प्रोफेसर ने बना दी दुनिया की सबसे सस्ती कार, जाने इसकी खूबियां सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

प्रोफेसर ने बना दी दुनिया की सबसे सस्ती कार, जाने इसकी खूबियां

 प्रोफ़ेसर ने बना दी दुनिया की सबसे सस्ती कार, जाने इसकी खूबियां

80000 की सबसे सस्ती कार

 यह है दुनिया की सबसे छोटी कार।  यही नहीं यह कार इतनी सस्ती है कि अब आम आदमी भी इस कार का लुफ्त उठा सकता है। यह 4 सीटर कार अपने आप में बेमिसाल है।   इस कार को बनाया है-  प्रोफ़ेसर महीप ने।  लॉकडाउन में उन्होंने कार बनाकर सबको आश्चर्य में डाल दिया।  हर किसी का सपना होता है कि उसके पास भी एक कार हो  लेकिन कार इतनी महंगी होती है कि आम आदमी का सपना पूरा नहीं हो पाता है।  प्रोफ़ेसर साहब ने ₹ 80000 में बैटरी से चलने वाली 4 सीटर कार बनाकर लोगों का सपना पूरा कर रहे हैं।  आइए जाने इस कार की खूबियां-


3 महीने की कड़ी मेहनत रंग लाई

 

आईपीएस कॉलेज के प्रोफेसर महिप सिंह ने सपना देखा था कि कम कमाई करने वाले लोगों  को कार का सुख मिल सके इसलिए उन्होंने लाक डाउन में इस समय का उपयोग किया और एक सस्ती कार बना डाली। जो दिखने में बहुत बेहतरीन है।  3 महीने की मेहनत रंग लाई और कार उन्होंने बनाकर सड़क पर दौडाई।


बैटरी से चलने वाली कार 

 4 सीटर वाली यह कार बैटरी से चलती है, जिसे चार्ज करने में 2 घंटे का वक्त लगता है।  कार की बैटरी एक बार चार्ज होने  पर अधिकतम 40 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से चलती है। कार की  डिजाइन, कलर, पहिए, लाइट, मीटर आदि को अट्रैक्टिव बनाया गया है। 

 कार की मोटर की क्षमता 1500 वाट है। इसमें डिजिटल मीटर व डिस्क ब्रेक लगा हुआ है।

कार की जमीन से ऊंचाई  6 इंच है और इसका वजन 120 किलोग्राम है। कार को एक बार चार्ज कीजिए और 100 किलोमीटर तक की दूरी का सफर बिना रुके तय कीजिए।  कार 6 सेकंड में 40 किलोमीटर की गति पकड़ लेती है।

 कार की बॉडी में एलमुनियम व  कंपोजिट सीट का प्रयोग किया गया है।  कार की लंबाई साढ़े छह व चौड़ाई तीन फीट रखी गई है। 

प्रोजेक्ट वर्क से पढ़ाई क्यों जरूरी है?  पढ़ने केेेेे लिए क्लिक करें।

टिप्पणियां

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

लघु-कथा' CBSE BOARD CLASS 9 NEW SYLLABUS LAGHU KATHS LEKHAN

'लघु-कथा' CBSE BOARD CLASS 9 NEW SYLLABUS LAGHU KATHA LEKHAN  लघु और कथा शब्द से मिलकर बना हुआ है। लघु का अर्थ होता है- छोटा और कथा का अर्थ होता है-कहानी। इस तरह लघुकथा का अर्थ हुआ कि 'छोटी कहानी'। छात्रों हिंदी साहित्य को दो भागों में बाँटा गया है, पहला गद्य साहित्य और दूसरा काव्य साहित्य।  गद्य साहित्य के अंतर्गत कहानी, नाटक, उपन्यास, जीवनी, आत्मकथा विधाएँ आती हैं। इसी में लघु-कथा विधा भी 'गद्य साहित्य' का एक हिस्सा है। कहानी उपन्यास के बाद यह विधा सर्वाधिक प्रचलित भी है। आधुनिक समय में इंसानों के पास समय का अभाव होने लगा और वे कम समय में साहित्य पढ़ना चाहते थे तो  'लघु-कथा' का जन्म हुआ। लघु कथा की परंपरा हमारे संस्कृति में 'पंचतंत्र' और 'हितोपदेश' की छोटी कहानियों  से भी  रही है। इन कहानियों को लघु-कथा भी कह सकते हैं। आपने भी छोटी-छोटी लघु कहानियाँ अपने बड़ों से जरूर सुनी होगी।  'पंचतंत्र' में इस तरह की लघु-कथाओं में जीव-जंतु यानी जानवरों और पक्षियों के माध्यम से मनुष्य को नीति की शिक्षा यान

