।

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Author Abhishek Pandey, (Journalist and educator) 15 year experience in writing field.
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