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AI से इन प्रोफेशनल्स की जॉब पर कोई खतरा नहीं

There is no threat to the jobs of these professionals from AI
Written by Abhishek pandey

AI टेक्नोलॉजी के विकास होने के बाद 30 करोड़ नौकरियां पर खतरा मंडरा आ रहा है। जहां आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के चलते कई तरह की नौकरियां खत्म होने वाली है। जैसे रिसेप्शनिस्ट, डाटा एनालिस्ट, टेली कम्युनिकेशन जैसी तमाम नौकरियां इंसानों के हाथ से निकलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हिस्से में चली जा रही है। लेकिन कुछ ऐसी नौकरियां है जिस पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला है।

ये सदाबहार नौकरियां मशीन या किसी टेक्नोलॉजी के प्रभाव से दूर है। एक रिपोर्ट के मुताबिक इन तरह की नौकरी करने वाले लोग निश्चित रहे क्योंकि Artificial Intelligence उनके नौकरी का विकल्प नहीं बन सकता है।

ये JOBS AI से सुरक्षित हैं

ऐसी नौकरियां है जिसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सहारे नहीं छोड़ा जा सकता है। इसकी एक लिस्ट और उसके बारे में जानकारी हम यहां पर आपको दे रहे हैं। साथ में विषय विशेषज्ञ राय भी इस पर दे रहे हैं कि इन नौकरियों के काबिल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्यों नहीं है?

शिक्षक की नौकरी Teacher Jobs

टीचिंग जॉब एक सदाबहार नौकरी है। ‌ तकनीकी का प्रभाव इसमें बहुत ही कम रूप में पड़ता है। मनुष्य को पढ़ाने के लिए Human Teacher होना जरूरी है। बहुत से ऐसे टॉपिक हैं जिसको पढ़ने के लिए ह्यूमन टीचर की जरूरत होती है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इस काम को अकेले नहीं कर सकता है। ‌ टीचिंग जॉब को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कोई खतरा नहीं है। एक टीचर अच्छी टेक्नोलॉजी को अपनाकर बेहतर काम कर सकता है लेकिन एक अच्छा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बिना टीचर के काम नहीं कर सकता है।

स्टूडेंट के साथ मनोवैज्ञानिक लगाव और पढ़ने के तरीके के बदलाव में इंसान मशीन से आगे है इसलिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इस नौकरी पर अपना प्रभाव पूरी तरीके से नहीं डाल पाएगा।

ट्रेडिशनल टीचिंग मेथड आमने-सामने बैठकर पढ़ने का विकल्प आज भी ऑनलाइन क्लासेस नहीं ले पाया है, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पढ़ाई में मदद तो कर सकता है लेकिन टीचर का स्थान नहीं ले सकता है। इसलिए भविष्य में टीचर की जॉब सुरक्षित रहेगी।

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एडवोकेट और जज की नौकरी

इंसान के जीवन के फैसले और उसके बारे में निर्णय कोई (AI) सही से नहीं ले पाएगा इसलिए जज की नौकरी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कैप्चर नहीं कर सकता है।

‌इसी तरह बहस के समय तथ्य (fact) प्रस्तुत किए जाते हैं और उसे मानवीय भावनाओं और तर्क के साथ समझा जाता है, डाटा एनालिसिस और क्लाइंट को समझने की स्किल होती है।

कानूनी जटिल प्रक्रिया और निर्णय तक पहुंचाने और उसे प्रेजेंट करने मे वकील (Advocate) की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। AI के वकील की सहायता कर सकता है। लेकिन खुद वकालत नहीं कर सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्च और डाटा एनालिसिस करने में मददगार साबित होता है जिसके आधार पर एडवोकेट अपनी बात को मजबूती से और रिसर्च के आधार पर कोर्ट में रखता है। ‌

इस क्षेत्र में व्यक्तिगत अनुभव और ज्ञान बहुत महत्व रखता है इसलिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पूरा नहीं कर सकता है। इस तरह से देखें तो एडवोकेट और जज की नौकरी पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कामयाब नहीं हो सकता है।‌ किसी मनुष्य के अपराध और निर्दोष करने के फैसले में जज की भूमिका अहम होती है। ‌

कंपनी के डायरेक्टर मैनेजर सीईओ की जॉब

किसी भी कंपनी में डायरेक्ट, मैनेजर, सीईओ निर्णय लेने वाले होते हैं। कंपनी को ऊंचाइयों तक पहुंचने में इनका निर्णय बहुत अहम रोल अदा करता है। ‌ कंपनी के कर्मचारियों के टीम का लीडर प्रबंधक या सीओ होता है। इसलिए बहुत कम संभावना है कि कोई कंपनी इस पद पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से काम ले। सही निर्णय से ही कंपनी आगे बढ़ सकती है इसलिए ह्यूमन डिसीजन के इस पोस्ट पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को मौका नहीं दिया जाएगा।

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मानव संसाधन प्रबंधन (Human Resource Manager)