संज्ञा और उसके भेद

​हिंदी व्याकारण नवाचार कक्षा 4 व 5 संज्ञा और उसके                              सामग्री- 6 कार्ड उसमें संज्ञा के तीनों भेद के उदाहरण लिखा हुआ होगा। यह कार्ड ताश के पत्ते के आकार का होगा। प्रथम चरण सर्वप्रथम शिक्षक द्वारा कक्षा में बच्चों का नाम  पूछेगा। आपक नाम क्या है? इस तरह वह छह बच्चों से नाम पूछकर उन्हें एक एक कार्ड क्रम से दे देगा और बैठने के लिए कहेंगे। कुछ बच्चों से शिक्षक पूछेगा कि वे कहाँ-कहाँ घूमने के लिए गए थे? इस तरह से कुछ स्थानों का नाम वह श्यामपट्ट पर लिख देगा। दूसरा चरण प्रस्तावना प्रश्न के बाद, ब्लैक बोर्ड पर संज्ञा लिखना, फिर किसी बच्चे का नाम ब्लैकबोर्ड पर लिखना। वह किस शहर में रहता है। वह भी लिखना। फिर एक पंक्ति में यह बताना कि मैं प्रयागराज में रहता हूं। तो यहाँ पर संज्ञा कौन-कौन सी है। उसे इंगित करेंगे यानी जो नाम है, वह संज्ञा है। `राजू` यहां पर किसी भी बच्चे का नाम लिख सकते हैं। संज्ञा एक नाम है क्योंकि यह एक लड़के का नाम है। जबकि `प्रयागराज` किसी स्थान का नाम है, इसलिए यह भी संज्ञा है।  श्यामपट् पर व्यक्तिवाचक संज्ञा लिखकर, पहले वाले बच्चे

जानो पक्षियों के बारे में

जानकारी बच्चो, इस धरती में कई तरह के पक्षी हैं, तुम्हें जानकर आश्चर्य होगा कि हमिंग बर्ड नाम की पक्षी किसी भी दिशा में उड़ती है, तो कुछ पक्षी ऐसे हैं, जो अपने कमजोर पंख की वजह से उड़ नहीं पाते हैं। चलते हैं पक्षियों के ऐसे अजब-गजब संसार में और जानते हैं कि ये पक्षी कौन हैं? ----------------------------------------------------------------------- हवा में उड़ते हुए तुमने सैकड़ों पक्षियों को देखा होगा। लेकिन कई ऐसे पक्षी भी हैं, जो उड़ नहीं सकते, तो कुछ किसी भी दिशा में उड़ सकते हैं। तुम्हें जानकर हैरानी होगी कि रेटाइट्स बर्ड परिवार से जुड़े विशालकाय पक्षी कभी उड़ा भी करते थे। पर समय गुजरने के साथ-साथ ये जमीन पर रहने लगे। इस कारण से इनका शरीर मोटा होता गया। उड़ान भरने वाले पंख बेकार होते गए और वो छोटे कमजोर पंखनुमा बालों में बदल गए। इनके बारे में तुम जानते हो, शतुर्गमुर्ग, जो ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है। यह उड़ नहीं सकता है लेकिन जमीन पर ये 7० किलोमीटर घंटे की गति से दौड़ सकता है। ऐसे ही कई रेटाइट्स बर्ड परिवार से जुड़े पक्षी की लंबी लिस्ट हैं, जिनमें पेंग्विन, इम्यू, कीवी, बतख आदि आते हैं।