मानव संसाधन प्रबंधन के काम को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल एक सीमा तक ही कर सकता है। कर्मचारियों के चयन में Best Resume का सिलेक्शन तो कर सकता है। लेकिन इस क्षेत्र में बहुत से ऐसे काम है। जैसे –

  • नए प्रोफेशनल की नियुक्ति का आधार, कर्मचारियों को मोटिवेट करना, कर्मचारियों में किस तरह का असंतोष है, इसका पता लगाकर उसको ठीक करना।
  • इन सब तमाम काम करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से को नहीं रखा जा सकता है क्योंकि इससे गलतियां होने की संभावना हो सकती है।
  • क्योंकि एक मशीन अपने एल्गोरिथम के अनुसार ही काम करेगा जबकि मानव संसाधन प्रबंधन human resource manager कर्मचारियों को नियुक्ति और उनके काम के तरीकों को विकसित करने में काम कर सकता है।
  • जबकि AI के भरोसे यह काम सही से नहीं हो सकता है। इसलिए इस क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से काम नहीं लिया जाएगा।

मनोचिकित्सक और मनोवैज्ञानिक की नौकरी

मनुष्य के व्यवहार को एक psychiatrist and psychologist ही समझ सकता है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मनुष्य के सोच और व्यवहार समझने में गलतियां कर सकता है। एक इंसान मनोचिकित्सक के रूप में वह सही सलाह एक इंसान को दे सकता है। ‌ इसलिए इस क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सही से काम नहीं कर पाएगा इसलिए मनोचिकित्सक, मनोविश्लेषक, काउंसलर की नौकरी में इंसान से ही काम करवाए जाएंगे। इसके साथ बता दे कि आज के समय में मानसिक स्वास्थ्य बहुत जरूरी है, इसके लिए मनोचिकित्सक और मनोविश्लेषक की जरूरत होती है जो सही सलाह दे सकता है इसकी जगह कोई मशीन नहीं ले सकती है।

मेडिकल सर्जन

सर्जरी के क्षेत्र में माइक्रो रोबोट का इस्तेमाल तो किया जा सकता है लेकिन एक सर्जन का स्थान कभी भी AI टेक्नोलॉजी पूरी तरीके से नहीं ले सकता है।

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किसी रोग के ऑपरेशन के लिए कई तरह के फैक्टर काम करते हैं जिस पर निर्णय एक सर्जन ही ले सकता है, इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता है इसलिए सर्जन के जॉब में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दखलंदाजी नहीं होगी।

आर्टिस्ट और लेखक का काम

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रभाव कलाकारों और लेखक के काम पर नहीं पड़ेगा। क्रिएटिविटी एक इंसान की मस्तिष्क का एक जटिल कार्य है। जिसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से करवाया तो जा सकता है लेकिन उस तरह की उपलब्धि नहीं मिल सकती जैसा इंसान करता है।

इसके पीछे कारण यह है कि लेखक का अपना अनुभव होता है वह किसी कंटेंट में अपनी क्रिएटिविटी से जान फूंक सकता है। म्यूजिशियन, आर्टिस्ट, ड्रामा, डांस के क्षेत्र में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मनुष्यों का मुकाबला नहीं कर सकता है। क्योंकि इस क्षेत्र में एनालिसिस के साथ ही जबरदस्त क्रिएटिविटी होना जरूरी है और यह मनुष्यों में ही हो सकता है। इस क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सही तरीके से काम नहीं कर सकता है।

कंप्यूटर सिस्टम विश्लेषक की जॉब

कई तरह के सॉफ्टवेयर और उनके हार्डवेयर सिस्टम को सेटअप करना, शेड्यूल बनाना, ऑटोमेशन बढ़ाना, सिस्टम एनालिसिस का हिस्सा होता है इसलिए इस जॉब में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से के जरिए नहीं कराया जा सकता है।

Conclusion

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को लेकर दुनिया में हर भाषा, हर देश में बहस हो रही है। बीबीसी ने यहां तक कह दिया है कि हम अपनी पत्रकारिता में मशीन को उतना महत्व नहीं देंगे बल्कि इंसानी दिमाग और उसके ओरिजिनल वर्क को महत्व देंगे।

वहीं दूसरी तरफ विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के गलत इस्तेमाल से मानवता को खतरा भी हो सकता है।
आखिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का एथिक्स क्या होगा? एक बहुत बड़ा सवाल है। आपने स्कूली किताबों में एक निबंध जरूर पढ़ा होगा ‘विज्ञान वरदान है या अभिशाप’ इन दोनों के पक्ष और विपक्ष में तर्कशील बातें होती हैं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के संबंध में यह बातें आज उठ रही है। ‌
आपके विचार क्या है? आप कमेंट करके newgyan पर हमसे जुड़ सकते हैं।

About the author

Abhishek pandey

Author Abhishek Pandey, (Journalist and educator) 15 year experience in writing field.
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